--Advertisement--

हजारों क्विंटल गेंहूू बारिश में भीगा

देवरी के केसली विकासखंड में थावरी के चिखली जमुनिया गेहूं उपार्जन केंद्र पर किसानों का हजारों क्विंटल गेंहूू...

Danik Bhaskar | Apr 10, 2018, 04:10 AM IST
देवरी के केसली विकासखंड में थावरी के चिखली जमुनिया गेहूं उपार्जन केंद्र पर किसानों का हजारों क्विंटल गेंहूू बारिश में भीग गया। चिकली जमुनिया केंद्र शासन द्वारा लगभग 6 वर्षों से संचालित किया जा रहा है जहां 14 गांव के लोगों की गेहूं की फसल खरीदी जाती है। लेकिन इस बार इस केंद्र को बंद कर केसली के गायत्री वेयर हाउस में केंद्र बना दिया गया।

जानकारी के अनुसार चिकली जमुनिया केंद्र का उद्घाटन 1 अप्रैल को किया गया और एक किसान भगवान सिंह पिता हरगोविंद से करीब 110 क्विंटल गेहूं जमुनिया केंद्र पर ही खरीदा गया। लेकिन दूसरे ही दिन किसी अन्यत्र कारण के चलते उसको केसली के गायत्री वेयरहाउस में संचालित किया जाने लगा। जमुनिया के आसपास के 14 गांव के लोगों का खरीदी केंद्र है, फिर भी कुछ गांव के लोगों की सुविधा को देखते हुए केंद्र केसली में संचालित कर दिया। जमुनिया के किसानों द्वारा एसडीएम को ज्ञापन के माध्यम से अपनी बात रखी गई। उन्होंने बताया की किसानों के लिए संदेश के माध्यम से भी जमुनिया में खरीदी के लिए बुलाया गया, किसान जब खरीदी के लिए वहां पहुंचे तो वहां पर खरीदी नहीं हो रही थी और इसी बीच सोमवार को अचानक हुई बारिश से किसानों की करीब तीन हजार क्विंटल की फसल भीग गई।

आंधी चलने से छप्पर उड़े, कृषि उपज मंडी में बारिश से अफरातफरी मची

किसान बोले- एसएमएस आया अपनी उपज जमुनिया लेकर आए

किसान भागवत यादव ने बताया कि उनको एसएमएस आया है अपनी गेहूं की उपज जमुनिया लेकर आएं जिसका करीब 100 क्विंटल का पंजीयन है। इसी प्रकार प्रशांत यादव ने बताया कि गेहूं उपार्जन समिति से संदेश आया है कि गेहूं की फसल लेकर खरीदी केंद्र जमुनिया पर पहुंचे जिसके लिए करीब 90 क्विंटल का पंजीयन मेरे द्वारा कराया गया है। गेहूं खरीदी जमुनिया में ही की जाए।

जांच प्रतिवेदन उच्च अधिकारियों को भेज दिया है

इस संबंध में देवरी एसडीएम राकेश मोहन त्रिपाठी का कहना है कि किसानों के द्वारा जो ज्ञापन दिया गया मेरे द्वारा गांव जाकर 6 अप्रैल को जांच की गई और जांच प्रतिवेदन उच्च अधिकारियों को भेज दिया गया है। इस संबंध में जिला आपूर्ति नियंत्रक राजेंद्र सिंह ठाकुर का कहना है कि सरकार के नियमानुसार जहां खरीदी का स्थान तय हुआ है वहीं खरीदी की जाएगी।

खुरई | सोमवार की शाम को धूल भरी आंधी चलने से छप्पर उड़ गए। सिविल अस्पताल में लगा ग्रीन सीट छप्पर हवा से टूट गया। उसके टुकड़े जगह-जगह गिरे। इसी तरह कई स्थानों के छप्पर उड़ गए। बिजली भी गुल रही। करीब 2 घंटे बिजली गुल रहने से परेशानी हुई। आंधी के बाद बूंदाबांदी शुरू हो गई। जिससे कृषि उपज मंडी में अफरातफरी का माहौल बन गया। मंडी में करीब 6 हजार बोरा अनाज की आवक हुई थी। किसानों का अनाज खुले में फड़ पर तौल के लिए रखा था। आंधी, बारिश में किसान, व्यापारी परेशान होते रहे। गौरतलब है कि नई मंडी में अस्थाई टीन शेड में व्यापारियों की दुकानें बनी हैं। दुकानों के सामने कोई शेड नहीं है।

इस संबंध में जब खरीदी केंद्र का संचालन करने वाले प्रभारी रामनरेश मिश्रा से बात की तो उन्होंने बताया कि 6 साल से केंद्र जमुनिया में ही संचालित हो रहा है लेकिन मेरे उच्चाधिकारियों द्वारा मुझे दूर संचार के माध्यम से आदेशित किया गया आपको केसली के गायत्री वेयरहाउस में खरीदी करना है इसलिए 2 तारीख को ही मैंने केसली में खरीदी शुरू कर दी।

समिति जिम्मेदार


तेज हवाओं के साथ करीब 1 घंटे बारिश

किसान चितिंत, मंडी में रखी किसानों की उपज भीगी

भास्कर संवाददाता | राहतगढ़

सोमवार दोपहर से ही मौसम का मिजाज बदल गया। शाम को तेज हवाओं के साथ क्षेत्र में धूल भरी हवाएं चलीं। जिससे बिजली आपूर्ति करीब एक घंटा ठप्प रही। वहीं दो पहिया वाहन चालकों को हवाओं के साथ धूल उड़ने से परेशानी का सामना करना पड़ा।

इसी बीच तेज हवाओं के बाद लगभग एक घंटे बारिश हुई। जिससे लोगों को दिनभर की तपन से राहत मिली। वहीं मंडी में रखी गेंहूू की फसल भीग गई। जिससे किसान चिंतित दिखाई दिए क्योंकि बहुत से किसानों का गेंहूू अभी तौला नहीं गया है।

कृषि उपज मंडी में क्षेत्र के किसानों की गेहूं फसल उपज एवं समर्थन मूल्य पर सेवा सहकारी समितियों द्वारा खरीदा गया खुले में पड़ा हजारों क्विंटल गेहूं परिवहन ना होने से भीग गया। मंडी में क्षेत्र के कई ऐसे किसान हैं जिनका गेहूं की अभी तुलाई नहीं हुई है, और खुले में मंडी में पड़ा हुआ है। जो भीग गया है, ऐसे में किसानों की उपज का क्या होगा। ग्राम खिरिया के किसान जसवंत सिंह लोधी ने बताया कि किसानों के गल्ले में रखी उपज बारिश से भीग गई।

समितियों के माध्यम से 15 दिन पहले समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरू की गई थी। चार- पांच दिन तो तुलाई बंद रही। इन चार- पांच दिनों में करीब 5000 हजार कुंटल की खरीदी हो जाती, जिससे छोटे किसान अपनी उपज की तुलाई से फ्री हो जाते।