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भास्कर संवाददाता | दतिया

Datia News - भास्कर संवाददाता | दतिया गुरुवार को होलिका दहन के साथ ही रंग, गुलाल की बौछार शुरू हो गई। आमतौर पर देश में होलिका...

Dainik Bhaskar

Mar 02, 2018, 03:15 AM IST
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गुरुवार को होलिका दहन के साथ ही रंग, गुलाल की बौछार शुरू हो गई। आमतौर पर देश में होलिका दहन के बाद धुलेंडी यानि चैत्र प्रतिपदा को ही खेली जाती है। कुछ स्थानों पर रंग पंचमी को भी होली का उत्सव बनाया जाता है। अंचल में भी एक ही दिन होली खेली जाती है। लेकिन दतिया शहर इस मामले में अलग है। यहां दो दिन तक लोगों पर होली का खुमार चढ़ रहा है। दो दिन न केवल बाजार बंद रहते है। बल्कि पहले दिन लोग रंगों से तो दूसरे दिन गुलाल से होली खेलते है। बड़े गोविंद मंदिर से निकलने वाले नगाड़े के साथ होली का समापन मान लिया जाता है। यानि लोग एक दूसरे पर रंग गुलाल डालना बंद कर देते हैं।

पं. ललित बिहारी व्यास के अनुसार बड़े गोविंद मंदिर की स्थापना तत्कालीन राजा इंद्रजीत ने 1733 में कराई थी। माघ पूर्णिमा को गोविंद जी की होली का डाढ़ा लगाया जाता है। फाल्गुन पूर्णिमा को होली दहन के बाद चैत्र कृष्ण प्रतिपदा को ठाकुर जी अपने भक्तों के साथ मंदिर में ही होली खेलते है। इसके बाद दौज को ठाकुर जी का रंग गुलाल का प्रसाद नगर की जनता को बांटने के उद्देश्य से दौज के दिन बड़े गोविंद मंदिर का नगाड़ा निकाला जाता हैं। नगाड़ा निकाले जाने की शुरूआत मंदिर की स्थापना के साथ 1733 में ही हो गई थी। तब से भक्तों द्वारा अनवरत रूप से दौज पर नगाड़ा निकाला जा रहा हैं।

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