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कलेक्टर ने जांच प्रतिवेदन मांगा, अधिकारियों ने जांच से किया इंकार

एक वर्ष पहले
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बुंदेलखंड पैकेज से दमोह में पीएचई, आरईएस, जल संसाधन विभाग, वेटरनरी, कृषि विभाग और वन विभाग में काम किए गए थे, पैकेज की 60 प्रतिशत राशि का भ्रष्टाचार होने की बात सामने आई है, निर्माण कार्यों से जुड़े दस्तावेज विभागों के पास भी नहीं हैं, जिससे सवाल खड़ा हो गया है आखिर जांच होगी कैसे?

जिले में बुंदेलखंड पैकेज की जांच को लेकर शासन की ओर से जारी किया गया आदेश मजाक बन गया है। शासन ने पत्र लिखकर कलेक्टर से जांच का प्रतिवेदन उपलब्ध कराने के लिए कहा है, लेकिन जब कलेक्टर ने उक्त निर्माण कार्यों में हुईं गड़बड़ी की जांच के लिए संबंधित विभागों को आदेश दिया तो अधिकारियों ने जांच करने से इंकार कर दिया।

अधिकारियों का कहना है कि उनके पास ऐसे कोई दस्तावेज नहीं हैं जिससे वे जांच कर सकें, बिना दस्तावेज के जांच नहीं हो सकती। दरअसल, कांग्रेस की सरकार ने बुंदेलखंड पैकेज की जांच के आदेश दिए हैं, दमोह में 619 कराेड़ रुपए के काम हुए हैं, जिनमें पीएचई, आरईएस, जल संसाधन विभाग, वेटरनरी, कृषि विभाग और वन विभाग के काम शामिल हैं।

शासन ने जांच ईओडब्ल्यू को सौंपी है, उसके बाद से जिले के कलेक्टरों को पत्र जारी करके जांच का प्रतिवेदन के लिए कहा है, करीब दो माह पहले पत्र मिलने के बाद कलेक्टर ने संबंधित विभागों को पत्र जारी करके आदेश दिया था कि वे अपना-अपना जांच प्रतिवेदन पेश करें, लेकिन जब अधिकारियों को पत्र मिला तो उन्होंने जांच करने से मना कर दिया। दरअसल, विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जितने भी काम हुए हैं, उन्हें बुंदेलखंड पैकेज और बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण के माध्यम से कराया गया है। इनके वर्क आर्डर, निविदा और एजेंसी व मूल्यांकन के प्रमाण पत्र दमोह के किसी भी कार्यालय में नहीं हैं, सारे दस्तावेज संभाग स्तर पर बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण कार्यालय में होना बताए जा रहे हैं, इसलिए जांच को लेकर सवाल खड़ा हो गया है।

आरईएस के उपयंत्रियों ने जांच करने से इंकार कर दिया है। हमने दस्तावेज मांगे हैं हैरानी की बात यह है कि जांच का आदेश कलेक्टर ने योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग को भेजा था।

जिस पर विभाग ने संबंधित विभागों को पत्र जारी करके जांच प्रतिवेदन मांगा था, लेकिन सभी विभागों के उपयंत्रियों ने जांच करने से इंकार कर दिया।

शासन से जांच कराने का आया था आदेश

जबकि कलेक्टर तरुण राठी का कहना है कि शासन से पैकेज की जांच कराने का आदेश आया था, लेकिन जब विभागों से जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था, तो उन्होंने दस्तावेज देने से इंकार कर दिया। इसलिए सागर के बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण और बुंदेलखंड पैकेज से जुड़े कामों के दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। अभी तक वहां से कोई भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।

विभागों में जारी किया था पत्र

प्रभारी याेजना एवं सांख्यिकी अधिकारी अलका रजनी दास ने बताया कि कलेक्टर का पत्र मिलने के बाद सभी विभागों को पत्र जारी कर दिया गया था, लेकिन किसी भी विभाग ने जांच प्रतिवेदन नहीं दिया है। सभी विभागों के अधिकारियों ने निर्माण कार्यों से जुड़े दस्तावेज मांगे हैं, जो कि स्थानीय स्तर पर नहीं हैं। हमने कलेक्टर को स्थिति से अवगत करा दिया है।
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