गांव की गंदगी नहीं देखी गई तो रिटायर्ड सैनिक ने खरीद दी कचरा गाड़ी

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 07:47 AM IST

Damoh News - हटा जनपद के ग्राम रनेह में एक रिटायर्ड सैनिक ने गांव की साफ-सफाई व्यवस्था के लिए स्वयं की राशि से कचरा गाड़ी खरीदकर...

Hata News - mp news if the dirt of the village was not seen then the retired soldier bought the garbage car
हटा जनपद के ग्राम रनेह में एक रिटायर्ड सैनिक ने गांव की साफ-सफाई व्यवस्था के लिए स्वयं की राशि से कचरा गाड़ी खरीदकर ग्राम पंचायत को दी है। साथ ही रोजाना कचरा फेंकने के लिए उन्होंने एक हजार रुपए प्रतिमाह के मानदेय पर एक मजदूर को भी नियुक्त किया गया है ताकि कचरा गाड़ी से रोजाना सड़कों के आसपास लगे कूड़े के ढेर को उठाया जाए।

गौरतलब है कि रनेह पंचायत हटा जनपद की सबसे बड़ी पंचायत है। इसके बावजूद भी यहां पर पंचायत द्वारा साफ-सफाई व्यवस्था पर ध्यान नहीं दिया जाता। यही कारण है कि पिछले 2 वर्षों से गांव की साफ सफाई न होने के कारण मलेरिया एवं स्वाइन फ्लू से कई जाने भी जा चुकी हैं। गांव में नालियों की सफाई के लिए पर्याप्त साधन नहीं हैं। गांव की यह हालत रिटायर्ड सैनिक अरविंद चौबे से देखी नहीं गई। उन्होंने कई बार पंचायत का ध्यान आकर्षित कराया, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया। इसके बाद उन्होंने स्वयं ही सफाई व्यवस्था के लिए दमोह से एक कचरा वाहन बनवाया। साथ ही स्वयं ही गांव के एक युवक को सफाई के लिए नियुक्त कर दिया। सैनिक द्वारा किए गए इस कार्य की पूरे गांव में प्रशंसा की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे अब पूरे गांव की नियमित सफाई होगी, साथ ही गांव के एक युवक को रोजगार भी मिल गया। रिटायर्ड सैनिक अरविन्द्र चौबे ने बताया कि मैं गांव से 1972 में सेना में भर्ती होने के कारण चला गया था। बीस वर्ष सेना में रहने के बाद जब अपने गांव आया तो आज भी पहले जैसे हालात देखने मिले। गांव जगह-जगह गंदगी ने पैर पसार रखे हैं। मैंने गांव की साफ सफाई कर रहे स्वीपर को बताया कि गांव की नालियों का कचरा क्यों नहीं उठाया जा रहा तो उसने कहा कि कचरा उठाने के लिए गाड़ी एवं हाथ ठेला नहीं है। तब वह तुरंत ही दमोह से कचरा वाहन लेकर आए, लेकिन समस्या यह थी कि रोजाना सफाई कौन करेगा। तब उन्होंने स्वीपर से कहा कि मैं तुम्हें प्रतिमाह 1 हजार मजदूरी के रूप में दूंगा। आप गांव की निरंतर ही साफ सफाई करें। जिसके बाद स्वीपर अब गांव में नियमित सफाई करेगा। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि आज इन्हीं परिस्थितियों के कारण ग्राम में निवासरत आज शहर की ओर जा रहे हैं। अगर गांव में ही अच्छा स्कूल, अच्छी अस्पताल और अच्छी सुविधा उपलब्ध होने लगे तो शहर की ओर पलायन नहीं होगा। मैं अपने जीवित रहने तक गांव के विकास के लिए निस्वार्थ भाव से लोगों के सहयोग से कार्य करता रहूंगा।

तीन साल से स्कूलों में बच्चों को नि:शुल्क अंग्रेजी पढ़ा रहे

चौबे ने बताया कि रिटायर्ड होने के बाद वर्ष 1991 में उन्होंने भोपाल में शिक्षा विभाग में बीआरसी के पद पर ज्वाइन किया। इसके बाद वर्ष 2011 तक नौकरी की। इसके बाद भोपाल में केंद्रीय विद्यालय में 2017 तक काउंसलर रहे। इसके बाद वह अपने गांव रनेह आ गए। यहां पर तीन साल से गांव के सरकारी स्कूल में बच्चों को निशुल्क अंग्रेजी विषय पढ़ा रहे हैं।

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