• Home
  • Madhya Pradesh News
  • Datia News
  • Datia - ज्यादा बारिश से खेतों में भरा पानी, तिलहन में 20 और मूंग-उड़द में 15 फीसदी नुकसान
--Advertisement--

ज्यादा बारिश से खेतों में भरा पानी, तिलहन में 20 और मूंग-उड़द में 15 फीसदी नुकसान

ग्राम बसई में उड़द के खेत में लगातार बारिश का पानी भरा रहने से फसल खराब हो गई। खेतों से पानी जल्द नहीं निकाला तो बढ़...

Danik Bhaskar | Sep 13, 2018, 02:31 AM IST
ग्राम बसई में उड़द के खेत में लगातार बारिश का पानी भरा रहने से फसल खराब हो गई।

खेतों से पानी जल्द नहीं निकाला तो बढ़ सकता है नुकसान

भास्कर संवाददाता | दतिया

इस साल जिले में अच्छी बारिश हुई, लेकिन किसानों को इससे भी नुकसान हो गया। लगातार बारिश के कारण खेतों में पानी भर गया और फसल खेताें में ही खराब हो रही है। आसमान साफ होने पर कृषि विभाग के अफसरों ने कुछ गांवों में घूमकर जब सैंपल सर्वे किया तो प्रारंभिक रूप से गन्ना और धान की फसल को छोड़कर बाकी सभी खरीफ फसलों में नुकसान हुआ है। तिलहन में 20 प्रतिशत तक और मूंग व उड़द की फसल में 15 प्रतिशत तक नुकसान सामने आया है।खेतों में अभी कुछ और दिन पानी भरा रहने की आशंका है, इसलिए फसलें और खराब हो सकती हैं।

कृषि विभाग ने इस साल खरीफ फसल का लक्ष्य एक लाख 26 हेक्टेयर रखा था, लेकिन बोवनी सिर्फ एक लाख 5 हजार 264 हेक्टेयर में ही हो सकी। इसमें सबसे ज्यादा धान की बोवनी हुई। धान का रकबा 20 हजार 500 हेक्टेयर रखा गया था, लेकिन अच्छी बारिश के कारण बोवनी 26 हजार हेक्टेयर में हो गई। बाकी फसलें लक्ष्य के करीब भी नहीं पहुंच सकीं। बोवनी के समय लगातार बरसते रहे पानी के कारण तिली, उड़द और मूंग की फसलों की बोवनी कम हो सकी। तिली का लक्ष्य 40 हजार 500 हेक्टेयर था, लेकिन बोवनी 26 हजार 950 हेक्टेयर में ही हुई। इसी प्रकार उड़द का लक्ष्य 40 हजार था, पर बोवनी सिर्फ 35 हजार 543 और मूंग का लक्ष्य 3500 था, पर बोवनी सिर्फ 3175 हेक्टेयर में ही हो सकी। जिन किसानों ने उड़द, मूंग और तिल की बोवनी कर ली है, वे ज्यादा बारिश के कारण परेशान हैं।

बारिश ने खेतों को सूखने का नहीं दिया मौका

इस सीजन में पहली बारिश 26 से 29 जून तक लगातार बारिश हुई। इन चार दिनों में सबसे ज्यादा बारिश 28 जून को 51 मिमी हुई जिससे खेतों में पानी भर गया। 30 जून से 11 जुलाई तक मौसम साफ रहा तो किसानों ने बोवनी कर दी, ज्यादातर किसान खेतों में पानी भरा होने के कारण बोवनी नहीं कर सके। इसके बाद 11 जुलाई से 1 अगस्त तक बारिश का क्रम जारी रहा। इसके चलते ज्यादातर किसान बोवनी करने का इंतजार ही करते रह गए। जिन किसानों ने बोवनी कर भी ली थी और फसल उग आई थी, उनके खेतों में पानी भरने से फसल नष्ट होने की कगार पर पहुंच गई है।

इन गांवों में कृषि विभाग के अफसरों ने किया सर्वे

8 सितंबर को इस सीजन की आखिरी बारिश 62 मिमी दर्ज की गई। इसके बाद जिले में बारिश नहीं हुई है, लेकिन खेतों में पानी अभी भी भरा है। पिछले तीन दिन से मौसम साफ होने पर तीनों ब्लॉकों के कृषि विभाग के विकासखंड अधिकारी ग्राम रिछरा, बुधेड़ा, बसई, सनोरा, ततारपुर, पंडोखर, मंगरौल आदि गांवों में घूमे, तो पता चला कि ज्यादातर खेतों में तिलहन, उड़द और मूंग की फसल में नुकसान हुआ है। तिलहन में सबसे ज्यादा 20 प्रतिशत तक और मूंग व उड़द की फसल में 15 फीसदी तक नुकसान सामने आया है। उड़द की फसल मौसम साफ होते ही पीली पड़ने लगी है।

किसान खेतों में भरा पानी निकालें ताकि नमी खत्म हो सके

धान और गन्ना की फसल को छोड़कर बाकी फसलें लगातार जलभराव के कारण खेतों में खराब हो जाती हैं। जिन किसानों के खेतों में उड़द और मूंगफली की फसलें खड़ी हैं और खेतों में पानी भरा है तो वे तत्काल खेतों से पानी निकालने का रास्ता बनाएं। इससे खेतों में नमी खत्म हो सकेगी। अगर किसान तत्काल यह व्यवस्था कर लेते हैं तो इन दोनों फसलों को कुछ हद तक खराब होने से बचाया जा सकता है।

खेतों में पानी भरने से हुआ फसलों को हुआ नुकसान


किसानों को दवाइयां बांट रहे हैं