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जॉब ट्रेंड्स स्टार्टअप जॉब में स्थिरता न होने के

Dhar News - जॉब ट्रेंड्स स्टार्टअप जॉब में स्थिरता न होने के कारण एंप्लॉई का घटता रुझान विभिन्न सर्वे में यह बात...

Dainik Bhaskar

Mar 02, 2018, 02:40 AM IST
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 स्टार्टअप जॉब में स्थिरता न होने के

जॉब ट्रेंड्स

स्टार्टअप जॉब में स्थिरता न होने के कारण एंप्लॉई का घटता रुझान

विभिन्न सर्वे में यह बात सामने आ चुकी है कि स्टार्टअप में काम कर रहे एंप्लॉई को जॉब सिक्योरिटी का डर होता है। हाल ही में किए गए सर्वे में 90 फीसदी से ज्यादा एंप्लॉई ने माना कि यदि उन्हें बड़े अौर स्थापित संस्थानों में जॉब मिले, तो वे अपना स्टार्टअप जॉब छोड़ने को तैयार हैं। जॉब में स्थिरता न होना इसका बड़ा कारण है।

स्टार्टअप में काम कर रहे 90 फीसदी से ज्यादा एंप्लाई बड़े संस्थानों में करना चाहते हैं जॉब

हाल ही में एंप्लाॅई पर किए गए एक सर्वे में यह बात सामने आई है कि ज्यादातर एंप्लॉई बड़े संस्थानों में जॉब करने के लिए स्टार्टअप की जॉब छोड़ने को तैयार हैं। सर्वे में शामिल प्रत्येक 10 में से 9 एप्लॉई ने बड़े संस्थान की जॉब के लिए स्टार्टअप का जॉब छोड़ने की बात कही है। इस सर्वे में 1250 एप्लॉई को शामिल किया गया था। इसमें से सिर्फ 8 फीसदी एंप्लॉई ही ऐसे थे, जिन्होंने बड़े संस्थान के जॉब ऑफर के लिए स्टार्टअप की जॉब न छोड़ने की बात कही है। हालांकि यह पहली बार नहीं जब किसी सर्वे के ऐसे नतीजे आए हों। इससे पहले भी विभिन्न सर्वे में यह बात सामने आती रही है कि ज्यादतर एंप्लॉई स्टार्टअप की जॉब का बजाय बड़े संस्थानों को वरीयता देते हैं।

मिड्ल लेवल के एंप्लॉई कम

पिछले कुछ वर्षों में स्टार्टअप कल्चर के विस्तार के बावजूद स्टार्टअप अपनी विश्वसनीयता बनाने में नाकामयाब रहे हैं। सर्वे के अनुसार मिड्ल लेवल एंप्लॉई की अपेक्षा सीनियर और जूनियर स्तर के ज्यादा एंप्लॉई बड़े संस्थानों के लिए अपना स्टार्टअप की जॉब छोड़ने को तैयार हैं। सर्वे में शामिल मिड्ल लेवल के 52 फीसदी एंप्लॉई ही अपनी स्टार्टअप की जॉब छोड़ने को तैयार हैं। यह आंकड़ा औसत से काफी कम है। इसके बजाय स्टार्टअप में जॉब कर रहे जूनियर और सीनियर स्तर के 75 फीसदी एंप्लॉई बड़े संस्थानों में जॉब करने के लिए तैयार हैं। वहीं शहरों के लिहाज से देखें तो मेट्रो शहरों के स्टार्टअप में काम कर रहे 90 फीसदी और टियर-1 और टियर-2 शहरों के 96 फीसदी एंप्लॉई स्थापित संस्थानों में जॉब करने के लिए अपनी जॉब छोड़ने को तैयार हैं।

वर्क लाइफ बैलेंस व जॉब सिक्योरिटी है वजह

प्रत्येक 10 में से 4 एंप्लॉई ने खराब वर्क लाइफ बैलेंस को जॉब छोड़ने का सबसे बड़ा कारण बताया है। जबकि 20 फीसदी एंप्लॉई को यह उम्मीद होती है कि उन्हें बड़ी और स्थापित कंपनी में बेहतर पैकेज मिलेगा। हालांकि 30 फीसदी एंप्लॉई ऐसे भी हैं जो जॉब सिक्योरिटी की वहज से स्टार्टअप छोड़ना चाहते हैं। इसके अलावा 5 फीसदी एंप्लॉई को स्टार्टअप मंे किसी भी प्रकार की कॅरिअर ग्रोथ नजर नहीं आती है। वहीं 5 फीसदी एंप्लॉई ऐसे भी हैं जो बेहतर स्टेटस न मिल पाने की वजह से स्टार्टअप की जॉब छोड़ना चाहते हैं।

नए वेंचर का उत्साह है जुड़ने का बड़ा कारण

सर्वे में शामिल 55 फीसदी एंप्लॉई का कहना था कि नए वेंचर को बड़े स्तर तक ले जाने के िवचार से उन्होंने स्टार्टअप में जॉब की थी। इसके अलावा 20-20 फीसदी एंप्लॉई ऐसे थे जिन्होंने बेहतर वर्क कल्चर और अच्छे सैलरी पैकेज की वजह से स्टार्टअप में जॉब करने का विकल्प चुना था। ऐसा पहले भी देखने में आया है कि स्टार्टअप द्वारा ज्यादा सैलरी पैकेज ऑफर किया जाता है, लेकिन बाद में वे इसे देने में नाकाम रहते हैं। आईआईटी संस्थानों में इससे पहले भी ऐसे कई मामलों के चलते स्टार्टअप को प्लेसमेंट में बैन किया गया था। हालांकि, अब यह बैन हटा लिया गया है।

जॉइन करने से पहले वेंचर फेल होने का डर

कर्मचारियों को स्टार्टअप में जाॅब का विकल्प चुनने से पहले इसके फेल होने का सबसे ज्यादा डर रहता है। सर्वे में शामिल 60 फीसदी एंप्लॉई को स्टार्टअप में जाॅब का ऑफर लेने से पहले इसके फेल होने का डर रहता है। वहीं 35 फीसदी एंप्लॉई ऐसे जिन्हें एक से ज्यादा जॉब रोल मिलने की चिंता रहती है।

काउंसलिंग कॉर्नर

छात्रों के सवाल और काउंसलर के जवाब

प्रश्न : एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में क्या पढ़ाया जाता है। इसके कोर्स में प्रवेश लेने के लिए क्या योग्यताएं होनी चाहिए?

उत्तर: एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में मिलिट्री एयरक्राफ्ट, स्पेसक्राफ्ट, सैटेलाइट और इसके पार्ट की डिजाइन तैयार करना, बनाना और मेंटेनेंस के बारे में पढ़ाया जाता है। फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स से 12वीं कर चुके छात्र इसके बीई या बीटेक कोर्स में प्रवेश ले सकते हैं। इसके लिए जेईई मेन का वैलिड स्कोर जरूरी होता है। कुछ संस्थान प्रवेश के लिए खुद का एंट्रेंस टेस्ट आयोजित करते हैं। बीई, बीटेक या संबंधित स्ट्रीम से एमएससी करने वाले छात्र इसके एमटेक कोर्स में प्रवेश ले सकते हैं।



प्रश्न: मैं फार्मास्युटिकल मैनेजमेंट का कोर्स करना चाहता हूं। इसके लिए क्या योग्यताएं जरूरी हैं? किन संस्थानों से इसका कोर्स किया जा सकता है।

उत्तर : 50 फीसदी अंकों के साथ किसी भी स्ट्रीम से बैचलर डिग्री कर चुके छात्र फार्मास्युटिकल मैनेजमेंट के एमबीए प्रोग्राम में प्रवेश ले सकते हैं। अधिकांश संस्थानों में प्रवेश कैट, मैट, ज़ैट, जीमैट या एटीएमए के वैलिड स्कोर के आधार पर मिलता है। कुछ संस्थान खुद का एंट्रेंस टेस्ट भी आयोजित करते हैं। इसके डिप्लोमा और पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा प्रोग्राम भी हैं। नरसी मोनजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज़ मुंबई, जामिया हमदर्द यूनिवर्सिटी दिल्ली, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मैनेजमेंट रिसर्च जयपुर से इसका कोर्स कर सकते हैं।



प्रश्न : डिजास्टर मैनेजमेंट कोर्स में प्रवेश के लिए क्या योग्यताएं हैं? किन संस्थानों इसका कोर्स करना बेहतर होगा?

उत्तर : किसी भी स्ट्रीम से बैचलर डिग्री कर चुके छात्र डिजास्टर मैनेजमेंट के एमबीए कोर्स में प्रवेश ले सकते हैं। इसके लिए 50 फीसदी अंक होना जरूरी है। इसके अलावा छात्र इसके डिप्लोमा या सर्टिफिकेट कोर्स में प्रवेश ले सकते हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट दिल्ली, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इकोलॉजी एंड एनवायरनमेंट दिल्ली, सिक्किम मणिपाल यूनिवर्सिटी और इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी दिल्ली जैसे संस्थानों से इसका कोर्स किया जा सकता है।

सवाल और सुझाव के लिए एसएमएस कीजिए... 9200012345 पर या ई-मेल कीिजए education@dbcorp.in



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