माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ी तीर्थ यात्रा:शास्त्री

Damoh News - ग्राम सिंग्रामपुर में चल रही संगीतमय श्रीमद् भागवत महापुराण के छठवें दिन पंडित उमा शंकर शास्त्री ने भगवान...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 08:10 AM IST
Jabera News - mp news parents service is the biggest pilgrimage visit shastri
ग्राम सिंग्रामपुर में चल रही संगीतमय श्रीमद् भागवत महापुराण के छठवें दिन पंडित उमा शंकर शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा की गई लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने बताया भगवान ने गोपियों के साथ रास रचाया एवं भगवान ने माता-पिता की सेवा के लिए मथुरा जाकर देवकी वासुदेव को बंधन से मुक्त किया। साथ ही कंस को मारकर अपने माता-पिता को बंधन से मुक्त किया।

उन्होंने कहा जो अपने माता-पिता की सेवा नहीं करते, उनकी आज्ञा का पालन नहीं करते वह कलयुग के राक्षस के समान हैं। जिस घर में माता-पिता की सेवा समर्पित भाव से की जाती वह घर किसी तीर्थ से कम नहीं होता है। घर में सुख-शांति समृद्धि बनी रहती है। मात पिता की सेवा ही भगवान की सच्ची भक्ति है। क्योंकि धर्म शास्त्र कहता है कि जिस पुत्र ने जीते जी अपने मात-पिता की सेवा की है उनके घर सदैव माता-पिता के शुभ आशीष से खुशियों से भरे होते हैं। जिस पुत्र से माता-पिता की सेवा नहीं हुई उनके पुत्र भी उनकी सेवा नहीं करते वह बुढ़ापे में दुख के भागीदार बनते हैं। क्योंकि जो जैसा करेगा उसको भगवान वैसा ही फल देते हैं। इसलिए सभी को अपने मां-बाप की सेवा करनी चाहिए एवं उनकी आज्ञा का पालन करना चाहिए। ताकि हमारे जीवन में सुख समृद्धि प्राप्त हो। इस दौरान रूकमणी मंगल की कथा सुनाई। जिसमें बड़े धूमधाम से रुक्मणी मंगल विवाह की झांकी सजाकर उत्सव मनाया गया। इस दौरान उसमें समस्त ग्रामवासी क्षेत्रवासी सम्मिलित रहे।

श्रीमद् भागवत ही भगवत प्राप्ति का साधन : शास्त्री: दमोह।शहर से सटे आमचौपरा गांव में चल रही श्रीमद भागवत कथा में कथावाचक रवि शास्त्री ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा कोई साधारण विषय नहीं है यह दिखावे या पाखंड का विषय भी नहीं है। उन्होंने कहा श्रीमद् भागवत भगवत प्राप्ति का साधन है जिस प्रकार भागवत की कथा श्रवण करने से भक्ति ज्ञान वैराग्य पूर्णता को प्राप्त होते हैं उसी प्रकार महापापी, धुंधकारी भागवत कथा का श्रवण कर परमात्मा के धाम को प्राप्त होता है। उसी प्रकार हमें भी पूर्ण श्रद्धा भाव से श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए। जिससे हमारे ऊपर परमात्मा की कृपा हो और हमारा जीवन धन्य हो जाए।

श्री शास्त्री ने भागवत कथा सुनाते हुए कहा कि हमें जीवन भर भावपूर्वक भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए। उन्होंने वैशाख माह की महिमा का बखान करते हुए कहा कि इस मास में शिवलिंग निर्माण, रुद्राभिषेक एवं श्रीमद् भागवत कथा कराने का विशेष महत्व शास्त्रों में बताया गया है। इसमें गृह प्रवेश, मुंडन, संस्कार आदि शुभ मुहूर्त भी रहते हैं। वैशाख माह में किए हुए समस्त धार्मिक आयोजन सफलताओं की सिद्धि को प्राप्त होते हैं। विशेष शिव आराधना एवं श्रीमद् भागवत कथा कराने से विशेष सिद्धि प्राप्ति होती है। वैशाख मास में जहां शिवालयों में भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के पात्र रखे गए हैं। वहीं घरों में भी भक्तों ने भगवान का जलाभिषेक करने पात्र रखे हैं और 24 घंटे भगवान का जलाभिषेक किया जा रहा है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।

जबेरा। भागवत कथा में सजाई गई श्रीकृष्ण-रूकमणी की झांकी।

भास्कर संवाददाता|जबेरा

ग्राम सिंग्रामपुर में चल रही संगीतमय श्रीमद् भागवत महापुराण के छठवें दिन पंडित उमा शंकर शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा की गई लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने बताया भगवान ने गोपियों के साथ रास रचाया एवं भगवान ने माता-पिता की सेवा के लिए मथुरा जाकर देवकी वासुदेव को बंधन से मुक्त किया। साथ ही कंस को मारकर अपने माता-पिता को बंधन से मुक्त किया।

उन्होंने कहा जो अपने माता-पिता की सेवा नहीं करते, उनकी आज्ञा का पालन नहीं करते वह कलयुग के राक्षस के समान हैं। जिस घर में माता-पिता की सेवा समर्पित भाव से की जाती वह घर किसी तीर्थ से कम नहीं होता है। घर में सुख-शांति समृद्धि बनी रहती है। मात पिता की सेवा ही भगवान की सच्ची भक्ति है। क्योंकि धर्म शास्त्र कहता है कि जिस पुत्र ने जीते जी अपने मात-पिता की सेवा की है उनके घर सदैव माता-पिता के शुभ आशीष से खुशियों से भरे होते हैं। जिस पुत्र से माता-पिता की सेवा नहीं हुई उनके पुत्र भी उनकी सेवा नहीं करते वह बुढ़ापे में दुख के भागीदार बनते हैं। क्योंकि जो जैसा करेगा उसको भगवान वैसा ही फल देते हैं। इसलिए सभी को अपने मां-बाप की सेवा करनी चाहिए एवं उनकी आज्ञा का पालन करना चाहिए। ताकि हमारे जीवन में सुख समृद्धि प्राप्त हो। इस दौरान रूकमणी मंगल की कथा सुनाई। जिसमें बड़े धूमधाम से रुक्मणी मंगल विवाह की झांकी सजाकर उत्सव मनाया गया। इस दौरान उसमें समस्त ग्रामवासी क्षेत्रवासी सम्मिलित रहे।

श्रीमद् भागवत ही भगवत प्राप्ति का साधन : शास्त्री: दमोह।शहर से सटे आमचौपरा गांव में चल रही श्रीमद भागवत कथा में कथावाचक रवि शास्त्री ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा कोई साधारण विषय नहीं है यह दिखावे या पाखंड का विषय भी नहीं है। उन्होंने कहा श्रीमद् भागवत भगवत प्राप्ति का साधन है जिस प्रकार भागवत की कथा श्रवण करने से भक्ति ज्ञान वैराग्य पूर्णता को प्राप्त होते हैं उसी प्रकार महापापी, धुंधकारी भागवत कथा का श्रवण कर परमात्मा के धाम को प्राप्त होता है। उसी प्रकार हमें भी पूर्ण श्रद्धा भाव से श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए। जिससे हमारे ऊपर परमात्मा की कृपा हो और हमारा जीवन धन्य हो जाए।

श्री शास्त्री ने भागवत कथा सुनाते हुए कहा कि हमें जीवन भर भावपूर्वक भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए। उन्होंने वैशाख माह की महिमा का बखान करते हुए कहा कि इस मास में शिवलिंग निर्माण, रुद्राभिषेक एवं श्रीमद् भागवत कथा कराने का विशेष महत्व शास्त्रों में बताया गया है। इसमें गृह प्रवेश, मुंडन, संस्कार आदि शुभ मुहूर्त भी रहते हैं। वैशाख माह में किए हुए समस्त धार्मिक आयोजन सफलताओं की सिद्धि को प्राप्त होते हैं। विशेष शिव आराधना एवं श्रीमद् भागवत कथा कराने से विशेष सिद्धि प्राप्ति होती है। वैशाख मास में जहां शिवालयों में भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के पात्र रखे गए हैं। वहीं घरों में भी भक्तों ने भगवान का जलाभिषेक करने पात्र रखे हैं और 24 घंटे भगवान का जलाभिषेक किया जा रहा है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।

भास्कर संवाददाता|जबेरा

ग्राम सिंग्रामपुर में चल रही संगीतमय श्रीमद् भागवत महापुराण के छठवें दिन पंडित उमा शंकर शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा की गई लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने बताया भगवान ने गोपियों के साथ रास रचाया एवं भगवान ने माता-पिता की सेवा के लिए मथुरा जाकर देवकी वासुदेव को बंधन से मुक्त किया। साथ ही कंस को मारकर अपने माता-पिता को बंधन से मुक्त किया।

उन्होंने कहा जो अपने माता-पिता की सेवा नहीं करते, उनकी आज्ञा का पालन नहीं करते वह कलयुग के राक्षस के समान हैं। जिस घर में माता-पिता की सेवा समर्पित भाव से की जाती वह घर किसी तीर्थ से कम नहीं होता है। घर में सुख-शांति समृद्धि बनी रहती है। मात पिता की सेवा ही भगवान की सच्ची भक्ति है। क्योंकि धर्म शास्त्र कहता है कि जिस पुत्र ने जीते जी अपने मात-पिता की सेवा की है उनके घर सदैव माता-पिता के शुभ आशीष से खुशियों से भरे होते हैं। जिस पुत्र से माता-पिता की सेवा नहीं हुई उनके पुत्र भी उनकी सेवा नहीं करते वह बुढ़ापे में दुख के भागीदार बनते हैं। क्योंकि जो जैसा करेगा उसको भगवान वैसा ही फल देते हैं। इसलिए सभी को अपने मां-बाप की सेवा करनी चाहिए एवं उनकी आज्ञा का पालन करना चाहिए। ताकि हमारे जीवन में सुख समृद्धि प्राप्त हो। इस दौरान रूकमणी मंगल की कथा सुनाई। जिसमें बड़े धूमधाम से रुक्मणी मंगल विवाह की झांकी सजाकर उत्सव मनाया गया। इस दौरान उसमें समस्त ग्रामवासी क्षेत्रवासी सम्मिलित रहे।

श्रीमद् भागवत ही भगवत प्राप्ति का साधन : शास्त्री: दमोह।शहर से सटे आमचौपरा गांव में चल रही श्रीमद भागवत कथा में कथावाचक रवि शास्त्री ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा कोई साधारण विषय नहीं है यह दिखावे या पाखंड का विषय भी नहीं है। उन्होंने कहा श्रीमद् भागवत भगवत प्राप्ति का साधन है जिस प्रकार भागवत की कथा श्रवण करने से भक्ति ज्ञान वैराग्य पूर्णता को प्राप्त होते हैं उसी प्रकार महापापी, धुंधकारी भागवत कथा का श्रवण कर परमात्मा के धाम को प्राप्त होता है। उसी प्रकार हमें भी पूर्ण श्रद्धा भाव से श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए। जिससे हमारे ऊपर परमात्मा की कृपा हो और हमारा जीवन धन्य हो जाए।

श्री शास्त्री ने भागवत कथा सुनाते हुए कहा कि हमें जीवन भर भावपूर्वक भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए। उन्होंने वैशाख माह की महिमा का बखान करते हुए कहा कि इस मास में शिवलिंग निर्माण, रुद्राभिषेक एवं श्रीमद् भागवत कथा कराने का विशेष महत्व शास्त्रों में बताया गया है। इसमें गृह प्रवेश, मुंडन, संस्कार आदि शुभ मुहूर्त भी रहते हैं। वैशाख माह में किए हुए समस्त धार्मिक आयोजन सफलताओं की सिद्धि को प्राप्त होते हैं। विशेष शिव आराधना एवं श्रीमद् भागवत कथा कराने से विशेष सिद्धि प्राप्ति होती है। वैशाख मास में जहां शिवालयों में भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के पात्र रखे गए हैं। वहीं घरों में भी भक्तों ने भगवान का जलाभिषेक करने पात्र रखे हैं और 24 घंटे भगवान का जलाभिषेक किया जा रहा है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।

बैसाख पूर्णिमा पर आज जागेश्वरनाथ का बूढ़े महादेव के रूप में होगा श्रृंगार

ओमप्रकाश शर्मा। बनवार

बुंदेलखंड के तीर्थ क्षेत्र बांदकपुर धाम में वर्ष में एक वार बैसाख माह की पूर्णिमा को जागेश्वरनाथ महादेव का श्रृंगार बूढे महादेव के रूप मे किया जाता है। दिव्य श्रृंगार दर्शन के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु संध्या आरती में शामिल होते हैं। बैसाख की पूर्णिमा को देवश्री जागेश्वरनाथ के दर्शनों के लिए सुबह 5.30 बजे से पट खुलते ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लग जाती है। जो दोपहर 2.30 बजे तक एक भी मिनिट के लिए दर्शनार्थियों की कतारें नहीं टूटती। दोपहर के बाद संध्या आरती के समय भगवान का वर्ष में एक बार होने वाले बैसाख पूर्णिमा को बूढे महादेव के दिव्य व भव्य श्रंगार के दर्शनों के लिए मंदिर में देर रात्रि तक भीड़ बनी रहेगी। पुजारी दुर्गेश सीतू पंडा ने बताया कि बैसाख पूर्णिमा को देवश्री जागेश्वरनाथ का भव्य श्रृंगार बूढे महादेव के स्वरूप में किया जाता है। जिसमे भगवान को जटाओं से सुसज्जित दाढ़ी मूंछ, भगवा वस्त्र से श्रृंगार किया जाता है। जिनके दुर्लभ व दिव्य दर्शन के लिए जिले सहित आसपास के जिलेभर से भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। भगवान का विशेष श्रंगार आरती के दर्शन करते हैं। यह परंपरा पुरातन काल से चली आ रही है।

फाइल फोटो।

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