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सिंचाई कर वसूली के नोटिस दिए तो किसान बोले- सरकार पहले हमारी उधारी तो चुकाए
{जिले के 23 हजार किसानों के गेहूं बोनस के 37 करोड़ रु. सरकार पर बकाया
{नोटिस जारी कर कहा- 7 से 15 दिन में पैसे जमा करें अन्यथा करेंगे कुर्की की कार्रवाई
सिंचाई कर की वसूली के लिए जल संसाधन विभाग ने जिले के 10 हजार से अधिक किसानाें काे नाेटिस जारी कर दिए हैं। नोटिस में किसानों को नहरों से पानी के लेने के एवज में सिंचाई कर चुकाने के लिए 7 से 15 दिन का समय देते हुए कहा गया है कि तय वक्त में राशि नहीं चुकाई तो किसानों के खिलाफ कुर्की की कार्रवाई की जाएगी। उधर किसानों का कहना है कि पहले सरकार उनकी उधारी चुकाए तब वसूली करे। यहां बता दें कि जिलें के 23 हजार किसानों को गेहूं का बोनस नहीं मिला है। उनके करीब 37 करोड़ रुपए सरकार पर बकाया हैं। किसानों के मुताबिक न उन्हें बोनस मिला न अभी फसल पककर तैयार हुई, ऐसे में किसानों के पास पैसा ही नहीं है। वे सिंचाई कर का पैसा कहां से दें।
जिले में रबी फसल की सिंचाई के लिए जल संसाधन विभाग किसानों को नहरों से पानी देता है। विभाग नहर से पानी लेने के एवज में किसान से 250 रुपए प्रति हेक्टेयर के हिसाब से सिंचाई कर वसूलता है। इस राशि के वसूली के लिए विभाग द्वारा किसानों को नोटिस थमाए जा रहे हैं। यहां बताना होगा कि इस प्रकार की वसूली के लिए आमतौर पर किसानों से फसल मंडी में पहुंचने के वक्त ही अभियान चलाया जाता है क्योंकि फसल बेचने के बाद किसानाें के पास पैसा होता है। जल संसाधन विभाग के वर्तमान वसूली अभियान ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है।
10 हजार किसान ऐसे, जिन्होंने कभी सिंचाई कर नहीं दिया
जिले की 1 लाख 40 हजार हेक्टेयर जमीन को सिंचाई के लिए नहरों से पानी दिया जाता है। जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री एनपी बाथम के मुताबिक, जिले के 30 हजार किसान लंबे समय से सिंचाई कर नहीं दे रहे हैं। यह किसान लगभग 78 हजार हेक्टेयर जमीन की सिंचाई नहरों के पानी से करते हैं। उनके अनुसार, जिले के 10 हजार से अधिक किसान ऐसे हैं जिन्होंने नहर शुरू होने से लेकर आज तक सिंचाई कर जमा नहीं किया है। जिले के किसानों पर 8 करोड़ रुपए सिंचाई कर बकाया है। इन्हीं किसानों को बकाया राशि जमा करने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं।
किसान बोले- सरकार ने अब तक बोनस का पैसा नहीं दिया, फसल आई नहीं, किसान पैसा कहां से दें
{उनाव बालाजी के किसान अवधकिशोर शर्मा का कहना है कि वे नहर के पानी से खेतों की सिंचाई ही नहीं करते, फिर भी उन्हें नोटिस थमा दिया गया है। वैसे भी सरकार पहले किसानों का बोनस तो दे, उसके बाद वसूली करे।
{उनाव के ही किसान अवधशरण शर्मा ने कहा कि वे 10 साल से अपने खेतों की सिंचाई अस्थायी बिजली कनेक्शन लेकर बोरवेल से कर रहे हैं। इसके बाद भी उन्हें नोटिस थमा दिया।
{झालमऊ के किसान प्यारेलाल पाल कहते हैं कि जल संसाधन विभाग के अफसरों ने चुनिंदा किसानों को परेशान करने के लिए नोटिस थमा दिए हैं। उनका कहना है कि वर्तमान में किसान के पास पैसा नहीं है। शासन से अब तक बोनस भी नहीं दिया। ऐसे में किसान पैसा कहां से दें।
किसान राशि नहीं देंगे तो वसूली की कार्रवाई करेंगे
एनपी बाथम, कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन विभाग, दतिया