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जीवन को प्रसन्नता से जीना चाहिए, मृत्यु को महोत्सव के रूप में मनाना चाहिए: बापू

राष्ट्रीय संत चिन्‍मयानंद बापू के प्रथम नगर आगमन पर गाजे- बाजे के साथ स्वागत किया गया। इस अवसर पर देवरी नगर को...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 04, 2018, 07:40 AM IST

जीवन को प्रसन्नता से जीना चाहिए, मृत्यु को महोत्सव के रूप में मनाना चाहिए: बापू
राष्ट्रीय संत चिन्‍मयानंद बापू के प्रथम नगर आगमन पर गाजे- बाजे के साथ स्वागत किया गया। इस अवसर पर देवरी नगर को दुल्हन की तरह सजाया गया। चिन्‍मयानंद बापू का भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं नगर पालिका के पूर्व उपाध्यक्ष अशोक साहू ने शाल श्रीफल भेंट कर स्वागत किया। श्रीमद् भागवत कथा के यजमान भगवान दास साहू उनकी प|ी खिलौना बाई साहू, पुत्र जगदीश साहू, अशोक साहू, गणेश साहू, बालचंद साहू, राजू साहू और गुड्डू साहू ने शाल श्रीफल भेंट कर चिन्‍मयानंद बापू का आशीर्वाद लिया।

इसके बाद भव्य कलश यात्रा शुरू हुई जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं और कन्याओं ने हिस्सा लिया। कलश यात्रा मुख्य मार्ग से होते हुए कार्यक्रम स्थल किला मैदान पहुंची। इस दौरान विमान द्वारा पुष्प वर्षा की गई। कलश यात्रा के बाद दोपहर 3 बजे से श्री चिन्‍मयानंद बापू की कथा प्रवचन आरंभ हुए। इस दौरान संगीतमय कथा में बापू ने अपने प्रवचनों में कहा कि हमारे जीवन का समाधान सिर्फ धर्म से ही हो सकता है। श्रीमद् भागवत कथा और श्रीरामचरितमानस दो ही ऐसे ग्रंथ हैं जिसमें जीवन की सभी समस्याओं का समाधान हो जाता है। बापू ने मनुष्य जीवन और मृत्यु के विषय में कहा कि एक बार मुनि नारद ने भगवान से कहा कि संत दर्शन से क्या लाभ है। तब भगवान ने कहा कि एक कीड़े के यहां उसके बच्चे ने जन्म लिया है। तुम जाकर उससे मिलो तब तुम्हें संत दर्शन के लाभ का पता चलेगा। जैसे ही नारद मुनि उस कीड़े के बच्चे के पास पहुंचे तो उसकी मृत्यु हो जाती है। उन्होंने भगवान से कहा हे भगवान ऐसा क्या हो गया कि कीड़े की मृत्यु हो गई। तब भगवान ने कहा अब तुम जाओ एक कुत्ते के यहां उसके बच्चे ने जन्म लिया है। तो तुम उससे जाकर संत दर्शन का लाभ पूछो, इसके बाद मुनि नारद कुत्ते के बच्चे के पास पहुंचते हैं। इसके बाद कुत्ते का बच्चा भी मर जाता है। नारद मुनि भगवान से बोलते हैं की कुत्ते का बच्चा भी मर गया। तब भगवान ने कहा कि एक गाय के यहां बछड़े ने जन्म लिया है। तुम वहां जाकर संत दर्शन का लाभ पूछो, जब नारद गाय के बछड़े के यहां जाते हैं। तो गाय का बछड़ा भी मर जाता है। तब नारद मुनि भगवान से पूछते हैं कि गाय का बछड़ा भी मर गया। तब भगवान ने मुनि नारद से कहा कि तुम अब जाओ एक राजा के राजकुमार ने जन्म लिया है।

उससे संत दर्शन का लाभ पूछो। नारद उस राजकुमार के पास गए और उससे पूछा कि संत दर्शन का क्या लाभ है। तब उस राजकुमार ने मुस्कुरा कर कहा की जब में कीड़े का बच्चा था और फिर कुत्ते का बच्चा, फिर गाय का बछड़ा था, तब में ही था इस मैं ने ही हर बार संत दर्शन किए तब जाकर आज मैंने राजा के राजकुमार के रूप में जन्म लिया। ये संत दर्शन का ही लाभ है। इसके बाद बापू ने कहा कि लोग मरने से डरते हैं। लेकिन जीवन को हमेशा प्रसन्नता से जीना चाहिए मृत्यु को महोत्सव के रूप में मनाना चाहिए। कथा श्रवण के दौरान रतन सिंग लोधी, बबलू जैन, अवनीश मिश्रा, राजेन्द्र मिश्रा, शिवराम चौरसिया, जगदीश चौरसिया, महिंद्र खल्ला, स्वप्निल गुप्ता, आशीष गुरु, राहुल रिछारिया, महिंद्र पलिया, गजेंद्र गुरु सहित सैकड़ों की संख्या में महिला- पुरुष शामिल हुए।

देवरीकलां। श्रीमद् भागवत कथा के पहले दिन नगर में भव्य कलश शोभायात्रा निकाली गई। इनसेट: प्रवचन देते चिन्मयानंद बापू।

भगवान पर जब भरोसा हो जाता है, तब भगवान से प्रेम हो जाता है

उन्होंने श्रीमद् भागवत की महिमा का वर्णन बताते हुए कहा भगवान की महिमा जाने बिना भरोसा नहीं किया जा सकता। भगवान पर जब भरोसा हो जाता है। तब भगवान से प्रेम हो जाता है। उन्होंने कहा कि जीवन में दो धाराएं हैं। जन्म और मृत्यु। जन्म को धन्य कर लें और मृत्यु का उत्सव मनाएं। जन्म लेने के बाद बच्चे को सब कुछ सीखना पड़ता है। लेकिन बच्चे को मां का दूध पीना कोई नहीं सिखाता क्योंकि जन्म लेने वाला बच्चा कई जन्म ले चुका होता है। उन्होंने कहा कि क्या भरोसा है इस जिंदगी का साथ देती नहीं किसी का बड़े- बड़े महापुरुष संतो को जिंदगी से विदा होना पड़ा है। हम सांसारिक जीवन में ठीक तरह से नहीं जी पा रहे हैं और ना ही ठीक तरह से मर पा रहे हैं। क्योंकि जीवन एक परीक्षा है और परीक्षा का नाम मौत है। जीवन जीने के बाद मृत्यु होना निश्चित है। इसलिए जीवन को ऐसे जियो कि बार-बार जीना ना पड़े और बार-बार मरना ना पड़े।

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Web Title: जीवन को प्रसन्नता से जीना चाहिए, मृत्यु को महोत्सव के रूप में मनाना चाहिए: बापू
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