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जीवन की पूंजी होते हैं अच्छे मित्र: शास्त्री

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2019, 05:02 AM IST

Datia News - भागवत कथा का श्रवण करती महिलाएं। हवन भंडारे के साथ कुम्हरिया गांव में भागवत कथा का हुआ समापन भास्कर संवाददाता...

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भागवत कथा का श्रवण करती महिलाएं।

हवन भंडारे के साथ कुम्हरिया गांव में भागवत कथा का हुआ समापन

भास्कर संवाददाता | उनाव

अच्छे मित्र जीवन की पूंजी होते हंै। जीवन मे मित्रता का भाव रखने वालों से सखा धर्म का निर्वाह करना बेहद जरूरी है। भगवान राम ने अपने जीवन में सुग्रीव एवं विभीषण को मित्र बनाकर उन्हें राज्यपद सौंपा तो भगवान कृष्ण ने सुदामा के साथ आदर्श सखा धर्म निभाया है। यह उदगार कुम्हरिया गांव के प्राचीन हनुमान मंदिर के समीप आयोजित भागवत कथा के समापन अवसर पर विद्वान भागवताचार्य विनोद शास्त्री ने व्यक्त किए।

समापन अवसर पर आयोजित भागवत कथा के अंतिम दिन दीन हीन व भूखे सुदामा की भावुक कथा का स्मरण कराते हुए भागवताचार्य विनोद शास्त्री ने कहा कि भूखा वह है जो दीन दुखियों व अभावग्रस्त लोगों का शोषण कर अपनी संतान का भरण पोषण करता है। उसे इसी जन्म में नरक का दुख भोगना पड़ता है। जबकि इसके विपरीत जो दीन दुखियों की सेवा में निस्वार्थ भाव से मगन रहता है, उसके योग क्षेम की चिंता स्वयं भगवान कृष्ण करते है। सच्चे अर्थों में वही भागवत कथा का भागी होता है। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय से आग्रह किया कि अपने बच्चों को धर्म सतकर्म से जोड़े तभी संस्कारवान औलाद बन सकेगी। पाश्चात्य संस्कृति के बढ़ते प्रभाव से सांस्कृतिक संक्रमण का खतरा नई पीढ़ी पर मंडरा रहा है। इसीलिए घर घर में प्रतिदिन रामायण के व्याख्या सहित पाठ की आवश्यकता है। तभी घर परिवार एवं समाज का मंगल हो सकेगा। उन्होंने आगे कहा कि संत का स्वरूप धरकर स्वयं भगवान सुदामा द्वारिका को धन्य करने आये थे। सुदामा की प|ी सुशीला ने जब भगवान से धन मांगने के लिए कहा तो स्वाभिमानी सुदामा ठाकुर जी से मांगने द्वारिका गए पर मांगा कुछ नहीं। लेकिन सबके ह्रदय में निवास करने वाले भगवान कृष्ण ने चार मुठ्ठी चावल देकर ही सुदामा को अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष, सकल पदार्थ दे दिए। इसीलिए भगवान के दरबार में हमें कुछ भी नहीं मांगना चाहिए। भगवान अपने भक्त की आवश्यकताओं को जानते हैं और उसकी पूर्ति भी वह स्वयं करते हैं। कथा के समापन अवसर पर भागवत भगवान की है आरती, पापियों को पाप से है तारती का गायन कर महापुराण की आरती उतारी गई। कथा के उपरांत हवन एवं भंडारे का आयोजन किया गया। जिसमें हजारों की संख्या में पहुंचे लोगों ने प्रसादी ग्रहण की। इस अवसर पर बलराम सिंह दांगी, कप्तान सिंह दांगी, कालीचरण दांगी, राघवेंद्र दांगी, कल्लू दांगी, रामबिहारी दांगी, सौपत सिंह दांगी, रामनिवास तिवारी, कमलेश झा सहित बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी लोग उपस्थित रहे।

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