--Advertisement--

योग सप्ताह में रंगों के प्रयोग भीतर भी करें

रंगों की जितनी विशेषताएं होती हंै उनमें से एक यह है कि उनका अपना कोई रंग नहीं होता। एक में दूसरा मिला दो तो रंग बदल...

Danik Bhaskar | Mar 02, 2018, 04:10 AM IST
रंगों की जितनी विशेषताएं होती हंै उनमें से एक यह है कि उनका अपना कोई रंग नहीं होता। एक में दूसरा मिला दो तो रंग बदल जाता है। जीवन भी इसी तरह होता है। पता नहीं कब, किसके रंग में रंगना पड़ जाए। होली के त्योहार पर जब हम बाहर से अपने या दूसरे के शरीर को रंग रहे हों उस समय अंतरराष्ट्रीय योगा सप्ताह मनाते हुए रंगों के प्रयोग भीतर भी करिए। हमारा एक शरीर जो बाहर दिख रहा है, भीतर से सात शरीर में बंटा है और उन सातों का अपना एक अलग-अलग रंग है। पहला शरीर मूलाधार है, जिसका रंग लाल है, इसके बाद स्वाधिष्ठान नारंगी, मणिपुर पीला, अनाहत हरा, विशुद्ध नीला, आज्ञाचक्र बैंगनी तथा सातवें चक्र सहस्त्रार का रंग सुनहरा पीला है। जब-जिस चक्र पर ऊर्जा होगी, आपके स्वभाव को वैसा ही प्रभावित करेगी। ऊर्जा जितनी नीचे होगी, आप उतने ही अधिक अशांत रहेंगे। इस ऊर्जा को जितना ऊपर उठाएंगे, उतने ही मस्त, प्रसन्न और शांत रहेंगे। नीचे से ऊपर ऊर्जा ले जाने के लिए योग एक माध्यम है। इसलिए कितने ही व्यस्त रहें, इस दौरान आपके पास योग की जो भी विधि हो उससे कीजिए अन्यथा हनुमान चालीसा से मेडिटेशन की सरल विधि है ही। हनुमानजी शांति के दूत हैं। लोग भले ही उन्हें बलशाली मानें, अखाड़े का देवता कह लें पर सच तो यह है कि हनुमानजी की उपस्थिति से रोम-रोम में शांति बसती है। इसलिए इस अंतरराष्ट्रीय योगा सप्ताह के अवसर पर हनुमानजी से जरूर जुड़े रहिएगा।

जीने की राह कॉलम पं. विजयशंकर मेहता जी की आवाज में मोबाइल पर सुनने के लिए टाइप करें JKR और भेजें 9200001164 पर



पं. िवजयशंकर मेहता

humarehanuman@gmail.com