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प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के लिए पुलिस ने जिला प्रशासन के पास भेजे तीन साल पुराने मामले

ये वे केस हैं जो इंदौर पुलिस ने भोपाल में भेजे हैं कि उन्होंने सात दिन में महिला अपराध से जुड़े 522 प्रकरण जिला...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:50 AM IST

ये वे केस हैं जो इंदौर पुलिस ने भोपाल में भेजे हैं कि उन्होंने सात दिन में महिला अपराध से जुड़े 522 प्रकरण जिला प्रशासन को बाउंड ओवर के लिए भेजे, लेकिन इन पर कार्रवाई नहीं हुई। प्रशासन ने इन प्रकरणों को खंगाला तो पता चला कि पुलिस ने जो अधिकांश प्रकरण भेजे, वे साल 2015 से 2018 तक महिला आवेदकों द्वारा दर्ज की गई पुरानी एफआईआर का ही नया रूप है, जिसमें पुलिस ने आरोपियों द्वारा शांति भंग होने की आशंका व्यक्त करते हुए धारा 107, 116 में प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करने के लिए कहा है।

गुंडों पर कार्रवाई के लिए यह है प्रतिबंधात्मक धाराएं, जो एसडीएम कोर्ट में आती हैं

धारा 107 व 116- यह मुख्य धाराएं जो दंडात्मक नहीं होकर निवारक (अपराध रोकने वाली) है। इसमें किसी से शांति भंग होने की आशंका को देखते हुए पुलिस प्रकरण एसडीएम के सामने पेश करती है और एसडीएम वारंट जारी कर संबंधित को पक्ष रखने का कहता है और फिर अधिकतम एक साल के लिए बाउंड ओवर करा सकता है।

धारा 109- संदिग्ध परिस्थिति में घूम रहा है और अपनी जानकारी नहीं दे रहा, तब पुलिस उपयोग में लाती है और एसडीएम को पेश करती है

धारा 110- इसमें बार-बार अपराध करने वाले के खिलाफ पुलिस प्रकरण पेश करती है, यह आदतन अपराधी के लिए होता है।

धारा 122- जब कोई बार-बार अपराध करे और इसे सुधारा नहीं जा सकता, तब यह धारा लगती है।

धारा 151- यह तब जब पुलिस को लगता है कि उसे गिरफ्तार किए बिना अपराध रोका जाना संभव नहीं है।

पीड़ित रानवाई ने 1 अगस्त 2015 को छेड़छाड़ की शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें पुलिस ने प्रकरण भी दर्ज कर लिया। अब 21 मार्च को पुलिस ने आरोपी पर अब प्रतिबंधात्मक धारा यह कहकर लगाई है कि मोहल्ले में आरोपी के विरुद्ध काफी आक्रोश है।

केस 1

जिलाबदर- आदतन अपराधी, जिस पर प्रकरणों का इतिहास हो और अभी भी अपराध कर रहा हो उन्हें जिले से बाहर रहने के आदेश अपर कलेक्टर कोर्ट से होते हैं।

रासुका- राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा होने पर पुलिस द्वारा कलेक्टर के सामने केस लाया जाता है, इसमें सीधे जेल भेजा जाता है।

गुंडों पर कार्रवाई के लिए पुलिस आगे बढकर सख्त कार्रवाई करती है और कई बार अपराध होने की आशंका में भी वह प्रतिबंधात्मक धाराओं का उपयोग करती है। इन मामलों में एसडीएम कोर्ट भी अधिकांश मामलों में पुलिस के प्रकरण को मान्य कर कार्रवाई करता है। जानकारों के अनुसार वारंट तामीली को लेकर यदि दोनों संस्थाओं में तालमेल बेहतर हो जाए तो गुंडे हर तरह से कानून के दायरे में आ सकेंगे।

केस टू- महिला अकीला ने 1 अगस्त 2015 में आरोपी के खिलाफ छेड़छाड़ का प्रकरण दर्ज कराया। पुलिस ने 22 मार्च को प्रकरण पेश करते हुए लिखा कि आरोपी के खिलाफ मोहल्ले में आक्रोश है।

केस 2

4 अप्रैल को कमिश्नर ने बुलाई जिला बदर, बाउंड ओवर, रासुका, महिला अपराध पर कलेक्टर और पुलिस अधिकारियों की बैठक

कानून-व्यवस्था के मामले में जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारी क्या कर रहे हैं? इसकी समीक्षा के लिए 4 अप्रैल को कमिश्नर संजय दुबे ने अपने कार्यालय में संभागीय बैठक बुलाई है। कमिश्नर ने जारी पत्र में इंदौर सहित सभी कलेक्टर और पुलिस अधिकारियों से जिला बदर और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के मामले में की गई कार्रवाई, प्रतिबंधात्मक धारा 107, 116 व अन्य में की गई बाउंड ओवर की कार्रवाई के साथ ही महिला अपराध, अनुसूचित जाति व जनजाति के प्रति अपराध आदि की भी जानकारी मांगी गई है।

गुंडों पर लगाम कसने और आमजन को राहत देने के लिए पुलिस और प्रशासन दोनों अपना काम कर रहे हैं, वारंट तमीली बढ़ने से बाउंडओवर सौ फीसदी हो जाएगा। - निशांत वरवड़े, कलेक्टर

केस थ्री- महिला जमना बाई की शिकायत पर पुलिस ने 23 जुलाई 2015 को प्रकरण पंजीबद्ध किया और अब 20 मार्च को एसडीएम कोर्ट में प्रतिबंधात्मक धारा में केस भेजा कि आरोपी द्वारा फिर से छेड़छाड़ की घटनाओं की आशंका है।

केस 3

गुंडों पर सख्ती के लिए और वह किसी तरह के अपराध अंजाम नहीं दे सकें, इसके लिए पुलिस लगातार प्रतिबंधात्मक धाराएं लगाकर कार्रवाई कर रही है। खास तौर से महिला सुरक्षा के लिए सभी सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। प्रशासन के साथ समन्वय कर और कार्रवाई की जाएगी। - हरिनारायणाचारी मिश्र, डीआईजी

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Web Title: प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के लिए पुलिस ने जिला प्रशासन के पास भेजे तीन साल पुराने मामले
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