Hindi News »Madhya Pradesh »Datia» गांवों के सरकारी स्कूलों का रिजल्ट सौ फीसदी, उत्कृष्ट स्कूलों काे भी पछाड़ा

गांवों के सरकारी स्कूलों का रिजल्ट सौ फीसदी, उत्कृष्ट स्कूलों काे भी पछाड़ा

ग्रामीण क्षेत्रों से प्रतिभाएं निकल रही हैं। हाईस्कूल व हायर सेकंडरी स्कूल के परीक्षा परिणामों ने यह साबित कर...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 03:55 AM IST

गांवों के सरकारी स्कूलों का रिजल्ट सौ फीसदी, उत्कृष्ट स्कूलों काे भी पछाड़ा
ग्रामीण क्षेत्रों से प्रतिभाएं निकल रही हैं। हाईस्कूल व हायर सेकंडरी स्कूल के परीक्षा परिणामों ने यह साबित कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे कई हाईस्कूल व हायर सेकंडरी स्कूल का रिजल्ट सौ फीसदी रहा है। जबकि शहर व ब्लॉक मुख्यालय पर चल रहे सुविधा संपन्न उत्कृष्ट स्कूलों का रिजल्ट भी इतना नहीं पहुंच पाया। यह हाल तब है, जब शहर व कस्बाई इलाकों के स्कूलों में शिक्षकों की पर्याप्त संख्या के अलावा भवन व लैब की भी व्यवस्था है। लेकिन यह सुविधाएं ग्रामीण इलाके के स्कूलों में नहीं है।

बता दें कि उत्कृष्ट विद्यालयों में प्रवेश परीक्षा के माध्यम से ही प्रवेश दिया जाता है। यानि यह तय है कि इन विद्यालयों में सिर्फ मेधावी छात्र ही प्रवेश ले पाते हैं। यहीं नहीं इस स्कूलों के विकास सहित अन्य संसाधनों के लिए शासन अतिरिक्त राशि उपलब्ध कराता है। जिले के योग्य शिक्षकों को पदस्थ किया जाता है। बावजूद इसके जिले के उत्कृष्ट विद्यालयों से ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूल अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।

जिले के 354 छात्र-छात्राओं को 28 मई को भोपाल में मिलेंगे लैपटॉप

दतिया | मेधावी छात्र प्रोत्साहन योजना के तहत जिले के 354 छात्र-छात्राओं को हायर सेकंडरी के वार्षिक परीक्षा परिणाम में बेहतर प्रदर्शन करने पर लैपटॉप दिया जाएगा। छात्र-छात्राओं को 28 मई को भोपाल में आयोजित समारोह में यह राशि प्रदान की जाएगी। दतिया से सभी छात्र-छात्राएं बसों से 27 मई को भोपाल के लिए रवाना होंगी। इनके साथ विभागीय शिक्षक भोपाल जाएंगे। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से इन होनहार छात्रों की सूची भोपाल भेजी जा चुकी है।

ऐसे समझें ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों का रिजल्ट क्यों अच्छा आया

सेंवढ़ा ब्लाॅक: गांव के स्कूल से सात फीसदी कम रहा उत्कृष्ट का रिजल्ट

उत्कृष्ट विद्यालय- हाईस्कूल का 83.87, हायर सेकंडरी 93.55 रहा परिणाम:
स्कूल में कुल 285 हाई व हायर सेकंडरी के छात्र-छात्राएं दर्ज हैं। इनको पढ़ाने के लिए विषय विशेषज्ञ 15 शिक्षक पदस्थ हैं। न किसी संसाधन की कमी और न ही शिक्षकों की। बावजूद शिक्षकों द्वारा छात्रों की पढ़ाई पर ध्यान न दिए जाने के कारण परिणाम अच्छा तो रहा, लेकिन शासन की मंशानुसार नहीं। बता दें कि उत्कृष्ट विद्यालय को अंग्रेजी माध्यम का माना जाता है। प्रवेश के लिए लिखित परीक्षा होती है। यानि योग्य छात्र ही इसमें प्रवेश पाते हैं।

इसी ब्लाक का गांव उचाड़ हाईस्कूल। दो कक्षों में संचालित हैं। इसमें कुल 30 छात्र दर्ज हैं, सभी विषय के लिए छह शिक्षक पदस्थ हैं। इस स्कूल का परीक्षा परिणाम शत प्रतिशत रहा है। परिणाम को लेकर विद्यालय के प्राचार्य दीपेश श्रीवास्तव कहते हैं कि स्कूल में बच्चों को नियमित पढ़ाया जाता है। अगर कोई छात्र स्कूल नहीं आता तो तत्काल उसके अभिभावकों से संपर्क किया जाता है। शिक्षक भी नियमित पढ़ाई को लेकर गंभीर हैं।

शासन द्वारा हायर सेकंडरी वार्षिक परीक्षा में सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं द्वारा 85 प्रतिशत या इससे अधिक अंक व अनुसूचित जाति व जनजाति के ऐसे छात्र-छात्राएं जिनके अंक 70% या इससे अधिक अंक लाने वाले छात्र-छात्राओं को लैपटॉप या 25 हजार रुपए की राशि से सम्मानित किया जाता हैं। दतिया जिले से इस श्रेणी में कुल 354 छात्र-छात्राएं चयनित किए गए हैं। शासन द्वारा ऐसे छात्र-छात्राओं को समारोह में सम्मानित किया जाएगा। 28 मई को समारोह होगा। समारोह में शामिल होने के लिए छात्र-छात्राएं दतिया से 27 मई की रात बसों से भोपाल के लिए रवाना होंगी।

भांडेर ब्लाॅक: गांव के स्कूल का उत्कृष्ट से 39% रिजल्ट ज्यादा रहा

उत्कृष्ट विद्यालय - हाई स्कूल 75.5 फीसदी, हायर सेकंडरी 71.3 परीक्षा परिणाम रहा:
विद्यालय में कुल 426 छात्र छात्राएं हैं। सभी विषयों के 17 शिक्षक पदस्थ हैं। किसी संसाधन की कमी नहीं फिर भी ग्रामीण क्षेत्र के पंडोखर हाई स्कूल से परीक्षा परिणाम कम रहा है।

पंडोखर हाईस्कूल का परीक्षा परिणाम शत प्रतिशत रहा। यहां 39 छात्र दर्ज हैं। छह शिक्षकों पर इनकी जिम्मेदारी है। प्राचार्य महेश गेड़ा के अनुसार स्टाफ के बीच सामंजस्य बनाने के साथ छात्रों के भविष्य का ध्यान रखा। मैं स्वयं छात्रों को दो विषय पढ़ाता था। उपस्थिति पर विशेष ध्यान दिया। छात्रों की पढ़ाई को लेकर निरंतर पालकों के संपर्क में रहे।

ग्रामीण क्षेत्रों में पढ़ाई में सुधार हो रहा है

शहरी क्षेत्र के कुछ विद्यालयों की स्थिति खराब है। ग्रामीण क्षेत्रों में छात्रों को प्लानिंग के तहत पढ़ाई कराई जाती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों को परीक्षा परिणाम लगातार सुधर रहा है। उत्कृष्ट विद्यालयों का भी यही हाल है। शहरी क्षेत्र के शिक्षक राजनीति में भी उलझे रहते है। -अनिल तिवारी, डीईओ

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Datia

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×