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कवि सम्मेलन की परंपरा का हुआ पतन: तिवारी

एक वर्ष पहले
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मप्र हिंदी साहित्य सम्मेलन इकाई के संयुक्त तत्वाधान में हुआ काव्य समागम

पाठक मंच और मप्र हिंदी साहित्य सम्मेलन दमोह इकाई के संयुक्त तत्वाधान में स्थानीय जैन धर्मशाला के सभागार में अखिल भारतीय काव्य समागम तथा कवि सम्मेलन हुआ।

जिसमें दोपहर 3 बजे से स्थानीय कवि-कवयित्रियों द्वारा हृदय स्पर्शी काव्य रचना पढ़ी गईं। गोष्ठी में मुख्य अतिथि डॉ. आरएन चिले ने तथा अध्यक्षता गफूर तायर ने की। कवि सम्मेलन के प्रारंभ में किशोर तिवारी ने आयोजन के प्रयोजन पर सांकेतिक प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान में कवि सम्मेलनों की पूर्व परंपरा का पतन हुआ है। पुरानी साहित्यक परंपरा की मुख्य धारा में आने का उपक्रम हैं देश के जाने माने गीतकार शिवकुमार अर्चन भोपाल ने गीतों को पढ़कर वहीं पुराने रस सरोवर में गोते लगवायें। प्रोफेसर दिनेश कुशवाहा रीवा ने नई कविता को सम्प्रेषण कौशल के माध्यम से सहज ग्राह्य बना दिया।

सतीश आनंद कटनी ने छोटी गजलों की बड़ी मारक क्षमता का मान कराया। अशोक मिजाज बद्र सागर ने अपने चिरपरिचित अंदाज में गजल के नये तेवर और नये प्रयोग से श्रोताओं को अभिभूत किया। नंद किशोर शर्मा नरसिंहपुर ने बुंदेल हिंदी की समसामयिक रचनाएं प्रस्तुत की।

दमोह। कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
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