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यदि हम भगवान श्रीराम के चरणों में पड़ जाएं तो हमें भी संसार में पूछा जाएगा: धनवंतरि महाराज

Damoh News - जेल लाइन स्थित अतिप्राचीन मंदिर परिसर में श्रीमद भागवत कथा में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। बुधवार को कथा...

Feb 27, 2020, 07:06 AM IST
Damoh News - mp news if we fall at the feet of lord shri ram we will also be asked in the world dhanwantari maharaj

जेल लाइन स्थित अतिप्राचीन मंदिर परिसर में श्रीमद भागवत कथा में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। बुधवार को कथा सुनाते हुए धनवंतरि महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया। भगवान की बाल लीलाओं का वर्णन सुनकर श्रोता प्रसन्नचित हो गए। कथा वाचक ने बताया कि ब्रजवासियों को ब्रज से अच्छी जगह तीनों लोकों में कहीं और लगती एक बार भगवान श्रीकृष्ण अपने सखाओं के साथ यमुना नदी पहुंचे और यमुना नदी में डुबकी लगाई उनके साथ सभी सखा भी नदी में कूद गए और भगवान के साथ सीधे उनके लोक में पहुंच गए जहां शेषनाग शैय्या लगाए थे और शैय्या के ऊपर भगवान आराम कर रहे थे।

श्रीकृष्ण के सखाओं ने जब यह दृश्य देखा तो कृष्ण से बोले इन देवता की शक्ल तो आपसे मिलती है तब कृष्ण ने समझाया कि ये हमारे देवता है हम जिनकी आराधना उपासना करते हैं उनके जैसे ही दिखने लगते हैं, कथा व्यास ने बताया कि जिस भगवान की उपासना आराधन की जाती है उसका अंश आप में आ जाता है। कथा के दौरान उन्होंने एक प्रसंग में बताया कि हनुमान जी ने अपनी पूंछ से सारी लंका को जला दिया था लेकिन उनकी पूछ नहीं जली तो माता सीता ने उसने इसका कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि जो भगवान श्रीराम की पूछ है उसकी पूछ कैसे जल सकती है। कथा व्यास ने कहा कि आज लोग पहुंच वाले के पीछे भागते हैं और बताते हैं कि मेरी उस विधायक तक पहुंच है उस मंंत्री तक पहुंच है यदि हम भगवान श्रीराम के चरणों में पड़ जाएं और उनके पीछे पड़ जाएं तो आपकी भी इस संसार में पूछ होगी। कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ रही।

श्री कृष्ण, सुदामा की मित्रता दुनिया के लिए मित्रता का सबसे उत्कृष्ट उदाहरण: पं. आशीष कृष्ण

बनवार| गिहरा में चल रही श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह के आयोजन में कथाचार्य आशीष कृष्णचरणानुरागी जी ने पांचवें दिन श्री कृष्ण सुदामा चरित्र सुनाया। कृष्ण सुदामा चरित्र की कथा सुनकर श्रद्धालु भक्ति भाव विभोर हो गए। उन्होंने कहा कि भौतिक संसार में जहां आज मित्र दुखी होता है और दरिद्रता को देखकर उपहास उड़ाता है वहीं समाज के लिए भगवान श्री कृष्ण सुदामा की मित्रता में बडा उत्कृष्ट व अनुकरणीय उदाहरण कोई और हो सकता उन्होंने भगवान श्री कृष्ण और सुदामा की दोस्ती के प्रसंगों की चर्चा की। कहा कि सभी को भगवान कृष्ण से सीख लेकर उनके द्वारा किए गए कामों को अपने जीवन मे उतारना चाहिए। कृष्ण से सीख लेकर हर किसी के जीवन का कल्याण संभव है। सुदामा के विषय में बताते हुए उन्होंने कहा कि हमें सुदामा व कृष्ण की दोस्ती से सीख लेनी चाहिए। किस तरह कृष्ण राजा होकर भी अपने गरीब मित्र सुदामा को नहीं भूलते। सुदामा के द्वार पहुंचने की जानकारी पाकर कृष्ण राजा होने के बाद भी नंगे पैर दौड़े कृष्ण सुदामा की मित्रता दुनिया के लिए मित्रता का सबसे उत्कृष्ट उदाहरण है।

हवन कुंड में दी आहुतियां

श्रीश्री 1008 देवाधिदेव महादेव परिवार एवं अन्य देवी देवताओं की प्राण प्रतिष्ठा एवं महायज्ञ का आयोजन 26 से 28 फरवरी तक किया जा रहा है। बुधवार को कलश यात्रा श्रीराम हनुमान मंदिर बेलाताल टापू मंदिर से निकाली गई। शाम को मंदिर परिसर में हवन कुंड में आहुतियां दी गई। 27 फरवरी को भव्य शोभायात्रा श्री सांई मंदिर बेलाताल टापू मंदिर से प्रारंभ होकर शहर भ्रमण करते हुए जेल लाइन मंदिर में समापन होगा। 28 फरवरी को जेल लाइन स्थित मंदिर में सहस्त्रधारा अभिषेक देव प्राण प्रतिष्ठा पूर्णाहुति होगी।

दमाेह। श्रीमद भागवत कथा सुनते श्रद्धालु।

उस विधायक तक पहुंच है उस मंंत्री तक पहुंच है यदि हम भगवान श्रीराम के चरणों में पड़ जाएं और उनके पीछे पड़ जाएं तो आपकी भी इस संसार में पूछ होगी। कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ रही।

देवताओं के वाहन उनके स्वभाव को दर्शाते हैं: शास्त्री

दमोह। ग्राम बरखेरा बैस में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन की कथा में कथावाचक आचार्य पं. रवि शास्त्री महाराज ने कहा कि आपने देखा होगा कि देवताओं के वाहन पशु पक्षी ही अधिकांश होते हैं उन्होंने कहा कि प्रत्येक देवता का वाहन उनके स्वभाव और उनके व्यवहार को दर्शाता है और उनके वाहन का भी उनके ही बराबर का महत्व रहता है। श्री शास्त्री ने कहा कि किसी भी मंदिर में जाइए किसी भी भगवान को देखिए उनके साथ एक चीज सामान्य रूप से जुड़ी हुई है वह है उनके वाहन लगभग सभी भगवान के वाहन पशुओं को ही माना गया है। हर भगवान के साथ एक पशु को जोड़कर भारतीय मनीषियों ने प्रकृति और उसमें रहने वाले जीवों की रक्षा का एक संदेश दिया है। हर पशु किसी न किसी भगवान का प्रतिनिधि है, उनका वाहन है इसलिए इनकी हिंसा नहीं करनी चाहिए। मूलत: इसके पीछे एक यही संदेश सबसे बड़ा है।

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