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गांवों की सड़कें बदहाल, एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती, मरीज को कंधे पर ढोकर लाते हैं परिजन

गांव के रास्ते में भरा बारिश का पानी, ऐसे में कोई बीमार हो जाए तो उसे कंधे पर उठाकर लाना पड़ता है। कुछ गांवों की...

Danik Bhaskar

Sep 13, 2018, 02:30 AM IST
गांव के रास्ते में भरा बारिश का पानी, ऐसे में कोई बीमार हो जाए तो उसे कंधे पर उठाकर लाना पड़ता है।

कुछ गांवों की सड़कें ऐसी कि जहां से वाहन तो दूर पैदल निकलना तक मुश्किल

बढ़गौर: गांव में एक हजार से अधिक लोग निवास करते हैं। गांव का मुख्य रास्ता बिल्हारी से जुड़ता है, करीब दो किमी का रास्ता पूरी तरह कच्चा है। रेत के अवैध उत्खनन की वजह में जगह-जगह दो से तीन फीट के गड्ढे बने हुए हैं। बारिश के बाद इनमें पानी जमा है। जिससे पूरा रास्ता गंदे पानी व कीचड़ से लबरेज है। ऐसे में 108 एंबुलेंस गांव तक नहीं जाती। शिकायत की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा।

मऊ: गांव में 300 से अधिक की आबादी निवास करती है। मऊ तक जाने के लिए लोगों को जनौरी छिरेंटा मुख्य मार्ग से जाना पड़ता है। करीब डेढ़ किमी का रास्ता पूरी तरह खराब है। जगह-जगह गड्ढे व पानी जमा होने से दलदल की स्थिति बनी हुई है। जिससे पैदल निकलना तो दूर, वाहन भी निकाले जा सकते। रास्ते की हालत देखते हुए 108 एंबुलेंस के चालकों द्वारा गांव में जाने से मना कर दिया जाता है।

इमिलिया, टोकनपुर: दोनों गांव पास-पास ही है, जिनकी आबादी करीब 400 के आसपास है। इन गांव तक जाने के लिए जिगना मेन रोड से अलग रास्ता है। लेकिन यह रास्ता पूरी तरह कच्चा है। बारिश के दिनों में मिट्टी व गड्ढे दलदल के रूप में तब्दील हो जाते हैं। जिससे इस रास्ते से आवागमन बुरी तरह प्रभावित रहता है। भारी वाहन जैसे ट्रैक्टर के अलावा अन्य वाहनों का आना जाना मुश्किल होता है।

ढीमरपुरा - आबादी के लिहाज से सबसे छोटा गांव लेकिन समस्या सबसे बड़ी। यहां करीब 150 लोग रहते हैं। शायद इसलिए जिम्मेदार अफसरों को इन लोगों की चिंता नहीं है। जिगना मेन रोड से ढीमरपुरा तक का रास्ता पूरी तरह जर्जर है। कच्चा होने के साथ गहरे गहरे गड्ढे हैं। कई जगह दो से तीन फीट तक गंदा पानी जमा है। इसलिए वाहन तो दूर, पैदल निकलने के लिए भी लोगों को पानी से होकर गुजरना पड़ता है।

हम नहीं कराते सड़क का निर्माण


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