परमात्मा की शरण में जाने से दुखों का अंत हो जाता है: राजकुमारी

Datia News - श्रीराम चरित मानस कार्यक्रम में कथा का वाचन करते वक्ता। दांतरे मोहल्ला में चल रही श्रीरामचरित मानस कथा ...

Oct 17, 2019, 07:06 AM IST
श्रीराम चरित मानस कार्यक्रम में कथा का वाचन करते वक्ता।

दांतरे मोहल्ला में चल रही श्रीरामचरित मानस कथा

भास्कर संवाददाता | दतिया

मोह माया में फंस कर व्यक्ति धर्म से दूर हो रहा है, लेकिन मोछ व दुख खत्म करने के लिए हमें परमात्मा की शरण जाना पड़ता है। परमात्मा की शरण में जाने से सभी दुखों का स्वत: ही अंत हो जाता है। उक्त विचार दांतरे मोहल्ला अंदर बस्ती में स्व. गिरधारी लाल दांतरे की 21 वीं पुण्य स्मृति पर आयोजित श्रीराम चरित मानस में उप्र से आई वक्ता विदुषी राजकुमारी ने व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि जो भगवान की भक्ति में लीन रहता है उसे किसी भी प्रकार की कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ता, भगवान उनकी सदैव रक्षा करते हैं। आज की दौड़ती भागती जीवन शैली में जन्म से लेकर शादी ब्याह सभी रस्मों-रिवाज की लोग पहले से प्लानिंग कर लेते हैं। जैसे बच्चा कब स्कूल जाएगा, कब उसकी शादी करेंगे, कब घर बनाएंगे, कब कहीं बाहर घूमने जाएंगे आदि लेकिन भगवान की भक्ति के लिए कुछ क्षण की प्लानिंग नहीं करते। कुछ समय भगवान भक्ति में लगाएंगे तो आपका अंत सुधर जाएगा। इसलिए सभी प्लानिंग के साथ भक्ति-पूजन की भी प्लानिंग करें। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार बीमार होने पर भोजन अच्छा नहीं लगता, उसी प्रकार जब व्यक्ति के मन में पाप समाहित हो जाता है, तो वह भक्ति से दूर होने लगता है। इसी बीमारी रुपी पाप का दूर करने भगवान की भक्ति करते रहना चाहिए। इसलिए हमेशा अपने मन को सत्कर्म में लगाएं, जो जितना सत्कर्म करेगा भगवान उसे वैसे ही फल देंगे। मन में अज्ञान का अंधेरा है, इस अंधकार को दूर करने का एक ही रास्ता है, कन्हैया जी की भक्ति। आत्म कल्याण के लिए भगवान भक्ति एक सरल रास्ता है। पिंडारी से आए हुए पुरुषोत्तम दास पचौरी ने भी रामचरितमानस के प्रथम दिन श्रोताओं को रामचरितमानस पर प्रकाश डालते हुए सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ बताया। अंत में शीतल प्रसाद दांतरे द्वारा रामायण की आरती कर प्रसाद का वितरण किया गया।

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