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तालाबों का नहीं हो रहा संरक्षण, कहीं अतिक्रमण तो कहीं दूषित हो गया पानी
जबेरा जनपद के अधिकांश पंचायत में एक से एक तालाब हैं। वर्षों पहले तक तालाब ही जल का प्रमुख स्रोत होते थे, तब तालाबों का रख-रखाव देवता मानकर किया जाता था। इनकी देखरेख का काम पूरा समाज करता था। लेकिन नल, ट्यूबवेल आदि के आने से पानी के परंपरागत स्रोतों की उपेक्षा होने लगी। जिसकी वजह से आज गांव-गांव में बने प्राचीन तालाब उपेक्षित पड़े हैं। अधिकांश तालाबों पर अतिक्रमण हो गया है तो वहीं साफ-सफाई न होने के कारण उनका पानी दूषित हो गया है।
गौरतलब है कि गांव के जल स्तर को बढ़ाने में भी तालाबों का बहुत बड़ा योगदान है। आज भी तालाबों के आसपास लगे हैंडपंप व कुएं कभी खाली नहीं होते। जबेरा ब्लाक में 70 ग्राम पंचायतों में एक दो ग्राम पंचायतों को छोड़ दिया जाए तो गर्मियों के दिनों में पानी की किल्लत की समस्या विकराल रूप ले लेती है, लेकिन तालाबों की दुर्दशा सुधारने के लिए प्रशासन के अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
ग्राम परस्वाहा के तालाब के घाटों के आसपास एक दर्जन से अधिक लोगों ने अतिक्रमण करके तालाब के अंदर ही दुकानें बना ली हैं। जिसके चलते तालाब के अस्तित्व पर ही संकट खड़ा हो गया है। वहीं ग्राम पंचायत मुवार झरौली के तालाब का पानी गर्मी के पहले निजी उपयोग के चलते ईंट भट्टा में खर्च कर लिया जाता है। जिससे गर्मियों में तालाब की तलहटी में पानी तो बना रहता है लेकिन अधिक उपयोग के लायक नहीं रहता। वहीं जनपद के अधिकांश तालाबों में गर्मी शुरू होते ही नाममात्र का पानी बचता है। जिसके कारण पशु-पक्षियों को गर्मी में पानी के लिए भटकना पड़ता है।
इस संबंध में जनपद सीईओ अवधेश सिंह का कहना है कि तालाबों के संरक्षण एवं साफ-सफाई के लिए पंचायतों को निर्देश दिए जाएंगे।
बनवार। ग्राम परस्वाहा के तालाब के अंदर बनी दुकानें।
गौरतलब है कि गांव के जल स्तर को बढ़ाने में भी तालाबों का बहुत बड़ा योगदान है। आज भी तालाबों के आसपास लगे हैंडपंप व कुएं कभी खाली नहीं होते। जबेरा ब्लाक में 70 ग्राम पंचायतों में एक दो ग्राम पंचायतों को छोड़ दिया जाए तो गर्मियों के दिनों में पानी की किल्लत की समस्या विकराल रूप ले लेती है, लेकिन तालाबों की दुर्दशा सुधारने के लिए प्रशासन के अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
ग्राम परस्वाहा के तालाब के घाटों के आसपास एक दर्जन से अधिक लोगों ने अतिक्रमण करके तालाब के अंदर ही दुकानें बना ली हैं। जिसके चलते तालाब के अस्तित्व पर ही संकट खड़ा हो गया है। वहीं ग्राम पंचायत मुवार झरौली के तालाब का पानी गर्मी के पहले निजी उपयोग के चलते ईंट भट्टा में खर्च कर लिया जाता है। जिससे गर्मियों में तालाब की तलहटी में पानी तो बना रहता है लेकिन अधिक उपयोग के लायक नहीं रहता। वहीं जनपद के अधिकांश तालाबों में गर्मी शुरू होते ही नाममात्र का पानी बचता है। जिसके कारण पशु-पक्षियों को गर्मी में पानी के लिए भटकना पड़ता है।