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ट्रैफिक संसाधनों के लिए ढाई करोड़ मंजूर, पर फोर्स 850 में से सिर्फ 393

... लेकिन यहां दिखाई फुर्ती मंजूरी 1 थाने की, बना दिए 3, सवाल बिना स्टाफ चलेंगे कैसे? दीपेश शर्मा | इंदौर हाल...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 04:20 AM IST

ट्रैफिक संसाधनों के लिए ढाई करोड़ मंजूर, पर फोर्स 850 में से सिर्फ 393
... लेकिन यहां दिखाई फुर्ती

मंजूरी 1 थाने की, बना दिए 3, सवाल बिना स्टाफ चलेंगे कैसे?

दीपेश शर्मा | इंदौर

हाल ही में इंदौर आए डीजीपी ऋषि कुमार शुक्ला ने शहर की ट्रैफिक की समस्या को देखकर इससे निपटने के लिए ढाई करोड़ रुपए स्वीकृत किए। पुलिस ने इस राशि से खरीदे जाने वाले सामान का प्रस्ताव भी ताबड़तोड़ भेज दिया, लेकिन सवाल यह है कि संसाधन चलाने के लिए फोर्स तो चाहिए, जो कहां से आएगा? इंदौर की जनसंख्या 25 लाख से ज्यादा है। इसके बावजूद यहां ट्रैफिक का एक ही थाना स्वीकृत है। छह साल पहले तत्कालीन गृह मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने इंदौर में 10 ट्रैफिक थाने खोले जाने की घोषणा की थी। बाद में इसे घटाकर चार किया गया। दो साल पहले एक और थाना स्वीकृत करने का प्रस्ताव भेजा गया, उसे भी स्वीकृति नहीं मिली।

लाइन से फोर्स मिले तब भी समस्या

1983 से शहर में ट्रैफिक पुलिस के लिए एक ही थाना एमटीएच कम्पाउंड में स्वीकृत है। पश्चिम क्षेत्र में बढ़ते ट्रैफिक के दबाव को देखते हुए ट्रैफिक कंट्रोल रूम से स्वीकृत एमओजी लाइन्स के भवन में ट्रैफिक थाना पश्चिम के नाम से संचालित हो रहा है। थाने की मंजूरी नहीं मिलने के कारण यहां कोई व्यवस्था नहीं है। पिछले कुछ सालों में लगातार किए जा रहे पत्राचार के बाद ट्रैफिक पुलिस का फोर्स 850 स्वीकृत किया जा चुका है, लेकिन उपलब्धता आधी भी नहीं है। डीआरपी लाइन से अगर फोर्स तैनात कर दिया जाए तो भी एक ही थाने से संचालन कैसे होगा?

14 लाख वाहनों पर फाेर्स 393 का ही

इंदौर जिले में 14 लाख से ज्यादा दो व चार पहिया वाहन हैं। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन के साथ ही 59 चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल लग चुके हैं। 28 चौराहों पर आरएलवीडी कैमरों से चालान बन रहे हैं। इसके बावजूद ट्रैफिक पुलिस फोर्स 393 का ही उपलब्ध है। इसी फोर्स के साथ ट्रैफिक पुलिस को दो शिफ्ट मंे ड्यूटी और अन्य व्यवस्थाएं देखना होती हैं।

मप्र पुलिस हाउसिंग काॅर्पोरेशन ने तीन करोड़ रुपए में शहर के तीन ट्रैफिक थानों के लिए बिल्डिंग तैयार कर दी है लेकिन सवाल अब भी वही है कि थाना तो एक ही मंजूर है। ऐसे में बाकी थानों का संचालन किस तरह किया जाएगा?

3 करोड़ के ये थाने कहीं खाली स्मारक न बनकर रह जाएं

तीन ट्रैफिक थानों की बिल्डिंग एमटीएच कम्पाउंड, एमओजी लाइन्स और पीपल्याहाना चौराहे पर बना दी गई हंै। तीन महीने में ही सारा काम पूरा हो जाएगा। एक बिल्डिंग की लागत एक करोड़ रुपए है। अब सवाल है कि तीनों भवन संचालित कैसे होंगे? भास्कर ने कॉर्पाेरेशन के अधीक्षण यंत्री एनके उपाध्याय से बात की तो उन्होंने बताया शासन से भवन बनाने की मंजूरी मिली थी। इसके आधार पर ही भवन तैयार किए गए हैं।

एमओजी लाइंस थाना

एमटीएच कम्पाउंड थाना

जितना होना चाहिए, अमला उससे आधा

पद स्वीकृत उपलब्ध कमी

एएसपी 1 1 -

डीएसपी 5 4 1

इंस्पेक्टर 53 6 47

सूबेदार 26 13 13

एसआई 08 6 2

एएसआई 120 53 67

प्रधान आरक्षक 215 145 70

आरक्षक 422 165 257

कुल 850 393 457

पीपल्याहाना थाना

सीधी बात

थाने की मंजूरी शासन के हाथ में

 ट्रैफिक के लिए आपने 2.50 करोड़ रुपए स्वीकृत किए। थाने का क्या होगा?

फोर्स बढ़ाने के लिए शासन के पास प्रस्ताव भेजा गया है।

 बिना स्वीकृति के शहर में ट्रैफिक के तीन थानों की बिल्डिंग तैयार हो गई। इनका क्या होगा?

भवन उपयोग में आए यह हम सुनिश्चित करेंगे।

 ट्रैफिक के थाने स्वीकृत करने में कहां दिक्कत आ रही है?

इसका निर्णय शासन के हाथ में है। हम प्रयासरत हैं।

ऋषिकुमार शुक्ला, डीजीपी

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Web Title: ट्रैफिक संसाधनों के लिए ढाई करोड़ मंजूर, पर फोर्स 850 में से सिर्फ 393
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