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बच्चों की पाठ्य सामग्री राशि हड़पने वाला शिक्षक निलंबित

एक वर्ष पहले
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सेंवढ़ा ब्लाॅक की दरयापुर पंचायत के ग्राम कुंअरपुरा में स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय में बच्चों के लिए आने वाली राशि को खुर्दबुर्द करने के मामले में तत्कालीन प्रभारी प्रधानाध्यापक चंद्रप्रकाश वर्मा को निलंबित कर दिया गया है। जिला पंचायत सीईओ बीएस जाटव द्वारा 7 मार्च को जारी अपने आदेश में शिक्षक को दोषी माना।

पत्र में उल्लेख किया कि मामले मे शिक्षक गिरजेश कुमार अग्रवाल की शिकायत तथा दैनिक भास्कर में बीती 20 फरवरी को प्रकाशित समाचार तीन साल से बच्चों को नहीं मिली ड्रेस, स्लेट शिक्षण सामग्री भी नहीं दी, सत्य प्रतीत होती है। जिसके बाद संबंधित शिक्षक का कृत्य पदीय दायित्वों के निर्वहन के प्रति उदासीनता, घोर लापरवाही का परिचायक होकर मध्यप्रदेश सिविल आचरण नियम 1965 में वर्णित प्रावधानों के तहत कदाचरण की श्रेणी में आता है। अतः उक्त कृत्य के लिए पूर्णरूप से उत्तरदाई शिक्षक चंद्रप्रकाश वर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। मालूम हो कि विद्यालय में अध्ययनरत कुल 45 बच्चों में से अधिकतर को पिछले तीन चार वर्ष से गणवेश की राशि नहीं मिली है। कक्षा एक एवं दो के बच्चों को दी जाने वाली स्लेट एवं शिक्षण सामग्री जिसके लिए शासन स्कूल को सीधे राशि भेजता है वह भी बच्चों को नहीं दी गई। यहां तक कि खेलने के लिए जो संसाधन स्कूल में होने चाहिए वह भी स्कूल के पास उपलब्ध नहीं है।

गणवेश की राशि अपने करीबी के सेविंग एकाउंट में डाली


इस पूरे मामले में अभिभावकों द्वारा लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल, कलेक्टर दतिया एवं जिला शिक्षा अधिकारी दतिया को पत्र भेजे। बच्चों ने भी लिखित शिक्षकों से की है जिसमें स्पष्ट किया गया कि उन्हें इसी वर्ष नहीं बल्कि पिछले कई वर्षों से सामग्री नहीं मिली है। शाला में कार्यरत शिक्षक गिरजेश अग्रवाल से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि तीन माह पूर्व ही संस्था के तत्कालीन प्रधानाध्यापक चंद्रप्रकाश वर्मा यहां से रवाना हुए हैं। यह उन्हीं के समय का मामला है। फिलहाल रिकार्ड नहीं होने के कारण वह कुछ बता नहीं सकते। इस पूरे मामले को दैनिक भास्कर ने प्रकाशित किया। जिसके बाद सेंवढ़ा बीआरसी पुुरुषोत्तम पाठक के नेतृत्व मे इसकी जांच बीएसी राजकुमार बसेड़िया राजू विश्वकर्मा ने जांच की। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि शिक्षक द्वारा गणवेश की राशि अपने करीबी अखलेश सोनी के खाते में डाल दी। वहीं रिकार्ड में फर्जी सूचि लगाकर अपनी कागजी खाना पूर्ति कर दी। जांच में यह भी पाया गया कि खेल सामग्री की राशि भी शिक्षक ने हड़प ली शिकायत के बाद खराब सामग्री स्टाॅक में दिखाकर मामले को दबाने का प्रयास किया।

जांच में पाया गया दोषी, अब उच्चस्तरीय समिति के पास मामला

पुरुषोत्तम पाठक, बीआरसी सेंवढ़ा
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