पितृपक्ष में श्राद्ध करने से पितृ वर्षभर प्रसन्न रहते हैं: शास्त्री

Damoh News - दमोह। अनंत चतुर्दशी के बाद पितृपक्ष प्रारंभ हो गए हैं। पितृपक्ष में शहर के फुटेरा तालाब, बेलाताल तालाब, पुरैना...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 07:08 AM IST
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दमोह। अनंत चतुर्दशी के बाद पितृपक्ष प्रारंभ हो गए हैं। पितृपक्ष में शहर के फुटेरा तालाब, बेलाताल तालाब, पुरैना तालाब सहित अन्य तालाबों के घाटों पर लोग अपने पितरों को तर्पण करने पहुंचेगें। सुबह से तालाब के घाटों पर भीड़ पहुंचती है। पं. रवि शास्त्री के अनुसार श्राद्ध का अर्थ है श्रद्धा से जो कुछ दिया जाए। पितरों के लिए श्रद्धा पूर्वक किए गए पदार्थ, दान, तिल, कुश जल के दान का नाम ही श्राद्ध है।

श्राद्धकर्म पितृऋण चुकाने का सरल व सहज मार्ग है। पितृपक्ष में श्राद्ध करने से पितृगण वर्षभर प्रसन्न रहते हैं। श्राद्ध कर्म से व्यक्ति केवल अपने सगे संबंधियों को ही नहीं बल्कि ब्रह्मा से लेकर तृणपर्यंत सभी प्राणियों व जगत को तृप्त करता है। पितरों की पूजा को साक्षात् विष्णु पूजा ही माना गया है। उन्होंने बताया जैसे मनुष्यों का आहार अन्न है, पशुओं का आहार तृण है, वैसे ही पितरों का आहार अन्न का सार तत्व गंध और रस है। अत: वे अन्न व जल का सार तत्व ही ग्रहण करते हैं। शेष जो स्थूल वस्तु हैं वह यहीं रह जाती हैं। नाम व गोत्र के उच्चारण के साथ जो अन्न जल आदि पितरों को दिया जाता है, पितरों तक पहुंचा देते हैं।

धन के अभाव में कैसे करें श्राद्ध: पं. शास्त्री के अनुसार ब्रह्मपुराण में बताया गया है कि धन के अभाव में श्रद्धा पूर्वक केवल शाक से भी श्राद्ध किया जा सकता है। यदि इतना भी न हो तो अपनी दोनों भुजाओं को उठाकर कह देना चाहिए कि मेरे पास श्राद्ध के लिए न धन है और न ही कोई वस्तु। अत: मैं अपने पितरों को प्रणाम करता हूं वे मेरी भक्ति से ही तृप्त हों। पितृपक्ष पितरों के लिए पर्व का समय है अत: प्रत्येक गृहस्थ को अपनी शक्ति व सामर्थ्य के अनुसार पितरों के निमित्त श्राद्ध व तर्पण अवश्य करना चाहिए।

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