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114वें झूलोत्सव में धर्म, साहित्य, संगीत से सुरभित हुआ वृंदावन बिहारीलाल का दरबार

2 वर्ष पहले
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शहर के टंडन बगीचा गायत्री गेट के पास सावन माह में तीन दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसका समापन हो गया।

एडवोकेट अनुनय श्रीवास्तव के कामता दया निवास पर विराजे भगवान राधा कृष्ण के वृंदावनधाम में 114वां तीन दिवसीय श्रवण झूलोत्सव कार्यक्रम हर्षोल्लास से मनाया गया। पहले दिन नृत्य सत्संग मंडल दीक्षित बंधुओं द्वारा सुंदरकांड का पाठ किया गया। दूसरे दिन साहित्यकारों और कवियों नाम रहा। जिसमें मन भावन तिरंगा सावन में की काव्यात्मक पंक्तिपूर्ति साहित्यकारों ने अपने अपने ढंग से की जो मन भावन रही।

कवियों ने वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों से लेकर राष्ट्रीय संदर्भों को बखूबी रेखांकित किया। गोष्ठी डॉ रघुनंदन चिले की अध्यक्षता में हुई। कार्यक्रम प्रारंभ में काव्य संध्या का संचालन कर रहे अमर सिंह राजपूत ने दादा अजीत श्रीवास्तव के साहित्यक अवदान की चर्चा कर उनका स्मरण किया। कालू राम नेमा ने प्रथम कवि के रूप में कविता पढ़ी की, बेस्ट सिटी शो मेन दादा अजित ग्रेट मैन, गोविंद प्रसाद मिश्रा ने कवि हंसाता सभी को कभी स्वर्ग न जाए, महेंद्र श्रीवास्तव ने मन भावन तिरंगा सावन में, लहर गवो तिरंगा सावन में, अनुपम भट्ट ने आंधी को स्वीकार करो, पतझड़ हंसकर स्वीकार करो, हेमलता दुबे ने गुरू की महिमा अपरंपार, कुसुम खरे श्रुति ने हर हर बम बम बोलिये वंदे मातरम बोलिये, बीएम दुबे ने आज कल पढ़ाई का क्या हाल हो रहा है हास्य रस की कविता पढी, कृष्ण कुमार चौबे ने सही आई आजादी बागन में, बबीता चौबे ने मां भारती के आंगन में, मनभावन तिरंगा सावन में, मंजू राजपूत ने लाल चौक पर लहराएंगे इस पावन में मनभावन तिरंगा सावन में, डॉ. प्रेमलता नीलम ने दुश्मनों को मार गिराया, रमेश तिवारी ने बरसे खुशियां हर आंगन में, सच्चा सुख राष्ट्र आराधन में, मनीष रैकवार रसिक ने बरसात में धूप ज्यों आंगन में मन भावन तिरंगा सावन में, गणेश राय ने तेरा कहना निभा दिया मैनें, नरेंद्र अरजरिया ने लहरा है तिरंगा कश्मीर के आंगन में, डॉ रघुनंदन चिले ने मेरी मुर्गी की एक टांग है तो है अनुनय श्रीवास्तव ने अर्धरात्रि जगत जगा उस घड़ी पावन में लहराया तिरंगा मन भावन सावन में से पंक्ति पूर्ति की, अमर सिंह राजपूत ने नाची गुजरिया आंगन में, सुन राष्ट्र गीत कश्मीरन में रचना पड़ी। इसी तरह श्याम सुंदर शुक्ला, आलोक पांडे और आसिफ अंजुम ने भी अपनी अपनी रचना पढ़ वाहवाही लूटी।

तीसरे दिन एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दी गईं
तीसरे दिन सुगम संगीत और फिल्मी नगमे की महफिल थी। जिसमें डॉ. पद्माकरराव पाठक, डॉ. आलोक सोनवलकर, गजल गायक नितिन प्रदीप अग्रवाल, धीरेंद्र पाराशर, राजू रजक, मधुर गार्डिया, बाल कलाकार रैनी मिश्रा, कृष्ण कुमार चौबे, नंदराम दुबे, आदेश पांडे, निशांत विश्वकर्मा, चित्तर सिंह, मेजर सिंह, रवि बर्मन, तबला वादक हरिओम परिहार ने अपनी एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां भगवान राधा कृष्ण के दरबार में प्रस्तुत की। कार्यक्रम में अजय टंडन, चंद्रमोहन गुरू, ओमप्रकाश श्रीवास्तव, कमलेश भारद्वाज, पंकज खरे, विष्णु गुप्ता, सुबोध श्रीवास्तव, भरत सेन, दीपक सिंघानिया, विक्रांत गुप्ता, पवन गुप्ता, दीपक मिश्रा, शालिनी सिंह, जया ठाकुर, चंदन ताम्रकार, शोभित गुप्ता, अरूण दुबे, शरद मिश्रा, सत्यम चौबे, हैप्पी वूमेन क्लब की सदस्य सहित शहर के विभिन्न वर्गों की उपस्थिति रही। निधि श्रीवास्तव एवं दीपमाला श्रीवास्तव, शिवांश खरे ने आभार माना।

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