पठन-पाठन और लेखन ये समाज के सामने बड़ी चुनौती है, जिससेे लोग दूर भाग रहे हैं: प्रहलाद पटेल

Damoh News - स्थानीय गार्डन में रविवार को हिंदी लेखिका संघ का वार्षिक सम्मेलन व विमोचन समारोह कार्यक्रम हुआ। इस मौके पर मुख्य...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 07:30 AM IST
Damoh News - mp news this is a big challenge before the society due to which people are running away prahlada patel
स्थानीय गार्डन में रविवार को हिंदी लेखिका संघ का वार्षिक सम्मेलन व विमोचन समारोह कार्यक्रम हुआ। इस मौके पर मुख्य अतिथि केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री प्रहलाद पटेल रहे। अध्यक्षता पूर्व मप्र राज्य महिला आयोग अध्यक्ष लता वानखेड़े ने की। विशिष्ठ अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष मालती असाटी, शशि मोहन, साहित्यकार नरेंद्र दुबे, पीएल शर्मा, लेखिका संघ की अध्यक्ष पुष्पा चिले, हिंदी लेखिका संघ सागर अध्यक्ष सुनीला सराफ, सचिव डॉ. प्रेमलता नीलम मंचासीन रहीं।

पुष्पा चिले ने स्वरचित सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। अतिथियों के स्वागत के बाद संस्था की स्मारिका सुरम्या व पुष्पा चिले की कृति परियाें की पाती का विमोचन किया गया। प्रोफेसर डॉ. कीर्तिकाम दुबे ने परियों की पाती की समीक्षात्मक टिप्पणी प्रस्तुत की।

इसके बाद डाॅ. रघुनंदन चिले की माता की स्मृति में शशि मोहन, लक्ष्मी ताम्रकार की माता की स्मृति में महेश सक्सेना, पुष्पा चिले की दादी मां की स्मृति में भाषा मनीषा डॉ. छविनाथ तिवारी, डॉ. अनीता बेन अहमदाबाद की सास की स्मृति में वरिष्ठ कवियित्री चंद्रानेमा, सावित्री तिवारी के पिता की स्मृति में पूर्व डीईओ पीएल शर्मा, डाॅ. इंद्रजीत कौर भट्‌टी की दादी की स्मृति में साहित्यकार नरेंद्र दुबे, डॉ. प्रेमलता नीलम की मां की स्मृति में हिंदी लेखिका संघ अध्यक्ष सागर सुनीला सराफ को अलंकरण से सम्मानित किया गया। इसके अलावा लोकगीत प्रतियोगिता में विजेता छात्राओं में आरोपी राजपूत, प्रथा जैन, रागिनी पटेल, मानसी उपाध्याय एवं निशा पटेल को पुरस्कार प्रदान किए गए। साथ ही संस्था में सहयोग प्रदान करने के लिए आनंद जैन को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन लता गुरु व नर्मदा सींग एकता ने किया। आभार प्रेमलता उपाध्याय ने माना।

लेखन के माध्यम से समाज की मानसिकता बदलें: अध्यक्षता कर रहीं लता वानखेड़े ने महिला की सुरक्षा पर लेखन करने की बात पर जोर दिया। उन्होंने महिला साहित्यकारों से कहा आप समाज और राष्ट्र को कुछ देने का कार्य करतीं हैं, जब हम साहित्य की तरफ देखते हैं साहित्य पढ़ते हैं हिंदुस्तान की कालजयी साहित्य रचनाओं में जब हम देखते हैं तो हमें सबसे ज्यादा उसका प्रमुख विषय मिलता है महिला शोषण, दस में से आठ किताबें महिला शोषण के ऊपर होती हैं।

हर साहित्य में महिला शोषण का विषय प्रमुख होता है। यहां तक कि हम महाभारत और रामायण जैसे महाकाव्य की बात करें तो उसमें भी यदि हम महिला शोषण को माइनस कर दें तो काव्य नहीं बचेगा। कहीं न कहीं इसके लिए पुरुष प्रधान समाज की मानसिकता जिम्मेदार हैं। हमें पुन: आज एक आजादी की जंग लड़ने की आवश्यकता है। जो हम सबको लड़ना है। हम सब अपनी कलम लेखन के माध्यम से समाज की इस मानसिकता को बदलने का काम करें। समाज काे एक नई दिशा देने का काम करें। अन्य अतिथियों ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में नारायण सिंह ठाकुर, विवेक शेंडये, राजीव अयाची, मनोरमा रतले, संजय रतले, केके पांडे सहित बड़ी संख्या में महिलाओं पुरूषों गणमान्य नागिरकों की उपस्थिति रही।

दमोह। स्थानीय गार्डन में रविवार को हिंदी लेखिका संघ के वार्षिक सम्मेलन में मौजूद लोगों का किया सम्मान।

दमोह में साहित्य के प्रति जो रुचि है वो बाकी जिलों में नहीं

इस मौके पर मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री पटैल ने कहा कि अब तक मुझे पता नहीं था कि हिंदी लेखिका संघ का स्थान मप्र में नंबर वन है, इसके लिए मैं बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। मैं भी बहुत सारे जिलों में गया हूं, लेकिन साहित्य के प्रति रूचि जो दमोह जिले में दिखती है। बाकी जिलों में नहीं दिखती है। ये बात सत्य है मैं अगर पुस्तकें पढ़ लूंगा और बाकी चीजें पढ़ने के बाद कुछ लिखूंगा तो वो लेखन हाेगा संकलन नहीं हो सकता, आज चुनौती है हम सबके सामने गूगल के आने के बाद जो तकनीक आई है, उसमें जानकारियां उपलब्ध करा दी हैं, लेकिन मौलिकता नहीं मिलती, लेकिन हमारी साहित्य साधना जैसे भी उभर कर आए वो व्यक्ति के जीवन की संपूर्ण साधना है, लेकिन जो निकट से देखा अनुभव किया और लेखन में आया वो मानता हूं मौलिक होगा। कई बार हमारे सामने कठोर अनुभव परिस्थितियां भी होती हैं कई बार प्रसन्नता के क्षण भी होते हैं, लेकिन कभी कभी हम लिखते समय न्याय नहीं कर पाते, लेकिन अचानक हमारे हाथ से कोई चीज लिख जाती है और जब हम पढ़ते हैं तो लगता है कि ये मैंने ही लिखा है, लेकिन मैंने नहीं लिखा है शायद वो कृपा है सरस्वती की जिसको मैं लेखन मानता हंंू। पठन पाठन और लेखन ये समाज के सामने बड़ी चुनौती है पठन और पाठन से लोग दूर भाग रहे हैं और आगे जाकर लेखन के बारे में तो सोचना दूर हो गया है।

X
Damoh News - mp news this is a big challenge before the society due to which people are running away prahlada patel
COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना