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किसानों से 452 करोड़ रुपए प्रीमियम वसूलने वालीं बीमा कंपनियों ने कहा- नहीं पता कितने कवर हैं

प्रदेश की बैंकों ने 42 लाख से ज्यादा किसानों का बीमा प्रीमियम काटकर बीमा कंपनियों के पास जमा कराया, लेकिन बीमा...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 04:20 AM IST

प्रदेश की बैंकों ने 42 लाख से ज्यादा किसानों का बीमा प्रीमियम काटकर बीमा कंपनियों के पास जमा कराया, लेकिन बीमा कंपनियों के पास यह आंकड़े नहीं हैं कि उन्होंने प्रीमियम मिलने के बाद कितने किसानों को कवर दिया। बैंकों ने प्रदेश के किसानों के खातों से 452 करोड़ रुपए का प्रीमियम काटकर तीन बीमा कंपनियों के खाते में जमा कराया था। हालिया ओलावृष्टि के बाद मप्र सरकार के कृषि विभाग ने बैंक और बीमा कंपनियों की एक बैठक ली थी। इसमें यह सवाल उठा कि जारी वर्ष में कितने किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीआई) से जुड़े हैं। इस पर बैंकों ने तत्काल अपनी रिपोर्ट पेश की। इसमें बताया गया कि जितना प्रीमियम काटा गया है उस हिसाब से 42 लाख किसान इस योजना से जुड़ चुके हैं, लेकिन जब बीमा कंपनियों से पूछा गया कि वे कितने किसानों को बीमा दे चुके हैं, तो वे इसका जवाब ही नहीं दे पाए। उनका तर्क था कि प्रीमियम कटने का मतलब यह नहीं है कि किसान को बीमा मिल गया। राज्य सरकार ने जिस जिले में जिस फसल को बीमा कवर के दायरे में रखा है, वहां उसी फसल का प्रीमियम जमा कराने वाले को बीमा दिया जाएगा। कई किसान ऐसे हैं जिनकी फसलें बीमा के दायरे में आती ही नहीं। ऐसे में उन्हें बीमा कैसे दिया जा सकता है। इसके बाद बीमा कंपनियों यह यह पूछा गया कि उन्होंने ऐसे कितने किसानों के प्रीमियम लौटाए जो इसके हकदार नहीं थे। उनके पास इसकी भी कोई जानकारी नहीं थी। नाराज अधिकारियों ने इसकी शिकायत केंद्र सरकार से की है।

ओलावृष्टि के बाद किसानों को राहत पहुंचाने के लिए हुई बैठक में सामने आई हकीकत

दो टूक... प्रीमियम कटने का मतलब यह नहीं कि किसान को बीमा मिल गया, जो फसल बीमा के दायरे में, सिर्फ उसी फसल का दिया जाएगा क्लेम

25% किसान प्रीमियम देने के बाद भी बीमा कवर से वंचित

प्रदेश के 31 जिलों में काम कर रही सरकारी क्षेत्र की एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी (एआईसी) के पास 20 लाख किसान कवर थे। शेष 20 जिलों में काम कर रहीं कंपनियों ने अब तक 10 से 12 लाख किसानों को कवर किया है। इस आधार पर करीब 10 लाख किसान ऐसे हैं, जो प्रीमियम जमा कराने के बाद भी बीमा कवर पाने से वंचित रह गए। बैंक बतौर प्रीमियम इनसे 100 करोड़ रुपए से ज्यादा काट चुके हैं। हर किसान से औसतन 1000 रुपए का प्रीमियम लिया गया है।

नाबार्ड ने भी माना बीमा अाकलन के तरीके में सुधार की जरूरत

पीएमएफबीवाई के तहत 42.15 लाख किसानों को बीमा कवर दिया गया है। प्रदेश में करीब 1 करोड़ से ज्यादा किसान हैं। इस लिहाज से सिर्फ 42.15% किसानों काे ही बीमा कवर दिया गया है। सरकार की योजना वित्तीय वर्ष 18-19 में 50 लाख किसानों को दायरे में लाने की है। प्रदेश में 51 जिलों में तीन बीमा कंपनियां काम कर रही हैं। इनमें एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कॉरपोरेशन, आईसीआईसीआई लोंबार्ड, एचडीएफसी एर्गो शामिल हैं।

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Web Title: किसानों से 452 करोड़ रुपए प्रीमियम वसूलने वालीं बीमा कंपनियों ने कहा- नहीं पता कितने कवर हैं
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