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सोयाबीन, कपास का निर्यात जोखिम भरा

इंदौर| भारत से चाहे जैविक खाद्य निर्यात में तेज गति से वृद्धि हो रही हो, किंतु सोयाबीन एवं कपास का निर्यात काफी...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 02:25 AM IST

इंदौर| भारत से चाहे जैविक खाद्य निर्यात में तेज गति से वृद्धि हो रही हो, किंतु सोयाबीन एवं कपास का निर्यात काफी जोखिम भरा कहा जा सकता है, जिसमें सुधार की काफी गुंजाइश है। निर्यातक चलती गाड़ी में बैठकर लाभ कमाने में लगे हुए है। ऐसे निर्यात से किसी दिन भारत की साख पर बट्‌टा लग सकता है। निर्यात करने में ऐसे तत्व सम्मिलित हो गए हैं जिनका रुपया कमाना एक मात्र उद्देश्य है।

वर्ष 2015-16 एवं 2016=17 में जैविक खाद्य के निर्यात में 25 प्रतिशत की तेजी आई है। निर्यात 24.78 अरब रुपए तक पहुंच गया है। यह सही है कि कृषि निर्यात में 1 प्रतिशत से भी कम वृद्धि हुई है। वर्षों से दालें, शक्कर, गेहूं, खाद्य तेलों के निर्यात पर प्रतिबंध लगे हुए थे। हाल में शकर, दालों का निर्यात खोला है, किंतु इनका निर्यात संभव नहीं है। देश से सर्वाधिक निर्यात कपास एवं सोयाबीन का हो रहा है। जैविक पद्धति से उपरोक्त जिंसों का उत्पादन नहीं के समान हो रहा है। वास्तविक रूप से जांच की जाए तो पोल खुल जाएगी। किसानों से बेस्ट क्वालिटी का सोयाबीन खरीदकर ग्रेडिंग किया जाता है और जैविक के नाम से विदेशों में बेचा जा रहा है। वहां पर भी जांच में सही पाया जा रहा है।

यही स्थिति कपास की है। फिर भी निर्यात किए जाने वाले सोयाबीन को जैविक नहीं कह सकते हैं। जैविक खाद्य पदार्थों का अधिकांश निर्यात अमेरिका, यूरोपीय संघ और कनाड़ा को होता है। कई एजेंसियां सत्यापन में बाधा बताने लगी है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने एक सूचना में कहा है कि अगर किसी उत्पाद को सत्यापित नहीं किया है तो उस पर जैविक की छाप नहीं लगाई जा सकती है।

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