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न्यायालय का निर्णय एसटी-एससी समाज के हितों का हनन है, विरोध जताया

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एससी-एसटी एक्ट की धारा में संशोधन का निर्णय दिया है। जिसके विरोध में मप्र अनुसूचित जाति...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:50 AM IST

न्यायालय का निर्णय एसटी-एससी समाज के हितों का हनन है, विरोध जताया
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एससी-एसटी एक्ट की धारा में संशोधन का निर्णय दिया है। जिसके विरोध में मप्र अनुसूचित जाति जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ (अजाक्स) ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन प्रशासन को दिया। जिसमें बताया एससी-एसटी एक्ट की धारा 18 के अनुसार दंड संहिता 1993 की धारा 438 को यथावत रखी जाए। जिसमें अपराधी व्यक्ति को कोई अग्रिम जमानत नहीं मिलती है। परिणाम स्वरूप व्यक्ति की सीधी गिरफ्तारी होती थी। उक्त धारा को उच्चतम न्यायालय द्वारा गैर संवैधानिक प्रेषित कर दिया। जो एससी-एसटी समाज के हितों के लिए हनन होगा। अजाक्स संघ ने उच्चतम न्यायालय के द्वारा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के संदर्भ में जारी किए हुए निर्देशों पर पुनः विचार करने के लिए रिव्यू पिटीशन दायर करने की मांग की। ज्ञापन का वाचन शिवनारायण डावर एवं संचालन महासचिव महेंद्रसिंह निंगवाल ने किया। कोषाध्यक्ष डाॅ. दारासिंह वास्केल, जीवन मकवाना, मजान सिंह चौगड़, डाॅ. कमल अलावा, डाॅ. ईश्वर सिंह डावर समेत अजाक्स जिला-तहसील व ब्लाॅक पदाधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद थे। जानकारी जिला मीडिया प्रभारी भुवान सिंह बघेल ने दी।

धार. अजाक्स संघ ने प्रशासन को दिया ज्ञापन।

आज निसरपुर बंद रखने का आह्वान

निसरपुर. आदिवासी हरिजन जाति के लोग सुप्रीम कोर्ट के आरक्षण के फैसले के विरोध में भारत बंद के तहत सोमवार को निसरपुर नगर बंद रखा जाएगा। रविवार दोपहर 3 बजे नगर में मुनादी कर व्यापारियों से प्रतिष्ठान बंद रखने का आह्वान किया।

बाजार बंद करने का आह्वान किया

नालछा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए आदेश में संशोधन को लेकर अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के लोगों के साथ आंबेडकर व जयस संगठन ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन थाने के एसआई एस राठौर दिया। इसमें बताया आदेश से संबंधित लोगों का आर्थिक एवं सामाजिक नुकसान होगा। सरकार अप्रत्यक्ष रूप से संरक्षण देने वाले मौजूद कानून को समाप्त करने का प्रयास कर रही है। अांबेडकर ग्रुप इसका विरोध करताा है। न्यायालय के समक्ष एक समीक्षा याचिका दायर कर कानून में संशोधन करने की मांग की। एक्ट के संशोधन को लेकर नाराजगी जाहिर कर मंगलवार को साप्ताहिक हाट बाजार को पूर्णत: बंद करने का भी आह्वान किया।

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