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49 करोड़ खर्च, तो भी आकार नहीं ले सकी नैनो टेक्नोलॉजी लैब, अब 9 करोड़ रुपए और खर्च करेगा विश्वविद्यालय

Damoh News - विद्यार्थियों को होगा यह फायदा डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय प्रशासन की लेटलतीफी के चलते 99 फीसदी...

Feb 15, 2020, 08:41 AM IST
Patharia News - mp news nano technology lab could not take shape even after spending 49 crores now university will spend 9 crores more
विद्यार्थियों को होगा
यह फायदा


डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय प्रशासन की लेटलतीफी के चलते 99 फीसदी तैयार हो चुकी मध्य भारत की सबसे बड़ी नैनो टेक्नोलॉजी लैब 9 साल बाद भी तैयार नहीं हो सकी है। हालात यह हैं कि उपेक्षित रवैए के कारण अब इसका निर्माणाधीन भवन जमींदोज होने लगा है। इसके कारण करीब 24 करोड़ रुपए की लागत का यह प्रोजेक्ट
अब 33 करोड़ रुपए का हो गया है। इसके विपरीत विश्वविद्यालय तैयार भवनों को तोड़कर रेनोवेशन करने में शासन के करोड़ों रुपए के फंड का दुरुपयोग कर रहा है।

जानकारी के अनुसार इस लैब का निर्माण 2013 में शुरू हुआ था। लैब दो साल में बनकर तैयार होना थी, लेकिन 7 साल में करीब 49 करोड़ रुपए सिर्फ अधूरे निर्माण तथा उपकरणों की खरीदी में ही खर्च कर दिए गए हैं। इसके बाद भी अब तक लैब शुरू होने के दूर-दूर तक आसार नजर नहीं आ रहे हैं। उस समय 24 करोड़ की लागत से तैयार होने वाले इसके भवन का निर्माण कागजों पर तो 99 फीसदी पूरा हो चुका है, लेकिन हकीकत में घटिया निर्माण के चलते भवन की सीढ़ियां और दीवारें तक ढह चुकी हैं। इसके बावजूद विवि के जिम्मेदार अफसर निर्माण एजेंसी एचएससीएल को करीब 23 करोड़ रुपए का भुगतान कर चुके हैं।

नैनो टेक्नोलॉजी क्या है

नैनो का अर्थ है ऐसे पदार्थ, जो अति सूक्ष्म आकार वाले तत्वों (मीटर के अरब-वें हिस्से) से बने होते हैं। नैनो टेक्नोलॉजी अणुओं व परमाणुओं की इंजीनियरिंग है, जो भौतिकी, रसायन, बायो इनफोर्मेटिक्स व बायोटेक्नोलॉजी जैसे विषयों को आपस में जोड़ती है। इस प्रौद्योगिकी से विनिर्माण, बायो साइंस, मेडिकल साइंस, इलेक्ट्रॉनिक्स व रक्षा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाया जा सकता है, क्योंकि इससे किसी वस्तु को एक हजार गुना तक मजबूत, हल्का और भरोसेमंद बनाया जा सकता है।

अब निर्माण पूरा करने
9 करोड़ खर्च होंगे


विश्वविद्यालय प्रशासन ने हाल ही में लैब का निर्माण पूरा कराने के लिए अलग से 9 करोड़ रुपए का बजट निकाला है। अब इसके निर्माण की जिम्मेदारी सीपीडब्ल्यूडी विभाग को सौंपा गई है। इस राशि से सीपीडब्ल्यूडी विभाग के इंजीनियर गिर चुकी सीढ़ियां, दीवारें तथा शेष रह गए अन्य काम को पूरा कराएंगे।

इंस्टाॅल तक नहीं हुए 35 करोड़ के उपकरण,
गारंटी-वारंटी भी एक्सपायर


केंद्रीय दर्जा मिलने के बाद विवि में रिसर्च करने वालों को अमेरिकन स्टैंडर्ड के हिसाब से रिजल्ट देने के उद्देश्य से 2010 में सोफिस्टिकेटेड इंस्ट्रूमेंटेशन सेंटर और नैनो टेक्नोलॉजी लैब की योजना तैयार की गई थी। विश्वविद्यालय प्रशासन की दूरदर्शिता और भ्रष्टाचार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिस लैब का निर्माण भी शुरू नहीं हुआ था उसके लिए एक साल पहले (वर्ष 2012 में) 35 करोड़ रुपए की लागत से विश्वविद्यालय ने उपकरण भी खरीद डाले। इतना ही नहीं करोड़ों के इन उपकरणों को इंस्टॉल कराए बिना ही कंपनियों को भुगतान भी कर दिया गया। नतीजा ये कि भवन तैयार होने के इंतजार में पिछले 7 साल से उपकरण धूल खा रहे हैं। इनकी गारंटी और वारंट तक एक्सपायर हो चुकी है।

अलगे चरण में विभिन्न उपकरण लगवाए जाएंगे

Ãनैनो बिल्डिंग का शेष रहा काम फिर से शुरू करा दिया गया है। सीपीडबल्यूडी शेष रहा काम तेजी से कर रही है। इसका सतत निरीक्षण भी किया जा रहा है। अलगे चरण में यहां पर विभिन्न उन्नत उपकरण लगवाने का काम होगा। अगामी शैक्षणिक सत्र से विद्यार्थीयों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों के लिए यह लैब शुरू हो जाएगी।
-प्रो. आरपी तिवारी, कुलपति सागर विवि

जानकारी के अनुसार इस लैब का निर्माण 2013 में शुरू हुआ था। लैब दो साल में बनकर तैयार होना थी, लेकिन 7 साल में करीब 49 करोड़ रुपए सिर्फ अधूरे निर्माण तथा उपकरणों की खरीदी में ही खर्च कर दिए गए हैं। इसके बाद भी अब तक लैब शुरू होने के दूर-दूर तक आसार नजर नहीं आ रहे हैं। उस समय 24 करोड़ की लागत से तैयार होने वाले इसके भवन का निर्माण कागजों पर तो 99 फीसदी पूरा हो चुका है, लेकिन हकीकत में घटिया निर्माण के चलते भवन की सीढ़ियां और दीवारें तक ढह चुकी हैं। इसके बावजूद विवि के जिम्मेदार अफसर निर्माण एजेंसी एचएससीएल को करीब 23 करोड़ रुपए का भुगतान कर चुके हैं।

पथरिया जाट गांव की ओर जाने वाले रास्ते पर बन रही इस लैब का विवि प्रशासन द्वारा 99 फीसदी निर्माण पूरा बताया जा रहा है, जबकि सच तो यह है कि अभी भी लैब का 40 फीसदी से भी ज्यादा काम बाकी है। वर्तमान में हालात यह हैं कि लैब का निर्माण सालों से बंद पड़ा है। घटिया निर्माण के चलते कई जगह भवन की सीढ़ियां और दीवारें गिर चुकी हैं।

नैनो टेक्नोलॉजी लैब शुरू होने से फार्मेसी, अपराध विज्ञान, फिजिक्स, केमिस्ट्री सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को सूक्ष्म से सूक्ष्म चीजों पर शोध करने में बेहद आसानी होगी। लैब से किसी भी सूक्ष्म वस्तु का रिजल्ट बेहद सटीक आएगा।

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