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विश्वविद्यालयों ने कहा- सरकार के पोर्टल से नहीं होंगे शिक्षण विभागों में एडमिशन, हम खुद ही देंगे दाखिले

बीयू सहित 12 अन्य विश्वविद्यालय के शिक्षण विभागों में संचालित पाठ्यक्रमों में एडमिशन उच्च शिक्षा विभाग के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 02:20 AM IST

बीयू सहित 12 अन्य विश्वविद्यालय के शिक्षण विभागों में संचालित पाठ्यक्रमों में एडमिशन उच्च शिक्षा विभाग के ई-प्रवेश पोर्टल से नहीं होंगे। विश्वविद्यालयों ने विभाग के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। विश्वविद्यालयों ने साफ कहा है कि अपने शिक्षण विभागों में वे खुद ही पूर्व की तरह एडमिशन करेंगे।

विभाग ने विश्वविद्यालयों को ई-प्रवेश पोर्टल के माध्यम से ही टीचिंग डिपार्टमेंट्स में एडमिशन कराने का प्रस्ताव दिया था। इसके पीछे दलील थी कि छात्रों को एक बार ही फॉर्म और फीस भरनी होगी। इससे छात्रों का पैसा और समय दोनों बचेगा। जबकि विश्वविद्यालयों तकनीकी रूप से समस्याएं आने की बात कहकर प्रस्ताव को वापस कर दिया है। शासन के प्रस्ताव के तहत यह व्यवस्था प्रदेश के 13 विश्वविद्यालयों में लागू होनी थी।

बैठक में हुआ था निर्णय : विवि समन्वय समिति की बैठक में लिए गए निर्णय और फरवरी में आयोजित कार्यशालाओं में हुई चर्चा के आधार पर छात्रहित में यह फैसला किया गया था यूटीडी में संचालित पाठ्यक्रमाें में एडमिशन शासन के ई-प्रवेश पोर्टल से ही होंगे।

उच्च शिक्षा विभाग अभी इस पोर्टल के माध्यम से प्रदेश के 1321 सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों में संचालित पाठ्यक्रमों में एडमिशन करा रहा है।

वर्तमान में ई-प्रवेश पोर्टल के माध्यम से उच्च शिक्षा विभाग करा रहा है 1321 कॉलेजों में एडमिशन

इसके पीछे शासन ने यह दी थी दलील

छात्रों को एक बार ही आवेदन और फीस जमा करनी होती।

छात्र कॉलेजों की तर्ज पर विश्वविद्यालयों कोर्स को प्राथमिकता के अनुसार चुन सकेंगे।

एक ही प्लेटफॉर्म से एडमिशन की प्रक्रिया पूरी हो जाती और छात्रों को भटकना नहीं पड़ता।

विश्वविद्यालयों को मेरिट के आधार पर बेहतर छात्र मिलते।

ईसी का है फैसला, शासन को दे दी है सूचना

बीयू के डिप्टी रजिस्ट्रार अकादमिक शाखा अजीत श्रीवास्तव के अनुसार विवि की कार्यपरिषद का फैसला है कि यूटीडी में एडमिशन विवि अपने स्तर पर ही करेगा। ईसी के इस फैसले की सूचना उच्च शिक्षा विभाग को दे दी गई है। उधर, सूत्रों की मानें तो ईसी ने यह निर्णय विभागाध्यक्षों के फीडबैक के बाद लिया है।

विश्वविद्यालयों के तर्क

विवि को ऑटोनॉमी इसीलिए दी गई है कि वो अपने हिसाब से एडमिशन कर सकें।

उच्च शिक्षा विभाग दो से तीन महीने तक छात्रों का डेटा नहीं भेजता है। इससे परेशानी होती है।

एडमिशन के दौरान शासन के कॉल सेंटर काम नहीं करते हैं।

कियोस्क के माध्यम से फॉर्म भरवाए जाते हैं। ऐसे में छात्रों को कई बार अधिक पैसा देना पड़ता है।

विश्वविद्यालयों में अलग तरह के कोर्स पढ़ाए जाते हैं।

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