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सर्वे पर अिधकारियों का ध्यान नहीं, अब भी अपात्रों काे बांटा जा रहा है गरीबों के हिस्से का राशन

एक वर्ष पहले
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अब तक पूर्ण नहीं हुआ सर्वे का काम

शासन द्वारा नवंबर माह में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत पात्रता सूची में शामिल परिवारों के सत्यापन प्रारंभ करवाया गया था। सत्यापन को लेकर जनवरी माह तक जिला प्रशासन सक्रिय रहा। नतीजा यह हुआ कि फरवरी माह के पहले सप्ताह तक 80 फीसदी परिवारों का सत्यापन हो चुका था। जबकि पिछले एक माह से इस कार्य की गति काफी धीमी हो गई है। जिले में बचे हुए 13 फीसदी परिवारों का सत्यापन न होने के कारण अभी तक न तो वह 15 हजार परिवार पात्रता सूची से हटाए गए जिन्हें एप ने अपात्र माना है और नहीं नए परिवारों के जोड़ने के कार्य प्रांरभ हुआ है। तहसील में रोज दर्जनों लोग स्वयं को पात्र बताते हुए सूची में नाम शामिल करवाने के लिए चक्कर काट रहे हैं। बता दें कि दिसम्बर 2019 तक सर्वे का पूरा कार्य करने के बाद जनवरी माह से नए सिरे से राशन का वितरण होना था। जनवरी, फरवरी गुजरने के बावजूद अभी भी महज 87 फीसदी काम ही पूरे जिले में निपटा है। हालांकि दतिया नगर को छोड़कर अन्य नगरीय क्षेत्र में शतप्रतिशत सर्वे का कार्य पूर्ण हो चुका है।

मध्यप्रदेश सरकार द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सृदृढ बनाने हेतु पात्र परिवारों के सत्यापन का अभियान 8 नवंबर से प्रारंभ कर दिया था। इस अभियान के तहत उन सभी परिवारों का सत्यापन होना है जो कि शासन द्वारा बीपीएल सहित कुल 24 श्रेणियों के पात्र परिवारों के तहत उचित मूल्य की दुकानों से राशन प्राप्त करते हैं। जिले में ऐसे 1 लाख 1 हजार 512 परिवार इस सर्वे के दायरे में शामिल हैं। 15 नवंबर तक जिले में बनाए गए 529 दलों के मोबाइल में एप डाउन लोड किया जाना था। प्रत्येक दल में दो सदस्य शामिल हैं। इनमें एक पंचायत सचिव अथवा नगरीय क्षेत्र में निकाय के कर्मचारी वहीं दूसरा सदस्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पटवारी अथवा कृषि विभाग के अधिकारी शामिल थे। इन दलों को सर्वे में शामिल परिवारों के उपलब्ध दस्तावेज दिए गए। 30 नवंबर तक का वक्त इन दलों को सत्यापन के लिए दिया गया था।

दतिया की वजह से कम आ रहा है प्रतिशत

भूपेंद्र सिंह परिहार, जिला आपूर्ति अधिकारी दतिया

यानि दल के सदस्य को परिवार के पास पहुंचकर एक आफ लाइन तथा एक मोबाइल एप के जरिए फार्म भरना था। 7 दिसम्बर तक दलों को अपना प्रतिवेदन संबंधित नगर परिषद अथवा जनपद पंचायत में प्रस्तुत करना था। 9 से 13 दिसम्बर तक सत्यापन दलों के कार्य का वैरिफ़िकेशन होना था। 15 दिसम्बर को जब कार्य की पूर्णता का वक्त आया तब जिले के हालत काफी खराब निकले। सर्वे दल में शामिल आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पटवारी आदि के द्वारा कार्य करने से इंकार करने के बाद नतीजा यह हुआ कि जिले भर में 2 फीसदी परिवारों का ही सत्यापन हो सका। इसके बाद कलेक्टर रोहित सिंह ने सख्ती दिखाई और 20 दिसम्बर को ब्लाक स्तर पर बैठकों का आयोजन कर 21 से अभियान प्रारंभ करवाया गया। इस बार कर्मचारियों को भी कड़ी हिदायत दी गई कि कोई भी कार्य में लापरवाही न करे।


पीडीएस की दुकान पर राशन लेने के लिए भीड़।

87% पहुंचा सर्वे का आंकड़ा

पिछले दो माह से जारी सर्वे के बाद यह तस्वीर सामने आई है जिसके मुताबिक सबसे अच्छा काम इंदरगढ़ में हुआ। यहां 2368 परिवारों के मुकाबले 2370 का सत्यापन हो चुका है। सेंवढ़ा नगर परिषद में 2925 के मुकाबले 2900 का एवं भांडेर नगर परिषद में 3247 में 3100 की सर्वे रिपोर्ट पोर्टल पर डाल दी गई है। इन तीन नगर परिषदों के अलावा सबका काम फिसड्डी रहा। सबसे खराब हालत दतिया नगर पालिका की रही जहां 17899 में 8394 एवं बड़ोनी नगर परिषद में 1957 में 1700 का सत्यापन हुआ। जनपद पंचायत भांडेर में 17153 में 14350, जनपद पंचायत सेंवढ़ा में 21685 में 17236 तथा दतिया जनपद पंचायत में 34321 में 26182 का सत्यापन हुआ। यह आंकड़े पिछले सप्ताह तक के है। चुंकी पूरे जिले में अभी भी 19 हजार का सत्यापन शेष है, इस प्रकार जिले का सर्वे पूरा नहीं होने के कारण नई व्यवस्था का आवंटन भी चालू नहीं हुआ नतीजा यह हुआ कि जनवरी से नए वितरण व्यवस्था के मुकाबले आने वाले फरवरी में भी इसमें दिक्कत रहेगी।
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