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सिद्धचक्र महामंडल विधान में 1024 अर्घ्य किए समर्पित

एक वर्ष पहले
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टीकमगढ़| शहर की नंदीश्वर कॉलोनी में अष्टानिका महापर्व के पावन अवसर पर 2 मार्च से सिद्धचक्र महामंडल विधान चल रहा है। सोमवार को सिद्धचक्र विधान में 1024 अर्घ्य मंडप पर चढ़ाए गए।

मंगलवार को विश्व शांति महायज्ञ के साथ हवन होगा और सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन होगा। आठ दिवसीय यह पर्व अष्टानिका महापर्व होता है। इन 8 दिनों में विशेष प्रकार की ऊर्जा रहती है। सोमवार को नंदीश्वर मंदिर में सुबह 6.30 भगवान का अभिषेक एवं शांति धारा की गई। इसके बाद 8 बजे से पंडित सुनील कुमार शास्त्री एवं राजीव शास्त्री द्वारा विधान शुरू कराया गया। सोमवार को सिद्धचक्र महामंडल विधान में 1024 अर्घ्य मंडप पर इंद्र-इंद्राणिओं द्वारा चढ़ाए गए।

दुर्लभ मति माताजी ने अपने प्रवचनों में कहा कि विधान के अंतिम दिन श्रीपाल की भक्ति और अधिक गहराती चली जाती है। सिद्ध प्रभु के नजदीक पहुंच जाते है। उनकी साधना निरंतर चलती रही। राजा श्रीपाल संसार के सारे वैभव छोड़कर दिगंबरी मुनि दीक्षा धारण करके अपनी आत्मा का कल्याण कर लेते हैं। माताजी ने कहा कि आप लोगों ने 8 दिन तक सिद्धचक्र महामंडल विधान में सिद्ध भगवान की आराधना की। अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, विधान किया कुछ लोगों ने तो उपवास भी किए हैं। आप लोगों के परिणाम सरल एवं शांत होना चाहिए। तभी सिद्धचक्र महामंडल विधान का फल प्राप्त हो पाएगा। यदि भावों में विशुद्धि नहीं आती, मन में परिणाम आकुल व्याकुल बने रहते हैं, अपने परिणामों को शांत करो।
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