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दमोह के कांग्रेस विधायक राहुल सिंह जयपुर में इसलिए 13 मार्च का कर्जमाफी शिविर स्थागित
दूसरे चरण में 16 हजार किसानों का होना है कर्जमाफ, सरकार की अस्थरता के चलते विधायक के जयपुर जाने पर जिला प्रशासन से कार्यक्रम को किया स्थगित
प्रदेश में कांग्रेस की अस्थिर सरकार के चलते किसान कर्जमाफी का दूसरा चरण अब खटाई में पड़ गया है। 8 मार्च को दूसरे चरण की कर्जमाफी का पहला शिविर पथरिया विधानसभा में लगा, मगर अन्य मंत्रियों के साथ बेंगलूरु में शिफ्ट होने के चलते ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक दमोह के प्रभारी मंत्री डॉ. प्रभूराम चौधरी नहीं पहुंचे, ऐसे में अधिकारियों ने ऋण माफी के चैक बांटे, अब 13 मार्च को दमोह विधानसभा का कृषि उपज मंडी में ऋण माफी का शिविर होना है, लेकिन इस बार दमोह के कांग्रेस विधायक राहुल सिंह सरकार की अस्थिरता के चलते जयपुर शिफ्ट कर दिए गए हैं। जिसके चलते शिविर स्थगित करने का निर्णय जिला प्रशासन ने लिया है।
भोपाल में राजनैतिक उठापटक के चलते जिला प्रशासन तय कार्यक्रम भी नहीं कर पा रहा है, प्रभारी मंत्री से लेकर विधायक तक कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए मौजूद नहीं हैं। जिसके चलते दूसरे चरण की कर्जमाफी के शिविर अधर में अटक गए हैं। बताया जाता है कि जयकिसान कर्जमाफी योजना के तहत दमोह में पहले चरण में 49 हजार किसानों का 50 हजार रुपए तक का कर्जमाफ होने के बाद अब दूसरे चरण में करीब 16 हजार किसानों का एक लाख रुपए तक का कर्ज माफ होना है। दमोह में यह प्रक्रिया 8 मार्च से प्रारंभ हुई। सबसे पहले जिले में पथरिया की बसपा विधायक रामबाई और दमोह विधानसभा के कांग्रेस विधायक राहुल सिंह के क्षेत्र में कर्जमाफी होनी थी। जबकि जबेरा और हटा विधानसभा में तिथि टाल दी गई थी। क्योंकि हटा और जबेरा में विधायक बीजेपी के हैं। पथरिया और दमोह में करीब 7 हजार 4 सौ किसानों का कर्ज माफ करने के लिए 45 करोड़ रुपए सरकार ने जारी भी कर दिए हैं। 8 मार्च को प्रभारी मंत्री के पथरिया आने का कार्यक्रम था, लेकिन वे नहीं आए, 13 मार्च को दमोह कृषि उपज मंडी में दमोह विधानसभा का शिविर लगाया जाना था, जिसमें कृषि मंत्री सचिन यादव को आमंत्रित किया गया था, लेकिन अस्थिर सरकार होने के चलते उनका आना संभव नहीं हो पा रहा है। कलेक्टर तरुण राठी ने बताया कि अभी तक की स्थिति में शिविर को लेकर कोई गाइड लाइन नहीं आई है, इसलिए असमंजस की स्थिति है। शिविर स्थगित है, मार्गदर्शन मांगा गया है, यदि कोई आदेश आएगा तो सूचित किया जाएगा।
फैक्ट फाइल
{ जिले में जय किसान ऋण माफी योजना के तहत 1 लाख 13 हजार किसानों का कर्ज माफ होना है
{ पहले चरण में 50 हजार रुपए तक कर्ज 49 हजार किसानों का माफ किया जा चुका है
{ दूसरे चरण में एक लाख रुपए तक का कर्ज 16 हजार किसानों का माफ होना है, जिसमें से पथरिया और दमोह के 74 सौ किसान का कर्ज माफ होने जा रहा है।
{ जबेरा और हटा विधानसभा के 9 हजार से ज्यादा किसानों की कर्जमाफी टाली गई है
किसानों का एक लाख रुपए तक का कर्ज माफ होना है। दमोह में यह प्रक्रिया 8 मार्च से प्रारंभ हुई। सबसे पहले जिले में पथरिया की बसपा विधायक रामबाई और दमोह विधानसभा के कांग्रेस विधायक राहुल सिंह के क्षेत्र में कर्जमाफी होनी थी। जबकि जबेरा और हटा विधानसभा में तिथि टाल दी गई थी। क्योंकि हटा और जबेरा में विधायक बीजेपी के हैं। पथरिया और दमोह में करीब 7 हजार 4 सौ किसानों का कर्ज माफ करने के लिए 45 करोड़ रुपए सरकार ने जारी भी कर दिए हैं। 8 मार्च को प्रभारी मंत्री के पथरिया आने का कार्यक्रम था, लेकिन वे नहीं आए, 13 मार्च को दमोह कृषि उपज मंडी में दमोह विधानसभा का शिविर लगाया जाना था, जिसमें कृषि मंत्री सचिन यादव को आमंत्रित किया गया था, लेकिन अस्थिर सरकार होने के चलते उनका आना संभव नहीं हो पा रहा है। कलेक्टर तरुण राठी ने बताया कि अभी तक की स्थिति में शिविर को लेकर कोई गाइड लाइन नहीं आई है, इसलिए असमंजस की स्थिति है। शिविर स्थगित है, मार्गदर्शन मांगा गया है, यदि कोई आदेश आएगा तो सूचित किया जाएगा।
दमोह। पथरिया में 8 मार्च को प्रभारी मंत्री प्रभूराम चौधरी कार्यक्रम में शामिल होने नहीं पहुंचे थे। (फाइल फाेटो)
अस्थिर सरकार के साइड इफेक्ट
13 मार्च को दमोह में होने वाला शिविर निरस्त
कलेक्टर तरुण राठी ने बताया कि जय किसान ऋण माफी योजना तहत द्वितीय चरण का शिविर दमोह में 13 मार्च को आयोजित होना था, जिसे अपरिहार्य कारणों से निरस्त कर दिया गया है। इस संबंध में आगामी शिविर की सूचना अलग से दी जाएगी।
अभी मैं जयपुर में हूं, कुछ तय नहीं है : कांग्रेस के दमोह विधायक राहुल सिंह ने बताया कि वे अभी विधायकाें के साथ जयपुर में हैं, दो से तीन दिन में लौटने के बाद शिविर की स्थिति स्पष्ट होगी।
सीमेंट फैक्ट्री भी
खटाई में
हटा के गैसाबाद में सीमेंट फैक्ट्री खोलने की चालू हुई प्रक्रिया पिछले 9 माह से बंद पड़ी हुई है। कंपनी के अधिकारी एक बार आने के बाद दोबारा दमोह नहीं आए हैं, मौके पर भी स्थिति जस के तस हैं। दावा किया गया था कि प्लांट के लिए 393 हेक्टेयर जमीन ले ली गई है। इसमें 14 सौ करोड़ का निवेश होगा और 3 हजार युवाओं को रोजगार मिलेगा, लेकिन यह प्रक्रिया भी ठंडे बस्ते में चली गई है। 9 माह से कंपनी के अधिकारियों ने जिला प्रशासन के अधिकारियों से कोई संपर्क नहीं किया है और न ही जमीनों की रजिस्ट्री हो पाई है। ऐसे में मामला खटाई में पड़ गया है। कलेक्टर ने बताया कि पहले कंपनी के अधिकारियों ने संपर्क किया था, लेकिन अब संपर्क में नहीं हैं, कुछ जगह की अभी रजिस्ट्रियां होना थीं, लेकिन कंपनी के अधिकारी आए ही नहीं हैं। इसलिए पूरी प्रक्रिया फिलहाल अधर में अटकी हुई है। जब तक अधिकारी संपर्क नहीं करेंगे, कुछ कहा नहीं जा सकता है।