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कॉटन व सिंथेटिक यार्न में तेजी से सभी कपड़ों में 4 से 7 रुपए मीटर की वृद्धि

कॉटन और सिंथेटिक यार्न में तेजी की वजह से लगभग सभी तरह के कपड़ों में 4 से 7 रुपए प्रति मीटर की भाव वृद्धि हो गई है। इस...

Dainik Bhaskar

Sep 13, 2018, 02:36 AM IST
कॉटन और सिंथेटिक यार्न में तेजी की वजह से लगभग सभी तरह के कपड़ों में 4 से 7 रुपए प्रति मीटर की भाव वृद्धि हो गई है। इस भाव वृद्धि को बाजार ने पचा भी लिया है अथवा पचाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। कम भाव पर कपड़ा मिलना अब संभव नहीं रहा। कॉटन यार्न एवं क्रूड तेल के भावों में तेजी का दौर थम नहीं रहा है। श्राद्धपक्ष के बाद खेरची व्यापारियों की खरीदी शुरू हो जाएगी। वर्तमान में पर्यूषण पर्व चल रहे हैं एवं वर्षाकाल का अंतिम चरण होने से ग्राहकी कमजोर बनी हुई है। मंडियों में स्टॉक की कमी है और मिलें भी उतना ही कपड़ा बना रही हैं जितनी मांग है। कच्चे माल और तैयार कपड़ों पर जीएसटी लागू हो जाने से उत्पादकों की पूंजी जाम होने लगी है। अनेक बार कम्पोजिट मिलें मजदूरों को वेतन बांटने या बिजली का बिल भरने के लिए लॉट में कपड़ा बेच देती हैं।

पर्यूषण पर्व

जैन-समाज के पर्यूषण पर्व चलने की वजह से कपड़ा बाजारों में ग्राहकी कमजोर चल रही है। इसके अलावा अभी तक वर्षा का सीजन भी चल रहा है। जिसकी बिदाई का समय नजदीक आता जा रहा है। सामान्य रूप से 15 सितंबर के बाद से मानसून की बिदाई शुरू हो जाती है। 30 सितंबर बिदाई की अंतिम तारीख मानी जाती है। ये तारीखें मानसून विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त है। अनेक बार मानसून की वर्षा यदि देर से शुरू होती है, तो देर तक वर्षा होती है। जानकारों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में देश के कुछ राज्यों में वर्षा हो सकती है। इस वजह से कुछ क्षेत्रों में जहां भी वर्षा होगी, कपड़ों का कारोबार शिथिल पड़ सकता है। श्राद्धपक्ष में कारोबार की तैयारी केवल थोक व्यापारी नई खरीदी करना शुरू करते हैं। श्राद्धपक्ष में आम व्यक्ति अथवा आगामी वैवाहिक सीजन की तैयारी के लिए कपड़ों अन्य किसी जिंस की खरीदी शुभ नहीं मानी जाती है। पर्यूषण पर्व के कारण फिलहाल बड़ी मंडियों में खरीदी करने के लिए ग्राहक नहीं के समान उतर रहे हैं। इस धार्मिक पर्व की वजह से दुकानें भी जल्दी मंगल कर दी जाती हैं।

उत्पादकों के पास धन की तंगी

इस समय अधिकांश मंडियों में माल की कमी है। मिलें उतना ही कपड़े का उत्पादन कर रहे हैं, जितनी मांग है, इसकी प्रमुख वजह यह है कि कच्चे माल एवं जीएसटी दोनों का भुगतान पहले करना होता है। इस वजह से उत्पादकों के पास धन की तंगी बनी रहती है। बैंके भी ऋण अब इफरादी से नहीं दे रही हैं। बैंकों की सख्ती की वजह से भी मिल, व्यापारियों को तरल पूंजी की कमी महसूस होने लगी है। यह स्थिति नोटबंदी एवं जीएसटी लागू होने के बाद विशेष रूप से निर्मित होने लगी है। बाजार में चर्चा यह भी है कि कुछ कम्पोजिट मिलें माह के अंत में मजदूरों को वेतन बांटने के लिए स्टॉक माल को लॉट में नकद में बेचने लगी हैं। इस वजह से कभी-कभी बाजार में कपड़ा सस्ता मिल जाता है। जीएसटी लागू होने के पूर्व कई कपड़ा व्यापारी 200 से 500 गठान कपड़ों के सौदे कर लेते थे, बाद में जरूरत के अनुसार मिलों से उठा लिया करते थे। मिलों को वेतन, बिजली बिल आदि खर्चों के लिए पूंजी मिल जाया करती थी। अब कारोबार की परिस्थितियां एकदम बदल गई हैं। जिसका कुछ भी नहीं कर सकते हैं। सरकारी नियमों से अब कारोबार करना है।

ग्राहकी का रुझान

भीलवाड़ा में ग्राहकी का रुझान देखने को मिल रहा है। 4-7 रुपए मीटर की तेजी के साथ कपड़ा बिकने लगा है। आगामी दिनों में त्योहार आने से उत्पादकों में ग्राहकी के प्रति थोड़ा से विश्वास जागा है। इस बार कपड़े के उत्पादन और कारोबार को केरल, आसाम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और कर्नाटक के कुछ भागों में अतिवृष्टि ने बुरी तरह से प्रभावित किया है। केरल की ग्राहकी तो बुरी तरह से पीट गई है। मुंबई- अहमदाबाद वालों की उधारी या तो डूब गई अथवा कब आएगी, यह अंदाजा लगाना भी कठिन है।

नए कपड़ों का चलन

सूरत के कपड़ा उत्पादक बाजार की मंदी में अपना स्थान बनाए रखने के लिए निरंतर नए-नए प्रयास कर रहे हैं। आगामी महीनों में सूरत से कुर्ती, लेगिंग्स, पीसी (पोलिस्टर कॉटन) मिक्स पैंट का कपड़ा, बनाना शुरू कर दिया है। उपरोक्त कपड़ा प्रचलन में बहुत जल्दी आ गया है। कुर्ती, गाउन तथा रेडीमेड गारमेंट्स लगने वाला कपड़ा तमिलनाडु से आता है। पिछले कुछ महीनों से सूरत में इस कपड़े की मांग बढ़ गई है। सूरत के व्यापारी तमिलनाडु के इरोड़ से ग्रे कपड़ा मंगवा कर उसकी प्रिंट और डाईंग कराते हैं।

पाइप लाइन खाली है

खेरची कपड़ा बाजार में पाइप लाइन खाली है। श्राद्धपक्ष के बाद आगामी दशहरा, दीपावली और वैवाहिक सीजन की तैयारी के लिए खरीदी करने उतरने लगेंगे। काॅटन यार्न के भावों में तेजी की वजह से उच्च किस्म के सभी क्वालिटी के कपड़ों में 4 से 5 रुपए मीटर की तेजी देखने को मिल रही है। कच्चे तेल के भावों में वृद्धि की वजह से सिंथेटिक यार्न में तूफानी तेजी आती जा रही है। तेजी की वजह से सूरत, भीलवाड़ा, मालेगांव, इचलकरंजी उत्पादक केंद्रों पर सभी किस्म के कपड़ों में 4 से 7 रुपए मीटर की भाव वृद्धि हो गई है। कपड़ों के नए सौदे नए भावों पर होने लगे हैं।

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