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सीबीआई तो पकड़ने में नाकाम, खुद सरेंडर कर रहे रसूखदार

प्री मेडिकल टेस्ट (पीएमटी) 2012 मामले में चालान पेश हुए दो महीने से ज्यादा वक्त बीत जाने के बाद भी सीबीआई किसी भी...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 03, 2018, 02:00 AM IST

प्री मेडिकल टेस्ट (पीएमटी) 2012 मामले में चालान पेश हुए दो महीने से ज्यादा वक्त बीत जाने के बाद भी सीबीआई किसी भी रसूखदार आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। सीबीआई को पीपुल्स ग्रुप के चेयरमैन सुरेश एन विजयवर्गीय, डायरेक्टर कैप्टन अंबरीश शर्मा, एलएन मेडिकल के जयनारायण चौकसे व इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के सुरेश भदौरिया की तलाश है, लेकिन गिरफ्तारी किसी की भी नहीं हो सकी।

अब सीबीआई ने आरोपियों के पासपोर्ट की जानकारी मांगी है। पासपोर्ट डिटेल लेकर विदेश मंत्रालय काे भेजी जाएगी ताकि कोई भी आरोपी देश के बाहर न जा सके। हालांकि बड़ा सवाल यह है कि जो आरोपी देश के बाहर जा चुके हैं उनके संबंध में क्या कार्रवाई होगी।

आरोपी कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए तो भगोड़ा घोषित कर संपत्ति होगी कुर्क

सीबीआई धारा 82 के तहत अदालत में आवेदन पेश कर आरोपियों को कोर्ट में एक तारीख और समय पर पेश होने का आदेश करेगी। यदि आरोपी उपस्थित नहीं होते है तो उन्हें फरार घोषित कर उनके धारा 83 में फरार आरोपी को भगोड़ा घोषित करवाकर उसकी संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई भी की जा सकती है। फरार आरोपियों के पास गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट जाने के रास्ता खुला हुआ है। खास बात यह कि 6 दिसंबर को हाईकोर्ट चिरायु के गोयनका, एलएन मेडिकल के चौकसे और डॉ. सत्पथी की अग्रिम जमानत अर्जी पर सीनियर एडवोकेट ने दलील दी थी कि जमानत दें, हम सहयोग के लिए तैयार हैं। इस पर चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता ने जमानत अर्जी नामंजूर करते हुए कहा था कि सहयोग करना है तो अब तक सरेंडर क्यों नहीं किया।

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