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उत्पाद बेचने में अा रही थी दिक्कत, जिला पंचायत में खाेला स्टाेर, समूह की महिलाओं को ही मिलता है 10 प्रतिशत लाभ

एक वर्ष पहले
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ग्रामीण अाजीविका मिशन ने छह ब्लाॅक की 560 ग्रामीण महिलाअाें काे अात्मनिर्भर बनाने के लिए उनके समूहाें काे लाेन दिलाया। महिलाएं घर से ही साबुन, सर्फ, अगरबत्ती, वर्मी बैग, पेसिंल, फाइल फोल्डर, पेपर बैग, सेनेटरी पैड, मिट्‌टी के बर्तन, जग, कुल्हड़, ग्लास, जग, चूड़ी, झाडू, बांस की टोकरी जैस उत्पाद बनाने लगीं, लेकिन कई महिलाअाें काे ये उत्पाद बेचने में दिक्कतें अा रही थी। उनकी परेशानी काे कम करने के लिए चार महीने पहले जिला पंचायत अाॅफिस में एक अाजीविका स्टाेर खाेल दिया गया। अब महिलाअाें के बनाए उत्पाद स्टाेर में रखे जाते हैं, यहां से बेचे जाते हैं। 10 प्रतिशत लाभ महिलाअाें काे दिया जाता है।

आजीवीका मिशन की जिला मैनेजर दीप्ति जाधव ने बताया स्वसहायता समूह की महिलाएं जो सामान बनाती है, उनका सामान हमारे आजीवीका स्टोर में आता है। स्टोर पर माया पट्‌टा सुबह 9 से शाम 6 बजे तक बैठती हैं, जो भी लोग आते हैं, उन्हें सामान बेचती हैं। साथ ही यह सामान सरकारी कार्यालयों में सेल होता है। बाजार में मांग होती है वहां भी भिजवा देते हैं। महिलाअाें के प्राेडक्ट का हिसाब रखते हैं अाैर मुनाफे की राशि उन्हें भेजते हैं। देवास, खातेगांव, सोनकच्छ, बागली, कन्नौद, टोंकखुर्द में अलग अलग सामान निर्धारित किया है। सामान बनाकर महिलाएं आजीविका स्टोर देवास में देकर जाती हैं। फिर यहां से उनको पैसा मिलता है। जिला पंचायत सीईओ शीतला पटले ने बताया स्टाेर से आजीविका मिशन से 45 समूह की 560 महिलाएं जुड़ी हैं जो सभी ग्रामीण हैं। अब जागरुक हैं। कहीं भी किसी भी सरकारी कार्यालय में जाकर अपनी बात रख सकती हैं। अच्छा बुरा समझती हैं। सम्मान के साथ अपना जीवन जीने के साथ घर संचालित कर रही हैं। 10 से 20 हजार महीना कमा रही हैं।

महिलाअाें के संघर्ष की कहानी

{गुर्जर बापचा की रुबीना बी की शिक्षा 9वीं है। उनका कहना है आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। मजदूरी करती थी। आजीवीका मिशन से 2017 में समूह के माध्यम से जुड़ी। कपड़े सिलती हूं। सरकारी स्कूलों के कपड़े बनाने का काम भी मिला था।

{टोकखुर्द कलमा की दुर्गाबाई 8वीं तक पढ़ी हैं। 7 दिन का पशु सीआरपी एवं टीएचआर कंपनी से संबंधित प्रशिक्षण लिया। फिर समूह बनाकर काम चालू किया।

{महूखेड़ा की सुनीता गोस्वामी 12वीं पास हैं। कृषि सखी का 7 दिन का प्रशिक्षण लिया। जैविक खाद बनाकर आजीवीका मिशन के माध्यम से बेच रही है। कहती हैं-अच्छा पैसा मिलने लगा।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस आज, छह ब्लॉक की 560 महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर

स्टाेर पर महिलाअाें द्वारा तैयार सामग्री बेची जा रही है।
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