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एक मंदिर ऐसा जहां कभी दीवान रियासत की शनो-शौकत की पहचान थी, आज है वीरान, अब यहां होता है अंतिम संस्कार

Damoh News - क्षेत्र का मुवार ग्राम जहां सदियों पहले न्याय के लिए राजा हीरा की कचहरी खुलती थी। यहां पर राम, लक्ष्मण, जानकी के...

Nov 11, 2019, 06:26 AM IST
क्षेत्र का मुवार ग्राम जहां सदियों पहले न्याय के लिए राजा हीरा की कचहरी खुलती थी। यहां पर राम, लक्ष्मण, जानकी के दिव्य मन्दिर से राजमहल तक पहुंचने के लिए सुरंग का उपयाेग होता था। खजाना रखने के लिए तहखाना, सिंघासन, विश्राम के लिए पलंग, मूर्तियां, घोड़े की मूर्तियां, वेदी, कलश, साथ-साथ दीवाराें पर सुंदर पेंटिंग बनी हुई हैं। लेकिन इस मंदिर किला कचहरी की कोई देखरेख नहीं होने से इस विरासत पर संकट खड़ा हो गया है। राम-जानकी मन्दिर, किला, दीवानी दरवाजे, कचहरी अपने अस्तित्व काे बचाने के लिए जूझ रहे हैं।

बनवार के ग्राम मुवार में हीरापुर के राज परिवार की मालगुजारी दीवान दरयाब सिंह के जमाने तक चलती रही, जिनके द्वारा एक भव्य राम-जानकी मंदिर का निर्माण करवाया गया। जिसमें राम, जनकी, लक्ष्मण की पूजन उनके जीवन काल तक होती रही, लेकिन उनकी मृत्यु के बाद जब भगवान की पूजन भोग के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई तो मंदिर से इन प्रतिमाओं को उठाकर समीप के ग्राम झरौली के शाला मंदिर में विराजमान कर दिया गया। जहां आज यह क्षेत्र का प्रमुख आस्था का केंद्र बना हुआ है। राम-जानकी मंदिर के निर्माण की खासियत यह थी की दीवान दरयाब सिंह के द्वारा निर्मित इस मंदिर में से महल तक अंदर ही अंदर सुरंग बनाई गई थी, जिसके जरिए दीवान परिवार नित्य पहुंचकर पूजन करता था। लेकिन इस वैभवशाली मंदिर की देखरेख दीवान की मृत्यु के बाद उनके वंशजों के द्वारा नहीं की गई। जिससे यह मंदिर वीरान होकर जमींदोज होने की कगार पर पहुंच गया है।

राज दरबार की कचहरी हुआ करती थी जो आज भी खंडहर पड़ी हुई है। लेकिन राजशाही ठाट वाट के साजो सामान आज भी किले मंदिर के दरवाजे में अवशेष के रूप मे दिखाई दे रहे हैं।

भास्कर संवाददाता | बनवार

क्षेत्र का मुवार ग्राम जहां सदियों पहले न्याय के लिए राजा हीरा की कचहरी खुलती थी। यहां पर राम, लक्ष्मण, जानकी के दिव्य मन्दिर से राजमहल तक पहुंचने के लिए सुरंग का उपयाेग होता था। खजाना रखने के लिए तहखाना, सिंघासन, विश्राम के लिए पलंग, मूर्तियां, घोड़े की मूर्तियां, वेदी, कलश, साथ-साथ दीवाराें पर सुंदर पेंटिंग बनी हुई हैं। लेकिन इस मंदिर किला कचहरी की कोई देखरेख नहीं होने से इस विरासत पर संकट खड़ा हो गया है। राम-जानकी मन्दिर, किला, दीवानी दरवाजे, कचहरी अपने अस्तित्व काे बचाने के लिए जूझ रहे हैं।

बनवार के ग्राम मुवार में हीरापुर के राज परिवार की मालगुजारी दीवान दरयाब सिंह के जमाने तक चलती रही, जिनके द्वारा एक भव्य राम-जानकी मंदिर का निर्माण करवाया गया। जिसमें राम, जनकी, लक्ष्मण की पूजन उनके जीवन काल तक होती रही, लेकिन उनकी मृत्यु के बाद जब भगवान की पूजन भोग के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई तो मंदिर से इन प्रतिमाओं को उठाकर समीप के ग्राम झरौली के शाला मंदिर में विराजमान कर दिया गया। जहां आज यह क्षेत्र का प्रमुख आस्था का केंद्र बना हुआ है। राम-जानकी मंदिर के निर्माण की खासियत यह थी की दीवान दरयाब सिंह के द्वारा निर्मित इस मंदिर में से महल तक अंदर ही अंदर सुरंग बनाई गई थी, जिसके जरिए दीवान परिवार नित्य पहुंचकर पूजन करता था। लेकिन इस वैभवशाली मंदिर की देखरेख दीवान की मृत्यु के बाद उनके वंशजों के द्वारा नहीं की गई। जिससे यह मंदिर वीरान होकर जमींदोज होने की कगार पर पहुंच गया है।

राज दरबार की कचहरी हुआ करती थी जो आज भी खंडहर पड़ी हुई है। लेकिन राजशाही ठाट वाट के साजो सामान आज भी किले मंदिर के दरवाजे में अवशेष के रूप मे दिखाई दे रहे हैं।

मंदिर हमारे पूर्वजों द्वारा बनवाया गया था : बलराम सिंह

ग्रामवासियों का कहना है कि यह मंदिर किला आज भी अपने सुंदर बनावट की वैभवशाली गाथा का प्रतीक है। जिसकी मरम्मत समय रहते हो जाए तो जिले का दर्शनीय क्षेत्र बन जाएगा।

दीवान निजाम सिंह मुवार भगवत सिंह ने बताया कि आज भी दीवान साब की कचहरी में ग्राम के विवादों का निपटारा किया जाता है और कचहरी के न्याय को सभी मानते हैं।

बलराम सिंह बताते की यह मंदिर हमारे पूर्वजों के द्वारा बनवाया गया था। जिसके जीर्णोद्धार पर खर्च होने वाली लागत हम व हमारे ग्रामवासियों के पास नहीं है, लेकिन शासन चाहे तो मंदिर की मरम्मत करवाकर इसका संरक्षण किया जा सकता है। जिसके लिए हम ग्राम वासी सहमत हैं और इस मंदिर को पर्यटकों को लुभाने के लिए संरक्षित किया जा सकता है। इस प्राचीन मंदिर में बहुत ही अनोखी मूर्तियां हुआ करती थीं, जिसके अवशेष आज भी मन्दिर के दरवाजे पर गणेश की मूर्ति पत्थरों की कटिंग मूर्तियां आज भी स्थापित हैं। सुरंग दरवाजा जहां से दीवान साब आते-जाते थे वह सुरंग आज भी है। इसके अलावा सोने के लिए पलंग, झांकियों के लिए स्थान, मंदिर पर कलश चारों कोनों की खास बनावट, मंदिर की सजावट में चार चांद लगा रही है। गांव व क्षेत्र का यह प्राचीन मंदिर आज भी दर्शनीय स्थल बना हुआ है, लेकिन देखरेख के अभाव में मंदिर के इर्द गिर्द दीवान साहब के वंशजों के मुर्दे जलाने का श्मशान बन चुका है।

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