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सिंघाड़ा उत्पादक किसान ने सिंघाड़े की नवीन तकनीक के बारे में बताया
जिले में सिंघाडा की खेती बड़े पैमाने पर की जा रही है। सिंघाड़े की खेती को बढ़ावा देने और खेती करने वाले किसानों की आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से सीईओ जिला पंचायत डॉ. गिरीश मिश्रा के मुख्य आतिथ्य में कृषि विज्ञान केंद्र में उपसंचालक कृषि तथा सहायक संचालक उद्यान के संयुक्त सहयोग से एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई।
इस मौके पर जिले के लगभग 80 किसानों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। कार्यशाला में डाॅ. मिश्रा ने सिंघाड़े की खेती में आ रही परेशानी जानी। उन्होंने सिंघाड़ा उत्पादन में वृद्धि एवं शासकीय स्तर पर मदद के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजे जाने आश्वस्त किया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय किसानों को दिए गए तालाब पट्टे के बारे में चर्चा की। प्रशिक्षण में सर्वप्रथम जिला सिवनी के सिंघाडा उत्पादक कृषक विलास तिजारे द्वारा किसानों को सिंघाड़े की उन्नत किस्म तथा नवीन तकनीक से खेतों में पानी भरकर सिंघाड़े की खेती के बारे में बताया, उन्होंने बताया कि सिंघाड़े के तना की गहराई जितनी कम होगी उतनी अधिक बडी़ पत्ती लगेगी जिससे अधिक फल लिए जा सकते हैं।
ज्यादा गहराई में जाने पर पत्ती के आकार में कमी होने के कारण फल का आकार तथा मात्रा में कमी आती है। इस कारण तालाब के अलावा अगर किसान धान के खेतों में पानी भरकर सिंघाड़े की खेती करते हैं तो उन्हें अधिक लाभ होता है। जबलपुर से आए सिंघाड़ा उत्पादक किसान रामकुमार रैकवार ने सिंघाड़े के उन्नत बीज उपलब्धता के बारे बताया।
वैज्ञानिक डाॅ. एके श्रीवास्तव ने सिंघाड़े की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु एवं फसल तैयार करने से लगाने तथा तुडाई के बारे में बताया। सिंघाड़े की विभिन्न किस्म जैसे हरा गठुआ, लाल गठुआ, भुगकुटा, कटीली प्रजाति, करिया हरिरा, गुलरा, हरीरा गपच्चा, गहरा लाल तथा नवीन उन्नत प्रजाति के बारे में जानकारी दी। साथ ही सिंघाड़े में होने वाली खरपतवार जलकुंभी, वाटललिलि, काई आदि के नियंत्रण के बारे में बताया। वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ. बीएल साहू ने सिंघाड़े के मूल्य संवर्धन से आय के बारे में बताया। उपसंचालक कृषि आरएस शर्मा ने कृषि से संबधित तथा उपसंचालक पशुचिकत्सा डाॅ. देवेंद्र विश्वकर्मा ने पशुपालन से संबधित जानकारी दी।
इस मौके पर जिले के लगभग 80 किसानों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। कार्यशाला में डाॅ. मिश्रा ने सिंघाड़े की खेती में आ रही परेशानी जानी। उन्होंने सिंघाड़ा उत्पादन में वृद्धि एवं शासकीय स्तर पर मदद के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजे जाने आश्वस्त किया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय किसानों को दिए गए तालाब पट्टे के बारे में चर्चा की। प्रशिक्षण में सर्वप्रथम जिला सिवनी के सिंघाडा उत्पादक कृषक विलास तिजारे द्वारा किसानों को सिंघाड़े की उन्नत किस्म तथा नवीन तकनीक से खेतों में पानी भरकर सिंघाड़े की खेती के बारे में बताया, उन्होंने बताया कि सिंघाड़े के तना की गहराई जितनी कम होगी उतनी अधिक बडी़ पत्ती लगेगी जिससे अधिक फल लिए जा सकते हैं।
ज्यादा गहराई में जाने पर पत्ती के आकार में कमी होने के कारण फल का आकार तथा मात्रा में कमी आती है। इस कारण तालाब के अलावा अगर किसान धान के खेतों में पानी भरकर सिंघाड़े की खेती करते हैं तो उन्हें अधिक लाभ होता है। जबलपुर से आए सिंघाड़ा उत्पादक किसान रामकुमार रैकवार ने सिंघाड़े के उन्नत बीज उपलब्धता के बारे बताया।
दमाेह। कार्यशाला में किसानों को जानकारी दी गई।