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कंडों की होली जलाकर पर्यावरण बचाने का संदेश दिया, खातेंगांव में जीवंत झांकी देखने पहुंचे लोग
नगर के विभिन्न क्षेत्रों में होलिका दहन किया गया। इससे पहले महिलाआें ने परंपरानुसार टोलियों के रूप में होली दहन स्थानों पर पहुंचकर होली के गीत गाकर होलिका की पूजा-अर्चना की। गोबर से निर्मित बरगुलियों की मालाएं व विभिन्न खाद्य सामग्रियां चढ़ाई। परिवार के सुख, समृद्धि व शान्ति की प्रार्थना की।
नगर में सार्वजनिक रूप से एमजी रोड बजरंग चौराहे पर होली का दहन परम्परा अनुसार नगर पटेल द्वारा किया गया। वहीं सोमवारिया, लक्ष्मीबाई मार्ग, प्रगति नगर, कालीसिंध मार्ग, महावीर मार्ग, रविदास मार्ग, कबीर मार्ग, गढ़ी आदि क्षेत्रों में समिति के प्रमुख लोगों द्वारा पूजा-अर्चना के बाद होली का दहन किया गया। दहन से पूर्व होली पूजन के अवसर पर अधिकांश स्थानों पर विद्युत सज्जा की गई व होली के गीत बजाए गए। उधर ग्राम सांवेर में खेड़ापति मंदिर के सामने होलिका के आसपास आकर्षक सज्जा की गई।
गाेला में हाेली की पड़वा पर लगेगा एक दिवसीय मेला
देवगढ़ | ग्राम पंचायत गाेला में हाेली की पड़वा पर एक दिवसीय मेला अायाेजित किया जाएगा। इसी दिन शाम 5 बजे गल महाराज काे घुमाया जाएगा। चैनसिंह पड़ियार डाेकरखेड़ा वाले की पीठ में लाेहे का हुक लगाकर घुमाया जाएगा। यह नजारा देखने अासपास के गांवाें के ग्रामीण पहुंचेंगे।
खातेगांव
बागली में फारूख भाई 20 वर्षाें से सजा रहे हैं हाेली
खातेगांव | नगर के राम मंदिर मार्ग पर दहन के पूर्व होलिका दहन की जीवंत झांकी प्रस्तुत की गई। प्रजापति ब्रम्हकुमारी की ओर से रानी पाल होलिका के रूप में और बालक यथार्थ भक्त प्रह्लाद के रूप में प्रस्तुत हुए। होलिका दहन पर जीवंत झांकी का नगर में पहला प्रयास किया गया, जिसे देखने के लिए कई सारे लोग देर रात तक आते रहे। बड़ी संख्या में महिलाओं ने होलिका का पूजन किया। नगर में कई जगह होलिका दहन का कार्यक्रम हुआ।
साेनकच्छ में हाेली का पूजन करती महिलाएं।
बागली | नगर में लगभग सभी त्योहार सांप्रदायिक सौहार्द के साथ मनाए जाते हैं। जब बात ईनाणी चौराहे पर होलिका दहन की आती है तो सभी को जाना-पहचाना चेहरा फारूख भाई हार वाले का नाम याद आ जाता है। वे पिछले 20 वर्षों से ईनाणी चौराहे की होलिका दहन की व्यवस्थाओं का जिम्मा उठाए हुए हैं। होलिका दहन से वे वैसे तो कई वर्ष से जुड़े थे। लेकिन लगभग 20 वर्ष पहले होलिका दहन की व्यवस्थाओं में कमी आने के बाद उन्होंने दहन की व्यवस्थाओं का जिम्मा उठा लिया। इसके लिए वे स्थानीय दुकानदारों से सहयोग भी लेते हैं। महिलाओं द्वारा होलिका पूजन की व्यवस्था भी विशेष रूप से करते हैं। होली के दिन वे दहन के बाद ही अपने घर जाते हैं। फारुख भाई का कहना है त्याेहार भाईचारे का है। रंगों से मन की कड़वाहट दूर होती है। फारुख भाई होलिका दहन की पूरी रात जागते हैं। इधर मंगलवार सुबह गेर निकलेगी जो नगर के शोक संतप्त परिवार के यहां जाकर रंग-गुलाल करेगी।