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ये कैसी योजना: 6 हजार युवाओं ने किया था आवेदन, एक को भी नहीं मिला रोजगार
युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए एक साल पहले शुरू की गई युवा स्वाभिमान योजना फ्लॉप साबित हो रही है। योजना के तहत बीते साल जिले के 6 हजार 197 युवाओं ने नगरीय निकायों में ऑनलाइन आवेदन जमा किए थे, लेकिन इनमें से महज 580 युवाओं को ही ट्रेनिंग दी गई। बाकी युवा आज भी मारे-मारे फिर रहे हैं। युवाओं का कहना है कि इससे उन्हें कुछ भी हासिल नहीं हुआ है। नगर पालिका ने उन्हें ट्रेनिंग तो दी लेकिन रोजगार नहीं।
इस योजना के तहत अब युवाओं में कोई रूझान नहीं देखा जा रहा है। बीते साल फरवरी माह में आवेदन जमा करने के लिए नगर पालिका में सुबह से लेकर शाम तक बेरोजगार युवाओं की भीड़ जमा रहती थी। जिनमें बीएससी, एमएससी से लेकर एमबीए तक के युवा कतार में रहते थे, लेकिन अब वहां पर एक भी युवा नजर नहीं आता। स्थिति यह है कि नवंबर 2019 से लेकर अब तक इस योजना में एक भी नया आवेदन जमा नहीं किया गया है। ऐसे में यह योजना फ्लॉप साबित हो रही है। युवाओं में इस योजना के प्रति कम रूझान को देखते हुए नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा इस योजना में बदलाव किया जा रहा है। जिसमें 40 से अधिक नई विधाओं (ट्रेड) को शामिल करने की योजना बनाई जा रही है। बजट के बाद इस योजना को नए स्वरूप में चालू करने की बात कही जा रही है।
योजना के तहत युवाओं को एक साल में 100 दिन के लिए नगरीय निकायों में अस्थाई रोजगार प्रदान किया जाना था। फरवरी 2019 में दमोह नगर पालिका नेे युवाओं से ऑनलाइन आवेदन लेना शुरू किए थे। दमोह नगर पालिका में कुल 662 युवाओं का ऑन बोर्ड पंजीयन किया गया था। जिनमें से महज 225 युवाओं के आवेदन ऑनबोर्डिंग किए गए। इसके अलावा जिन युवाओं का चयन हुआ इनमें से अनेक युवा बायोमैट्रिक डिवाइस के कारण रिजेक्ट हाे गए। जिसके चलते महज 225 युवा ही ट्रेनिंग ले पाए। नगर पालिका पंजीयन के दौरान हर पात्र युवा से दो तरह के विकल्प लिए थे। पहला निकाय से जुड़े काम जैसे संपत्तिकर- जलकर वसूली, संपत्तिकर सर्वे, निर्माण में श्रमिक के रूप में काम और दूसरा कौशल प्रशिक्षण के लिए ट्रेड में कॅरियर बनाने का था। युवक एवं युवती को जो काम सौंपा गया। उसके शुरुआती 10 दिवस में निकाय के ही कामों की ट्रेनिंग दी है जबकि अगले 90 दिवस में काम कराया गया। जिसमें उन्हें चार हजार रुपए हर महीने मानदेय भी देना था। जो सीधे खाते में जमा किया जाना था। बायो मेट्रिक सिस्टम होने के कारण अनेक युवा ट्रेनिंग में अपनी पूरी उपस्थिति नहीं दे पाए। जिसके कारण युवाओं को यह राशि भी पूरी नहीं मिल पाई।
योजना में ये खामियां आईं सामने
योजना के तहत 21 से 30 वर्ष के युवाओं को शामिल किया गया था। इस उम्र में बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के साथ-साथ नौकरी की तलाश में रहते हैं।
योजना में ग्रामीण युवाओं से आवेदन तो बुलाए गए थे, लेकिन उन्हें इस योजना में शामिल नहीं किया गया। जिससे हजारों युवाओं के आवेदन रिजेक्ट हो गए।
जिन ट्रेडों के अंतर्गत युवाओं का चयन किया गया था, उसकी ट्रेनिंग करने के लिए युवाओं में ज्यादा रूझान नजर नहीं आया।
नगरीय निकायाें ने जिन संस्थाओं को ट्रेनिंग के लिए चयनित किया गया, उनके द्वारा भी लापरवाही बरती गई।
बायोमेट्रिक्स उपस्थिति अनिवार्य होने के कारण युवाओं को ट्रेनिंग लेने के बाद भी कम राशि मिल पाई।
ट्रेनिंग सेंटरों की लापरवाही सामने आई
दमोह नगरीय निकाय में इस योजना के तहत ट्रेनिंग देने के लिए तीन ट्रेड चयनित किए गए थे। जिसमें से डोमेस्टिक डाटा एंट्री ऑपरेटर, दूसरा दर्जी (सेल्फ एम्प्लाइड टेलर्स) एवं तीसरा ब्यूटी पार्लर शामिल थे। इनमें से 184 को निजी सेंटरों पर डेटा कंप्यूटर ऑपरेटर की ट्रेनिंग दी गई, वहीं 41 युवाओं को सेल्फ एम्प्लाइड टेलर्स की ट्रेनिंग दी गई। बताया गया है कि ट्रेनिंग के लिए जिन निजी सेंटरों का चयन किया गया था, उन्हें समय पर भुगतान न होने कारण उन्होंने युवाओं को ट्रेनिंग देने से ही मना कर दिया था। जबकि शासन द्वारा सेंटरों के साथ कांन्ट्रेक्ट किया गया था।
नपा के इसी कक्षा में बीते साल पंजीयन कराने युवाअाें की लंबी-लंबी
कतारें लग रहीं थीं, जबकि वर्तमान में एक भी युवा नहीं पहुंच रहा
युवा बोले- केवल दिखावा साबित हुई योजना
युवा बृजेश पटेल, लाखन सिंह, दीपेंद्र दुबे ने बताया कि हमें उम्मीद थी कि ट्रेनिंग के बाद नगर पालिका में ही कहीं काम मिल जाएगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो पाया। पूरी राशि भी नहीं मिली।
चुनाव सामने आ रहे इसलिए योजना में किया जा रहा बदलाव: आगामी समय में नगरीय निकाय चुनाव को देखते हुए शासन द्वारा युवा स्वाभिमान योजना में बदलाव किया जा रहा है। जिसके तहत अब हर शहर के प्रत्येक वार्ड में 4 युवक और 4 युवतियों को 40 से अधिक विधाओं में रोजगार देने की योजना पर काम किया जाएगा। इस योजना के तहत शहरी महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वसहायता समूह गठित किए जाएंगे। इन्हें स्वरोजगार के लिए पहले चरण में 10 हजार रुपए और समूह के लिए अच्छा कार्य करने पर 50 हजार रुपए दिए जाने की बात कही जा रही है।
नवंबर से नहीं हुए पंजीयन
- अनिल असाटी, योजना प्रभारी नगर पालिका दमोह
अस्थाई रोजगार प्रदान किया जाना था। फरवरी 2019 में दमोह नगर पालिका नेे युवाओं से ऑनलाइन आवेदन लेना शुरू किए थे। दमोह नगर पालिका में कुल 662 युवाओं का ऑन बोर्ड पंजीयन किया गया था। जिनमें से महज 225 युवाओं के आवेदन ऑनबोर्डिंग किए गए। इसके अलावा जिन युवाओं का चयन हुआ इनमें से अनेक युवा बायोमैट्रिक डिवाइस के कारण रिजेक्ट हाे गए। जिसके चलते महज 225 युवा ही ट्रेनिंग ले पाए। नगर पालिका पंजीयन के दौरान हर पात्र युवा से दो तरह के विकल्प लिए थे। पहला निकाय से जुड़े काम जैसे संपत्तिकर- जलकर वसूली, संपत्तिकर सर्वे, निर्माण में श्रमिक के रूप में काम और दूसरा कौशल प्रशिक्षण के लिए ट्रेड में कॅरियर बनाने का था। युवक एवं युवती को जो काम सौंपा गया। उसके शुरुआती 10 दिवस में निकाय के ही कामों की ट्रेनिंग दी है जबकि अगले 90 दिवस में काम कराया गया। जिसमें उन्हें चार हजार रुपए हर महीने मानदेय भी देना था। जो सीधे खाते में जमा किया जाना था। बायो मेट्रिक सिस्टम होने के कारण अनेक युवा ट्रेनिंग में अपनी पूरी उपस्थिति नहीं दे पाए। जिसके कारण युवाओं को यह राशि भी पूरी नहीं मिल पाई।