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पालिका ने राजस्व अमले को दो करोड़ का दिया टारगेट, वसूली नहीं हुई तो वेतन के लाले
पुराने काम ठप, नए काम शुरू नहीं, शहरवासियों पर 15 करोड़ बकाया
नगर पालिका इस समय कंगाली के दौर से गुजर रही है। एक ओर शासन से मिलने वाली चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि में करीब 50 लाख रुपए तक की कटौती की जा रही है, तो वहीं दूसरी ओर करों की बकाया वसूली नहीं हो पा रही है। जिसके चलते नगर पालिका द्वारा कराए जाने वाले विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। बीते दो माह से बिलों का भुगतान नहीं हुआ है। जिससे ठेकेदारों ने भी काम बंद कर दिया है। अब केवल वे निर्माण कार्य ही चल रहे हैं, जिनके लिए पहले से ही राशि स्वीकृत है।
वहीं दूसरी ओर शासन से कम बजट आने के कारण कर्मचारियों को समय पर वेतन भी नहीं मिल पा रहा है। हर माह मिलने वाला वेतन अब डेढ़ से दो माह में मिल रहा है। जिससे कर्मचारी भी परेशान हैं। नगर पालिका को इस कंगाली की हालत से उबारने के लिए एवं नगर पालिका प्रशासक एवं कलेक्टर तरूण राठी द्वारा राजस्व विभाग के कर्मचारियों को बकाया वसूली के सख्त निर्देश दिए हैं, इसके बावजूद भी वसूली का कार्य धीमी गति से चल रहा है। गुरुवार को कलेक्टोरेट कार्यालय में वीसी के दौरान भी कर्मचारियों को वसूली के सख्त आदेश दिए गए हैं। नगर पालिका की माली हालत इसलिए भी खराब है, क्योंकि लोगों द्वारा टैक्स जमा नहीं किया जा रहा है। वर्तमान में जलकर, संपत्ति कर, समेकित कर, दुकान किराया सहित अन्य करों को मिलाकर करीब 15 करोड़ रुपए बकाया है।
जबकि बीते मार्च 2019 से मार्च 2020 तक करीब ढाई करोड़ रुपए की वसूली ही हो पाई है। बीते माह कलेक्टर द्वारा वसूली के लिए राजस्व विभाग के अधिकारियों को फटकार लगाई गई थी। जिसके बाद नगर पालिका द्वारा जगह-जगह शिविर लगाकर वसूली अभियान चलाया जा रहा है। जिसके चलते हाल ही में करीब एक करोड़ रुपए की वसूली होने की बात कही जा रही है।
कर्मचारियों का कहना है कि वसूली के दौरान बड़े बकायादार झगड़ने को भी तैयार हो जाते हैं। वहीं लोगों का कहना है कि नगर पालिका द्वारा इस तरह की सख्ती पहले कभी नहीं बरती गई। यदि पहले से ही वसूली होती तो आज आम जनता पर इतना अधिक टैक्स बकाया नहीं होता। हर माह 50 लाख रुपए की कटौती शासन द्वारा नगर पालिका को हर माह 1 करोड़ 63 लाख रुपए की चुंगी क्षतिपूर्ति राशि भेजी जाती है। लेकिन करीब तीन से चार माह से इस राशि में करीब 20 फीसदी से अधिक कटौती की जा रही है। जिसके चलते यह यह राशि 1 करोड़ 14 लाख रुपए तक ही सीमित रह गई है। इस तरह शासन द्वारा करीब 50 लाख रुपए कम भेजे जा रहे हैं। जिसका असर कर्मचारियों के वेतन पर पड़ रहा है। स्थिति यह है कि कर्मचारियों को टैक्स की राशि से वेतन देना पड़ रहा है।
वसूली के दिए गए हैं सख्त निर्देश: नगर पालिका के राजस्व विभाग को बकाया वसूली के लिए लिए सख्त निर्देश दिए गए हैं। साथ ही वसूली लक्ष्य भी दिया गया है। जिन बड़े बकायादारों द्वारा टैक्स नहीं भरा जा रहा है, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।- तरूण राठी, कलेक्टर