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बड़े भाई ने नाम रख दिया मध्यप्रदेश, आधार कार्ड दिखाने पर ही यकीन करते हैं लोग

मनावर तहसील के गांव भमोरी में रहते हैं मध्यप्रदेश सिंह। फिलहाल झाबुआ पीजी कॉलेज में अतिथि विद्वान हैं और भूगोल...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 02:55 AM IST
मनावर तहसील के गांव भमोरी में रहते हैं मध्यप्रदेश सिंह। फिलहाल झाबुआ पीजी कॉलेज में अतिथि विद्वान हैं और भूगोल पढ़ाते हैं। पहली बार नाम सुनने पर हर कोई यकीन नहीं करता। आधार कार्ड दिखाने पर ही मानते हैं।

मध्यप्रदेश सिंह बताते हैं-हम 9 भाई-बहन हैं। मैं सबसे छोटा हूं। मेरे जन्म के वक्त सबसे बड़े भैया राधुसिंह अमलावर (गिरदावर) किशाेरावस्था में थे। स्कूल जाते थे। उन्हें वहां पढ़ाया गया कि हम मध्यप्रदेश में रहते हैं। कुछ अलग नाम रखने की उनकी जिद थी, इसलिए उन्होंने मेरा नाम मध्यप्रदेश सिंह रख दिया। मध्यप्रदेश सिंह श्योपुर कॉलेज में भी अतिथि विद्वान रह चुके हैं। नवंबर 2017 से झाबुआ के पीजी कॉलेज में पढ़ा रहे हैं। एमए, एमफिल कर चुके मध्यप्रदेश सिंह ने एमपी सेट परीक्षा पास की। पीएचडी कर रहे हैं। वे बताते हैं-नाम बताते ही लोग हैरत में पड़ जाते हैं। मानने को ही तैयार नहीं होते।

मकान की वायरिंग खरीदने गए, आधार दिखाया, तब बनाया बिल

कुछ दिन पहले ही इंदौर अपने मकान की वायरिंग खरीदने के लिए गया था। कुछ रुपया सीधे खाते में जमा कराना था। इसके लिए दुकानदार को नाम बताया तो बिल पर लिखने काे तैयार ही नहीं हुआ। आधार कार्ड बताया, तब बिल बनाया।

बढ़ती गई पढ़ाई में रुचि, साल दर साल बेहतर हुआ परिणाम

मध्यप्रदेश सिंह शुरुआत में पढ़ाई में रुचि नहीं लेते थे लेकिन साल दर साल रुचि बढ़ी और परिणाम भी बेहतर होता गया। 10वीं में उन्हें 42.8 प्रतिशत अंक हासिल हुए थे। ग्रेजुएशन में 64.33 प्रतिशत अंक आए। एम फील में 79.5 प्रतिशत अंक हासिल किए। फिर स्टेट सेट परीक्षा पास की। वे बताते हैं-कॉलेज में विद्यार्थी भी नाम मध्यप्रदेश रखने का कारण पूछते रहते हैं।