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समाज को सही दिशा देने हुआ श्री कृष्ण अवतार: गौतम

Damoh News - शहर के जबलपुर नाका आदर्श स्कूल के पास चल रही श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन रविवार को कथाव्यास मुन्नालाल गौतम ने...

Nov 11, 2019, 07:30 AM IST
शहर के जबलपुर नाका आदर्श स्कूल के पास चल रही श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन रविवार को कथाव्यास मुन्नालाल गौतम ने कहा कि परमात्मा श्रीकृष्ण का अवतार समाज को सही दिशा दिखाने, धर्म की स्थापना करने, गाय सज्जनों की रक्षा करने के लिए हुआ है। हमें परमात्मा की शास्त्र पुराणों की आज्ञा को मानते हुए प्रत्येक कर्म को संपादित करना चाहिए।

शास्त्र हमें संदेश देते हैं कि हमें सदा ही सत्कर्म करने चाहिए एवं अपनी आने वाली संतानों को सत्कर्म तथा धर्म का आचरण सिखाना चाहिए। जब हम धर्म का आचरण करेंगे तो निश्चित ही हमारी संतानें धर्म का आचरण करेंगी। और धर्म मार्ग पर चलते हुए विद्या बुद्धि दीर्घायु को प्राप्त होंगी।

उन्होंने कहा कि मनुष्य का सबसे बड़ा आभूषण चरित्र बताया गया है। चरित्र गया तो सब कुछ गया, इसलिए हमें ए| पूर्वक अपने चरित्र को संभाल कर रखना चाहिए। परमात्मा के 24 अवतार हुए हैं और 24 अवतारों में परमात्मा ने हमें यही सिखाया है कि हमें हर हाल में सत्य आचरण करना चाहिए। क्योंकि यही एक उपाय है जो हमें हर प्रकार के संकटों से बचा सकता है।

उन्होंने कहा कि परमात्मा के अवतार का उद्देश्य भटके हुए समाज को सही दिशा दिखाना व उत्पाती राजाओं का वध कर धर्म की स्थापना करना है। गौतम ने आगे कहा कि यदि परमात्मा से प्रेम करना है तो जगत के पदार्थों के प्रति प्रेम छोड़ना होगा। विद्वान पुरुष को केवल अपने आवश्यकतानुसार ही दान स्वीकार करना चाहिए। धन उतना ही संग्रह करना चाहिए जितने की आवश्यकता हो क्योंकि संतोष ही वास्तविक सुख है। उन्होंने कहा कि परमात्मा को सर्वस्व अर्पित करके नर्क में जाना भी अच्छा है। जब बामन भगवान तीसरा चरण राजा बलि के सिर पर रखने जा रहे थे तब उनका ह्रदय पिघल गया।

उन्होंने राजा से कहा कि तुमने मुझे सब कुछ अर्पित कर दिया अब मैं तुम्हारा ऋणी हो गया। बामन भगवान ने उसे पाताल का राज्य दे दिया और वे राजा बलि के द्वारपाल बन गए। इस कथा का आध्यात्मिक रहस्य यह है कि बली जीवात्मा और बामन परमात्मा कंस जरासंध आदि दुष्ट राजाओं को तो भगवान ने मारा था, लेकिन बली को नहीं मारा, क्योंकि बली निश्प्राय है,सदाचारी है, भगवान का भक्त है। कथा के दौरान कृष्ण-सुदामा चरित्र का मार्मिक वर्णन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिलाएं, पुरुष मौजूद थे।

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