यूरिया से गोदाम फुल, किसान को प्रति हेक्टेयर केवल दो बोरी, नाराज किसानों ने किया प्रदर्शन

Datia News - खाद की समस्या को लेकर ज्ञापन सौंपते ग्रामीण। तहसीलदार को 3 दिन का समय देकर सौंपा ज्ञापन इस मामले में किसानों...

Dec 04, 2019, 10:51 AM IST
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खाद की समस्या को लेकर ज्ञापन सौंपते ग्रामीण।

तहसीलदार को 3 दिन का समय देकर सौंपा ज्ञापन

इस मामले में किसानों का आक्रोश मंगलवार को तहसील परिसर में नजर आया। किसान जागरण मंच संयोजक सीपी शर्मा के नेतृत्व में सैकड़ों किसानों ने तहसील पर जमकर नारेबाजी की तथा उन्हें जरूरत के मान से एक ही बार में खाद देने हेतु अधिकारियों से आव्हान किया। तहसीलदार साहिर खान ने उन्हें समझाया तो किसानों ने एक ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा तथा तीन दिन में उन्हें जरूरत के हिसाब से खाद नहीं मिलने पर आंदोलन की चेतावनी दी।

स्टाॅक में कमी हो तो खाद कम मिलना समझ आता है लेकिन खाद होने के बाद भी दमनकारी निर्णय क्यों?

तहसीलदार ने वरिष्ठों तक किसानों की मांग पहुंचाने का दिया आश्वासन

भास्कर संवाददाता | सेंवढ़ा

किसान को गेहूं के लिए प्रति हेक्टेयर 6 बोरी यूरिया की आवश्यकता होती है। इसकी जानकारी प्रशासन को भी है, बावजूद इसके फिलहाल किसान को प्रति हेक्टेयर केवल 2 बोरी ही उपलब्ध करवाई जा रही है। अजीबोगरीब सरकारी फरमान के चलते किसानों से कहा जा रहा है कि वह 20 दिन बाद फिर से दो बोरी ले लें और इस प्रकार तीन किस्तों में उन्हें यूरिया मिलेगी। यह तब हो रहा है जब गोदामों में यूरिया भरी हुई है। इस समस्या से नाराज किसान आक्रोशित हैं। मंगलवार को किसान जागरण मंच के तत्वाधान में एक ज्ञापन सेंवढ़ा तहसीलदार साहिर खान को भी सौंपा गया।

पिछले कुछ वर्षों से यूरिया की कमी किसानों के लिए समस्या रहती है। पर इस बार राज्य सहकारी विपणन संघ के गोदामों में यूरिया पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। पर यह खाद किसानों को उनकी मांग के अनुसार नहीं दी जा रही। प्रशासन ने वितरण व्यवस्था में एक पेंच फंसा दिया है जिसके मुताबिक किसान की आवश्यकता अनुसार प्रति हेक्टेयर 6 बोरी तो उन्हें मिलेगी पर इसके लिए तीन बार गोदाम पर आना होगा। पावती में दर्ज हेक्टेयर के मान से उन्हें 2-2 बोरी प्रति हेक्टेयर के हिसाब से और खाद दी जा रही है।

संयोजक किसान जागरण मंच सीपी शर्मा का कहना है कि मंैने कई बार जिला प्रशासन को समझाने का प्रयास किया कि किसानों की आवश्यकता के अनुसार उन्हें खाद केवल तब नहीं मिलता जब स्टाक में कमी हो। जबकि गोदाम प्रभारियों के अनुसार उनके यहां खाद भरा पड़ा है और रखने के लिए जगह नही है। बावजूद इसके प्रशासन को यह निर्णय किसान के लिए दमनकारी है। पहले भी हमें धान में काफी नुकसान हुआ पर कोई मुआवजा नहीं मिला। शासन प्रशासन किसानों से दुश्मनों जैसा व्यवहार कर रही है। हम सड़क पर उतरकर जन आंदोलन करेंगे। वहीं किसानों का तर्क है कि यूरिया ले जाने के लिए उन्हें गांव से ट्रेक्टर लाना पड़ता है। बार-बार यूरिया के लिए ट्रैक्टर लाने से इतना भाड़ा खर्च होता है जितनी बचत प्रशासनिक सप्लाई से नहीं होती। मसलन ट्रैक्टर के भाड़े में हजारों देने से अच्छा है मार्केट से 50 रुपए की ब्लैक में बोरी खरीदना।

जिला प्रशासन का निर्णय अव्यवहारिक है


एक बार में पांच बोरी दें, नहीं तो यूरिया नहीं लेंगे


इस अन्याय के खिलाफ सड़क पर विरोध करेंगे


मैंने प्रतिवेदन भेजा है


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