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नर्मदा में डूब रहे दो जूनियर्स को बचाने में इंजीनियर छात्र की मौत

एरोड्रम थाना क्षेत्र के पल्हर नगर में रहने वाले एक इंजीनियर छात्र की महेश्वर में नर्मदा की सहस्त्रधारा में डूबने...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 02:20 AM IST

नर्मदा में डूब रहे दो जूनियर्स को बचाने में इंजीनियर छात्र की मौत
एरोड्रम थाना क्षेत्र के पल्हर नगर में रहने वाले एक इंजीनियर छात्र की महेश्वर में नर्मदा की सहस्त्रधारा में डूबने से मौत हो गई। छात्र अपने कॉलेज के जूनियर छात्रों के साथ सहस्त्रधारा देखने गया था। हादसा तब हुआ जब तीनों छात्र पत्थरों पर चलकर सहस्त्रधारा में पहुंचे थे। इसी दौरान एक पैर फिसल गया। उसे बचाने के लिए दूसरा छात्र कूदा, लेकिन वह भी डूबने लगा। दोनों को बचाने के लिए तीसरा छात्र नदी में उतरा। दोनों छात्र तो बच गए, लेकिन इसी दौरान बचाने के लिए गया तीसरा छात्र तेज बहाव में चला गया। एक दिन तक तो उसका कुछ पता नहीं चला। दूसरे दिन डैम से पानी छोड़ा गया तो उसका शव नदी के किनारे पर कुछ किलोमीटर दूर मिला। पोस्टमॉर्टम के बाद शनिवार को शव इंदौर पहुंचा और परिजन को सौंपा।

सहस्त्रधारा में पत्थरों पर चलकर जा रहे थे, तभी एक का फिसला पैर

महेश्वर पुलिस के मुताबिक छात्र का नाम अंकुश पिता पीके सक्सेना (21) है। अंकुश के पिता सीनियर एडवोकेट हैं और मां भी न्यायालय में रीडर हैं। अंशुल के दोस्तों ने बताया कि जूनियर छात्रों ने गुरुवार को उसके लिए महेश्वर में किले पर पार्टी रखी थी, लेकिन राज्यपाल का दौरा होने से किले पर नहीं जा सके। अंकुश के साथ मृणाल और विवेक सहस्त्रधारा देखने के लिए चले गए। सहस्त्रधारा में वे पत्थरों पर चलकर नदी के बीच पहुंचे थे। इसी दौरान मृणाल का पैर फिसला तो उसे बचाने के लिए विवेक नदी में कूदा। लेकिन दोनों डूबने लगे तो उन्हें बचाने के लिए अंकुश नदी में कूदा। मृणाल और विवेक तो बच गए लेकिन तेज बहाव होने से गहराई में चला गया और डूब गया।

वकील पिता बोले - सहस्त्रधारा के पास न सुरक्षा के इंतजाम न संकेतक

शनिवार सुबह उसका शव एरोड्रम स्थित पल्हर नगर लाया गया। जहां पूरा परिवार गमगीन था। पिता ने बताया वही परिवार का इकलौता सहारा था। उससे बड़ा बेटा अंकित है जो दिव्यांग हैस लेकिन वह भी बीएससी की पढ़ाई कर रहा है। एडवोकेट सक्सेना ने कहा कि महेश्वर में सहस्त्रधारा के जिस स्थान पर उनके बेटे की जान गई है वहां लोगों को जागरूक करने के लिए न सुरक्षा के इंतजाम हैं और न ही सचेत करने वाले संकेतक। ऐसे में कई लोग धारा में कम पानी देखकर उतर जाते हैं और गड्ढों की गहराई समझ न आने से डूब जाते हैं।

साइकलिंग में खेल चुका था नेशनल लेवल तक

हालही में अंकुश ने बीई मेकेनिकल की पढ़ाई पूरी की थी। उसने पढ़ाई के दौरान अपनी रिसर्च कर ईको साइकिल पर एक विशेष प्रोजेक्ट बनाया था जिसके लिए उसे उसके चमेली देवी कॉलेज की ओर से और पंजाब के एजुकेशनल इंस्टिट्यूट ने भी सम्मानित किया था। अंकुश साइकलिंग में भी नेशनल लेवल तक खेल चुका है।

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