नीति आयोग के आकांक्षी जिले दमोह का हाल; 366 में से 113 स्कूल शिक्षकविहीन, 253 में केवल एक-एक, अतिथियों का सहारा

Damoh News - नीति आयोग ने मध्यप्रदेश के जिन 8 जिलों में शिक्षा एवं स्वास्थ्य की स्थिति कमजोर पाई है, उनमें दमोह भी शामिल है। बीते...

Bhaskar News Network

Oct 13, 2019, 07:10 AM IST
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नीति आयोग ने मध्यप्रदेश के जिन 8 जिलों में शिक्षा एवं स्वास्थ्य की स्थिति कमजोर पाई है, उनमें दमोह भी शामिल है। बीते दो साल से आयोग की गतिविधियों पर प्रधानमंत्री कार्यालय तक नजर रखे हुए है, इसके बाद भी अधिकारियों की मनमानी से शिक्षा व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही है। यहीं कारण है कि जिले के 350 से अधिक स्कूल शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। इनमें 113 स्कूलों में शिक्षक ही नहीं हैं, वहीं 253 स्कूल ऐसे हैं, जिनमें एक-एक शिक्षक ही है। वह भी स्कूली कामों में उलझे रहते हैं, जिससे स्कूलों की पढ़ाई ठप हो गई है।

गौरतलब है कि बीते माह शिक्षकों की स्थानांतरण प्रक्रिया के बाद अनेक स्कूल खाली हो गए हैं। जहां बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षक भी नहीं बचे हैं। ऐसे में बच्चों को कौन पढ़ाएगा इसको लेकर प्रश्नचिन्ह उठाए जा रहे हैं। हालांकि तात्कालिक रूप से ऐसे में इन स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था अतिथि शिक्षकों के भरोसे सौंप दी गई है। जबकि शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत हर स्कूलों में बच्चों की दर्ज संख्या के मान से रेगुलर शिक्षकों की पदस्थापना होना चाहिए। बीते माह प्रतिभा पर्व के दौरान अनेक स्कूल ऐसे पाए गए थे, जहां पर बच्चों का शैक्षणिक स्तर अपेक्षाकृत कमजोर है।

शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए बीते दो साल से नीति आयोग की टीम काम कर रही है। टीम द्वारा शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक-एक बिंदु पर जानकारी जुटाई जा रही है। इसमें सरकारी स्कूलों में पहले बच्चों की स्थिति, वर्तमान स्थिति, बच्चों के कम होने की वजह, उपस्थिति बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयास, स्कूल त्यागी बच्चों को वापस शिक्षा से जोड़ने किए जा रहे प्रयास, स्कूलों में बच्चों की दैनिक उपस्थिति, कम उपस्थिति की वजह, ग्रामीण स्कूलों में शिक्षकों और शिक्षकों की उपस्थिति की स्थिति, शिक्षा का स्तर, शासन द्वारा शिक्षा में बेहतरी के लिए चलाई जा रही योजनाएं, स्कूलों के प्रबंधन की स्थिति सहित अन्य सभी बिंदुओं पर जानकारी जुटाई गई है। इनमें जिन-जिन सुधारों की गुंजाइश नजर आती है, उसके लिए वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी भेजी जा रही है। टीम द्वारा अपनी रिपोर्ट कलेक्टर को दी जाती है। इस संबंध में नीति आयोग टीम की दमोह ब्लॉक सदस्य प्रतिभा यादव से बात की तो उन्होंने इस मामले में बात करने से इनकार कर दिया।

भास्कर पड़ताल

बीते माह शिक्षकों की स्थानांतरण प्रक्रिया के बाद अनेक स्कूल खाली हो गए हैं, बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं बचे

दमोह। बनवार प्राइमरी कन्या स्कूल की 196 छात्राओं को पढ़ाने के लिए एक शिक्षक व एक अतिथि शिक्षक पदस्थ हैं।

शिक्षा विभाग से प्राप्त सूची के अनुसार वर्तमान में जिले में 113 प्राइमरी व मिडिल स्कूल ऐसे हैं, जहां पर एक भी शिक्षक पदस्थ नहीं हैं। जिनमें पथरिया जनपद के प्राइमरी व मिडिल स्कूल गूढ़ा, सिमरी, असलाना, सीतानगर, बटियागढ़ ब्लॉक के नीमखेड़ा, सेमराकछार, खिरिया, जागुपूरा, दलपतपुरा, गर्रबा, महुआखेड़ा, घुराटा सीगोन, तेंदूखेड़ा ब्लॉक के बिसनाखेड़ी, मझगुंवामाल, सांगा, बाराघाट, पड़रिया, जामुन, कोडल, उन्हारीखेड़ा, मझगुंवाचक्क, सिमरिया, देवरी लीलाधर, सलैयामाल, कुदपुरा, फुलर, कोटखेड़ा, बम्होरीमाल, चनैदा, खारीदेवरी, पौंडी, झमारा, सारसबगली, हर्रई, दमोह ब्लॉक के खंजारी पटी, हरदुआ चंगुल, अमखेड़ा, बरखेरा, बहेरा, मुडारी लमती, चौरई, पटौहा, लकलका, किलावार्ड, हिनौता, जबेरा ब्लॉक के चौरई, अलोनी, सलैयाबड़ी, सुरजपुरा, कंजई मानगढ़, हरदुआ सिंगौरगढ़, देवतरा, बहेरिया, चिलौद, कन्या मिडिल बनवार, इमलिया, मझगुंवा मानगढ़, पथरिया नवल, पौड़ी, मानगढ़, हटा ब्लॉक के निवास, पाटन, पाली, बछामा, कलकुआ, चौरईयां, अमझिर, नारायणपुरा, दिगी, पाठा, तिंदनी, कारीबरा, सिलापरी, रजपुरा, देवलाई, बिजवारी, कचनारी, तेरवईया, बिनती, बंधा, पटेरा ब्लॉक के बम्होरी कुडई, जोगीडाबर, जमुनिया जेर, सलैया, सगौनी, बक्सरी, कुसमी, गाड़ाघाट, मझगुंवा हंसराज, मझौली, सारंगपुरा स्कूल शामिल हैं।

इन स्कूलों में एक भी शिक्षक पदस्थ नहीं

मामला नंबर 1: 500 छात्र-छात्राएं अतिथि के भरोसे: तेंदूखेड़ा ब्लॉक के हायर सेकंडरी स्कूल पुरा बैरागढ़ में 500 से अधिक छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। लेकिन यहां के स्कूल के समस्त शिक्षकों का स्थानांतरण कर दिया गया है। जिससे पूरा स्कूल खाली हाे गया है। पूर्व प्राचार्य जगदीश पटेल ने बताया कि यहां पर पूरे स्टॉफ ने ऑनलाइन आवेदन किया था, जिनमें से सभी का स्थानांतरण हो गया है। अब यहां अतिथि ही पढ़ा रहे हैं।

मामला नंबर 2: पथरिया एक्सीलेंस में 19 में से 11 शिक्षकों का स्थानांतरण: पथरिया एक्सीलेंस स्कूल में 19 शिक्षक पदस्थ थे। जिनमें से 11 शिक्षकों का बीते माह स्थानांतरण हो गया है। ऐसे में स्कूल में पढ़ाने वाले करीब 1200 से अधिक बच्चों की पढ़ाई को लेकर प्रश्नचिन्ह खड़ा हो गया है। प्राचार्य एसडी खरे ने बताया कि जिन-जिन शिक्षकों ने ऑनलाइन आवेदन किया था, उनमें से 11 का स्थानांतरण हो गया है। अब यहां ज्यादातर अतिथि ही पढ़ा रहे हैं।

मामला नंबर 3: 196 बालिकाओं को पढ़ाने एक प्रधान अध्यापक, एक अतिथि: जनपद शिक्षा केंद्र जबेरा के बनवार कन्या प्राइमरी स्कूल में 196 बालिकाओं को पढ़ाने के लिए एकमात्र प्रधान अध्यापक बाबूलाल अहिरवार पदस्थ हैं। एक अन्य शिक्षक गंगाराम धुर्वे को बीएलओ बना दिया है। जिससे वह स्कूल आते ही नहीं हैं। दो शिक्षकों का स्थानांतरण हो गया है। विज्ञान, हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी व सामाजिक विज्ञान के शिक्षक ही नहीं हैं। जिससे छात्राओं का कोर्स पिछड़ रहा है।

स्थानांतरण के बाद स्कूलों में खाली हो गए पद

बीते वर्ष कक्षा 3 से 5 के बच्चों का दक्षता का स्तर

बीते साल प्रतिभा पर्व के दौरान बच्चों का विभिन्न स्तरों पर दक्षता का स्तर जांचा गया था, जिसमें कक्षा 3 से 5 तक के बच्चों में प्रारंभिक, अक्षर, शब्द, वाक्य एवं कहानी हिंदी भाग एक सीखने में दक्षता का स्तर 42 प्रतिशत बेसिक लाइन, 30.37 प्रतिशत मिड लाइन एवं 17.64 प्रतिशत मिड लाइन रहा। जबकि लिखने के स्तर में 75.19 बेसिक लाइन, 62.14 मिड लाइन एवं 47.71 एंड लाइन रहा। जिसमें प्रारंभिक स्तर सबसे कमजोर जबकि कहानी स्तर सबसे अच्छा, उसके बाद शब्द ज्ञान, उसके बाद अक्षर ज्ञान, उसके बार वाक्य एवं सबसे नीचे प्रारंभिक स्तर रहा। इसी तरह गणित में सबसे आगे संख्या ज्ञान, अंक ज्ञान, जोड़ना, घटाना, गुणा इसके बाद भाग में बच्चे पीछे रहे।

सीधी बात - एनएस ठाकुर, सहायक संचालक शिक्षा

अन्य स्कूलों के अतिशेष शिक्षकों को ऐसे स्कूलों में पहुंचाने की कार्रवाई की जाएगी


- जिले में 113 प्राइमरी व मिडिल स्कूल शिक्षक विहीन हैं, 253 एक शिक्षकीय हैं।


- संकुल के अतिशेष शिक्षकों को लगाया गया है, कुछ स्कूलों में अतिथि शिक्षक पढ़ा रहे हैं।


- शासन के आदेश हैं कि जहां शिक्षकों की कमी है वहां अतिथि ही पढ़ाएंगे।


- बीते साल बंद हुए 135 स्कूलों व अन्य स्कूलों के अतिशेष शिक्षकों को ऐसे स्कूलों में पहुंचाने की कार्रवाई की जाएगी।


- यह शासन स्तर का मामला है।

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