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रंगपंचमी पर भगवान जागेश्वरनाथ का टेसू व केसर से होगा अभिषेक

एक वर्ष पहले
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बुंदेलखंड का प्रसिद्ध तीर्थ स्थल देवश्री जागेश्वरनाथ धाम बांदकपुर में रंगों के पर्व रंग पंचमी पर अनोखी होली खेलने को पुरातन कालीन परंपरा है। जिसमें शामिल होने के लिए दमोह सहित पूरे प्रदेश से श्रद्धालु बांदकपुरधाम पहुंचते हैं। यहां विराजमान स्वयं-भू दिव्य शिवलिंग को रंग, गुलाल, टेशू, केशर से अभिषेक करते हैं। वहीं मंदिर ट्रस्ट द्वारा जिले सहित बांदकपुर के दर्जनों गांव के फागुनी गीत गाने वाले श्रद्धालु को रंगपंचमी उत्सव में शामिल होने का निमंत्रण दिया जाता है। जो रंगपंचमी को मंदिर पहुंचकर दिन भर फागें गाकर नाचते-गाते हैं।

भगवान महादेव को चढ़ाई जाने वाली रंग, गुलाल, केशर, टेशू को प्रसाद के रूप में भक्तों को देने की परंपरा है। वहीं गौसेवक जागेश्वरनाथ भक्त मंडल द्वारा भगवान जागेश्वर नाथ का रंग-गुलाल से अभिषेक किया जाता है। मंदिर प्रबंधन के राम कृपाल पाठक ने बताया की रंग पंचमी पर्व को जागेश्वर नाथ महादेव के 4 से 5 बजे के बीच पट खुलते है और विधिवत पूजन के बाद नए वस्त्र धारण करते हैं। इसके बाद होली खेलने की परंपरा की शुरुआत होती है। रंगपंचमी को वहीं मंदिर में विराजमान माता पार्वती सहित सभी देवी देवता का पूजन रंग गुलाल से होता है। कोनी खुर्द से दत्त महाराज भक्तों की टोली के साथ बांदकपुर पहुंचकर रंगोत्सव मनाते हैं।

रंगपंचमी के बाद भगवान का श्रंगार बदल जाता है

संध्या कालीन विशेष श्रंगार आरती में नए वस्त्रों से भगवान का विशेष श्रृंगार किया जाता है। शरद ऋतु परिवर्तन के बाद रंगपंचमी से भगवान का ग्रीष्मकालीन वस्त्रों व चंदन पुष्प से श्रृंगार को शुरुआत हो जाती है।

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