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पीड़ित की सेवा सच्चा धर्म है : डॉ. विरुलकर

पीड़ित मानवता की सेवा ही सच्चा धर्म है। आज भी ग्रामीणों को स्वास्थ्य चिकित्सा व जांच जैसी सुविधाओं के लिए संघर्ष...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 02:50 AM IST
पीड़ित मानवता की सेवा ही सच्चा धर्म है। आज भी ग्रामीणों को स्वास्थ्य चिकित्सा व जांच जैसी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उच्च शिक्षित हर युवा के मन में पद, प्रतिष्ठा और पैसा होता है और यह सब विदेश, महानगरों में आसानी से उपलब्ध है। मरीज की न्यूनतम संसाधनों व कम लेबोरेटरीज जांच में इलाज करना सदैव बड़ी चुनौती रहा है। गांवों में यह सब चुनौतियां मेरे समक्ष भी रही पर मेरे गुरु डाॅ. सिपाहा व डाॅ. मुखर्जी के साथ ही पिता कालूराम विरुलकर और पिता तुल्य वसंतराव प्रधान की मानवता सेवा की प्रतिबद्धता ने मुझे सदैव ग्रामीण मरीजों की सेवा के लिए प्रेरित किया। मेरी सेवा में आय संपन्नता के लिए नहीं केवल जीविकोपार्जन की रही। यह बात वरिष्ठ चिकित्सक डाॅ. शरद विरुलकर ने अपने सम्मान समारोह में कही।

ट्रस्ट के अध्यक्ष करनसिंह पवार, सदस्य अनंत अग्रवाल ने चिकित्सा के क्षेत्र में डाॅ. विरुलकर के योगदान को एक अनुकरणीय पहल बताया। विक्रम ज्ञान मंदिर के सदस्य प्रदीप जोशी, देवेंद्र रुनवाल, प्रमोद देवासकर, कुशल शर्मा, रमेश अग्रवाल आदि ने शॉल-श्रीफल व पुष्पगुच्छ भेंट कर डाॅ. विरुलकर का सम्मान किया। इसके बाद विक्रम ज्ञान मंदिर समिति की वर्ष 2017-18 की साधारण सभा की बैठक हुई।

जिला लाइब्रेरी वापस राजबाड़ा में होगी स्थापित

समिति अध्यक्ष कलेक्टर श्रीमन शुक्ला द्वारा जिला लाइब्रेरी को वापस राजबाड़ा में उसके मूल स्थान पर स्थापना के लिए व शिक्षा मंत्री विजय शाह द्वारा लाइब्रेरी के बकाया किराए के भुगतान के लिए केबीनेट अनुमोदन प्रयास के लिए धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया। सचिव जोशी ने वर्ष 17- 18 के आय व्यय का अनुमोदन किया। कोषाध्यक्ष प्रमोद देवासकर ने बताया भवन के रखरखाव व उन्नयन के लिए सदस्यों के प्रस्तावों को पारित किया। विक्रम ज्ञान मंदिर पर सोलर सिस्टम लगाने व आगामी कार्रवाही के लिए रखे प्रस्ताव व भवन में दो किरायेदारों से स्थान रिक्त करवाने का प्रस्ताव भी पारित किया। संचालन सदस्य डाॅ. दीपेंद्र शर्मा ने किया।

धार. विक्रम ज्ञान मंदिर में डॉक्टर का सम्मान करते सदस्य।