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आगामी दिनों में ग्रामीण इलाकों में कपड़ों में जोरदार ग्राहकी निकलने की आशा

गर्मी के मौसम में सर्वाधिक ब्याह-शादियां ग्रामीण क्षेत्रों में होती है। 18 अप्रैल को अक्षय तृतीया है। इस समय तक रबी...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 02, 2018, 02:50 AM IST

गर्मी के मौसम में सर्वाधिक ब्याह-शादियां ग्रामीण क्षेत्रों में होती है। 18 अप्रैल को अक्षय तृतीया है। इस समय तक रबी फसलों का रुपया बड़ी मात्रा में किसानों के पास आ चुका होगा। इससे आगामी दिनों में ब्याह-शादियों की कपड़ों में जोरदार ग्राहकी निकलने की आशा रखी जाती है। रंगपंचमी बाद थोक व्यापारी साड़ियां, हलके शूटिंग्स की खरीदी शुरू करे देंगे। शहरी क्षेत्रों में गर्मी का सीजन शुरू होने से कॉटन की साड़ियां, सलवार सूट्स, कॉटन के कुर्ता, पायजामा लीनन आदि की मांग बढ़ जाएगी। भीलवाड़ा में वीविंग की दरें बढ़ गईं, प्रोसेस चाॅर्ज, कलर, केमिकल के भावों में वृद्धि के बावजूद कपड़ों के दाम उस अनुपात में नहीं बढ़ पा रहे हैं।

बाजारों से नकदी गायब

म.तु. क्लॉथ मार्केट में होली त्योहार का प्रभाव पिछले कुछ दिनों से देखा जा रहा है। पूर्व के दिनों में 50% ग्राहकी चल रही थी, अब वह भी ठंडी पड़ती जा रही। अब थोड़ी बहुत ग्राहकी यदि खुले तो रंगपंचमी बाद ही ग्राहकी निकलना शुरू हो सकती है। बाजारों से नकदी गायब हो जाने से ग्राहकी पर प्रभाव पड़ा है। यह स्थिति न केवल कपड़ा बाजार की है वरन अन्य बाजारों की भी है। धन की तंगी आए दिन बढ़ती जा रही है। बैंकों का रुख अब और सख्त हो जाएगा। ओवरड्यू वाले व्यापारियों को रुपया भरना पड़ सकता है, जिससे बाजारों में धन की तंगी बढ़ना स्वाभाविक है। उत्पादक कपड़ों का उत्पादन मांग से कुछ कम मात्रा में कर रहे हैं। यदि साड़ियां जैसी आयटम में जोरदार मांग निकल गई तो बाजार में कमी महसूस होने लग सकती है। मप्र बड़ी मात्रा में रुपया इसके बाद ही आएगा। 15 मार्च के पूर्व ऐसे किसान जिनके पास उत्पादन कम है अथवा रुपए की सख्त जरूरत है। थोड़ी- बहुत मात्रा में गेहूं, चना बेच रहे हैं।

बैंक व्यवहार में परिवर्तन

पीएनबी एवं अन्य घोटालों के बाद अब बैंकों के व्यवहार में परिवर्तन आने लगा है। कुछ बैंकों के सॉफ्टवेयर अपडेट होने से ग्राहकों के चेक क्लियर होने में समय लग रहा है। पहले बैंक के साथ अच्छे संबंध होने पर चेक पास पर देती थी। अब स्थिति बदलती जा रही है। बैंकों ने व्यापारियों को खुले हाथ से जो सुविधाएं दे रखी है, उसमें कटौती होना ही है। मार्च माह में एडवांस टैक्स, ब्याज, दलाली आदि का हिसाब भी अनेक शहरों में होता है। उधारी वापस आने की गति सर्वविदित है, जिससे बाजार में धन की तंगी बढ़ सकती है। रियल इंस्टेट ठंडा पड़ गया है, जो एक-दो वर्ष तक उठता नजर नहीं आ रहा है। शेयर बाजार की चाल में ब्रेक लग रहा है। अनेक कपड़ा व्यापारियों का रुपया जमीन-जायदाद में उलझा हुआ है। इस वजह से भी आर्थिक संकट झेल रहे हैं।

कपड़ा मिलों को लाभ

भीलवाड़ा की मिलें पूर-जोर शोर से चल रही हैं। वीविंग दर ऊंची होने से चाहे स्वयं का कपड़ा बनाए अथवा जॉबवर्क करें दोनों में लाभ ही लाभ है। जॉब वर्क में केवल मशीनें ही चलाना है। भीलवाड़ा में यूनिफाॅर्म के कपड़े का उत्पादन हो रहा है। कंचन मिल यूनिफाॅर्म के कपड़े पी 72 का नया भाव 78.25 रुपए बोलने लगी है जबकि बाजार में अभी 76.25 रुपए के भाव चल रहे हैं। आगे-पीछे लेवालों को 78.25 रुपए मीटर का कपड़ा खरीदना होगा। अप्रैल-मई में थोक व्यापारी यूनिफाॅर्म का कपड़ा खरीदना शुरू कर देंगे।

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Web Title: आगामी दिनों में ग्रामीण इलाकों में कपड़ों में जोरदार ग्राहकी निकलने की आशा
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