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पुरस्कार की राशि से बंजर भूमि उपजाऊ बनाने वाले पर्यावरण प्रेमी डॉ. तोमर बने कृषि विश्वविद्यालय के संयुक्त निदेशक

Datia News - कृषि विज्ञान केंद्र में केंद्र प्रमुख रहते हुए बंजर और ऊबड़ खाबड़ जमीन, झाड़ झक्कड़ों की सफाई कराकर नए केंद्र का...

Bhaskar News Network

Sep 13, 2019, 07:05 AM IST
Datia News - mp news environmentally friendly dr tomar who made the barren land fertile with the prize money became joint director of the agricultural university
कृषि विज्ञान केंद्र में केंद्र प्रमुख रहते हुए बंजर और ऊबड़ खाबड़ जमीन, झाड़ झक्कड़ों की सफाई कराकर नए केंद्र का निर्माण करवाने वाले डॉ. आरकेएस तोमर पदोन्नत होकर संयुक्त निदेशक के तौर पर राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर में पदस्थ किए गए हैं। डॉ. तोमर आठ साल तक दतिया केवीके में पदस्थ रहे और किसानों को खेती की उन्नत तकनीक से जोड़ा। नए केंद्र का निर्माण कर बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने का श्रेय उन्हीं को जाता है। कई प्रयोग उनके द्वारा खेती में किए गए। अब केंद्र की मान डॉ. पुनीत कुमार राठौर के हाथों में होगी। डाॅ. राठौर उद्यानिकी के विशेषज्ञ हैं आैर पूर्व में भी उद्यान वैज्ञानिक के रूप में कृषि विज्ञान केन्द्र दतिया पर केन्द्र की स्थापना से लेकर वर्ष 2012 तक पदस्थ रह चुके हैं।

संयुकत निदेशक बने डाॅ. तोमर कृषि विज्ञान केन्द्र दतिया में केंद्र प्रधान के रूप में वर्ष 2011 में पदस्थ हुए थे। अपने आठ वर्षीय कार्यकाल में डाॅ तोमर ने दतिया जिले में कृषि के क्षेत्र में कई नए आयाम स्थापित किए जो मील का पत्थर साबित होंगे। पहले कृषि विज्ञान केन्द्र शहर में किराए के मकान में संचालित होता था। डाॅ. तोमर के चार साल के अथक प्रयास के बाद 3 जनवरी 2015 को कृषि विज्ञान केंद्र को हमीरपुर गांव के पीछे न केवल खुद का प्रशासकीय भवन मिला बल्कि वहां कई खेती किसानी से लेकर पशु पालन, मछली पालन के लिए शैडों का निर्माण कराया। 15 जुलाई 2015 से इस नए केंद्र पर कार्य प्रारंभ हुआ।

केंद्र प्रांगण उबड़-खाबड एवं झाड़ियों से पटा था। घनघोर जंगल होने के कारण लोग यहां जाने से डरते थे। चूना युक्त मिट्टी थी। मिट्टी में उसरपन 10 के स्केल में 9.33 था जिसको हरी खाद एवं अन्य कृषि क्रियाएं कर उसरपन कम किया गया। अब केंद्र पर सफलतापूर्वक फसलें उगाई जा रही हैं। केंद्र प्रांगण में निकले नाले को तीन तालाबों में बदला गया जिसमें 29413 घन मीटर में बारिश का पानी संग्रहित होता है। जिससे 42 हेक्टेयर भूमि सिंचाई की जा रही है और एक तालाब में मछली पालन प्रारंभ कर दिया गया है।

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