Hindi News »Madhya Pradesh News »Dhar News» सुप्रीम कोर्ट में पहली बार रोस्टर सिस्टम लागू; सभी जनहित याचिकाएं चीफ जस्टिस सुनेंगे, संविधान पीठ तय करने का अधिकार भी उनके ही पास

सुप्रीम कोर्ट में पहली बार रोस्टर सिस्टम लागू; सभी जनहित याचिकाएं चीफ जस्टिस सुनेंगे, संविधान पीठ तय करने का अधिकार भी उनके ही पास

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 02:20 AM IST

काम के बंटवारे को लेकर चार जजों के नाराजगी जताने के बाद सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था बदल गई है। गुरुवार को चीफ जस्टिस...
काम के बंटवारे को लेकर चार जजों के नाराजगी जताने के बाद सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था बदल गई है। गुरुवार को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने काम के बंटवारे का राेस्टर जारी किया। इसमें तय किया गया है कि कौन-से जज के पास किस सब्जेक्ट के केस जाएंगे। 5 फरवरी से अमल में आने वाला यह रोस्टर सिस्टम सुप्रीम कोर्ट में पहली बार लागू होगा। अभी तक चीफ जस्टिस की सलाह से रजिस्ट्री ही केस आवंटित करती थी। शेष|पेज 4 पर



चीफ जस्टिस ने यह रोस्टर कोर्ट की वेबसाइट के जरिये सार्वजनिक किया। पुराने मामले नई व्यवस्था से बेअसर रहेंगे। नया रोस्टर सुप्रीम कोर्ट के प्रशासन पर सवाल उठाने वाले चारों जजों के लिए झटके के तौर पर देखा जा रहा है। अब सभी जनहित याचिकाओं पर सिर्फ चीफ जस्टिस की बेंच ही सुनवाई करेगी। संविधान पीठ में कौन-कौन से जज शामिल होंगे, यह तय करने का अधिकार भी चीफ जस्टिस के पास ही रहेगा। उल्लेखनीय है कि 12 जनवरी को जस्टिस जे चेलमेश्वर, रंजन गोगोई, मदन बी लोकुर और कुरियन जोसेफ ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा पर काम के बंटवारे में भेदभाव का आरोप लगाया था। इन्होंने संविधान पीठ में भी सिर्फ पहले पांच वरिष्ठ जजों को ही रखने की मांग की थी।

पुराना सिस्टम

चीफ जस्टिस की सलाह से रजिस्ट्री बांटती थी काम

काम आवंटन का कोई क्राइटेरिया नहीं था। चीफ जस्टिस की सलाह से रजिस्ट्री केस बांटती थी। सिर्फ चीफ जस्टिस ही जानते थे कि किसके पास कैसे मामले हैं। वह अपनी मर्जी से किसी के भी पास जनहित याचिका भेज सकते थे।

नई व्यवस्था

क्राइटेरिया तय हुआ, किसके पास जाएगा कौन-सा सब्जेक्ट

व्यवस्था पारदर्शी हो गई। सबको पता होगा कि किस सब्जेक्ट की सुनवाई कौन-सी बेंच करेगी। जनहित याचिकाओं पर सुनवाई सिर्फ चीफ जस्टिस की बेंच ही करेगी। यह सिस्टम कई हाईकोर्ट में पहले से लागू है।

सुप्रीम कोर्ट के पांच सीनियर जजों के बीच इस तरह बंटेगा काम

जनहित याचिकाएं चीफ जस्टिस के पास: रोस्टर सिस्टम के तहत सभी जनहित याचिका, लेटर पिटीशन, बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका, आपराधिक, अवमानना, सिविल, जांच आयोग, कानूनी अधिकारियों की नियुक्ति, सामाजिक न्याय, संवैधानिक, सर्विस, चुनाव, आर्बिट्रेशन, संवैधानिक नियुक्तियों से जुड़े मामले चीफ जस्टिस की कोर्ट में।

कॉन्फ्रेंस करने वाले जजों के पास ऐसे सब्जेक्ट मैटर

जस्टिस जे चेलमेश्वर: श्रम, अप्रत्यक्ष कर, भूमि अधिग्रहण, मुआवजा, अपराध, साधारण सिविल, साधारण धन एवं गिरवी संपत्ति केस, न्यायिक अधिकारियों व कोर्ट कर्मचारियों से जुड़े मामले, भूमि एवं कृषि कानून, कब्जा छुड़ाने और उपभोक्ता संरक्षण संबंधी केस।

जस्टिस रंजन गोगोई: श्रम, अप्रत्यक्ष कर, कंपनी लॉ, सेबी, ट्राई, आरबीआई, अपराध, अवमानना, पर्सनल लॉ, धार्मिक-प्राचीन मामले, बैंकिंग, धन-गिरवी संपत्ति, स्टेट एक्साइज, सरकारी कांट्रेक्ट, न्यायिक अधिकारियों व कोर्ट कर्मचारियों और लाइसेंस विवाद के केस। शेष|पेज 4 पर

जस्टिस मदन बी लोकुर: भूमि अधिग्रहण, नौकरी, वन, वन्य जीवन, पर्यावरण असंतुलन, सामाजिक न्याय, साधारण सिविल केस, पर्सनल लॉ, धार्मिक एवं प्राचीन मामले, खदान, खनिज तत्व, भूमि कानून, उपभोक्ता संरक्षण और सशस्त्र बलों से जुड़े केस।

जस्टिस कुरियन जोसेफ: श्रम, किराया, नौकरी, अपराध, परिवार कानून, अवमानना, पर्सनल लॉ, धार्मिक एवं प्राचीन संपत्ति और भूमि कानून संबंधी केस।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Dhar News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: सुप्रीम कोर्ट में पहली बार रोस्टर सिस्टम लागू; सभी जनहित याचिकाएं चीफ जस्टिस सुनेंगे, संविधान पीठ तय करने का अधिकार भी उनके ही पास
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

Stories You May be Interested in

      रिजल्ट शेयर करें:

      More From Dhar

        Trending

        Live Hindi News

        0
        ×