डिग्री है, लेकिन क्या आप नौकरी के लिए तैयार हैं? / डिग्री है, लेकिन क्या आप नौकरी के लिए तैयार हैं?

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Bhaskar News Network

Sep 03, 2018, 02:35 AM IST
डिग्री है, लेकिन क्या आप नौकरी के लिए तैयार हैं?
डिया स्किल्स रिपोर्ट, 2018 के मुताबिक पिछले पांच सालों में भारतीय ग्रेजुएट्स की एम्प्लॉयएबिलिटी(रोजगार क्षमता) 34 प्रतिशत से बढ़कर 45.6 प्रतिशत हुई है। यह आंकड़ा उत्साहजनक हो सकता है, लेकिन सच यह भी है कि अभी भी युवाओं की आधी आबादी जॉबरेडी नहीं है। इसका अर्थ है कि उनके पास डिग्री है, लेकिन काम के लिए जरूरी स्किल्स नहीं हैं। जबकि वर्तमान जॉब मार्केट में क्वालिफिकेशन के साथ-साथ स्किल्स भी जरूरी हैं क्योंकि रिक्रूटर्स अब ज्यादा से ज्यादा स्किल्ड वर्कफोर्स पर ही फोकस कर रहे हैं। यही वजह है कि स्टूडेंट्स का रुझान भी उन कोर्सेज की ओर बढ़ रहा है, जो लर्निंग के साथ-साथ ट्रेनिंग भी दे रहे हैं। दूसरी ओर कॉलेज भी इस सिलसिले में इंडस्ट्री बॉडीज व कॉर्पोरेट्स के साथ साझेदारी कर रहे हैं ताकि लर्निंग इकोसिस्टम को मजबूती दी जा सके और जॉबरेडी वर्कफोर्स तैयार हो सके। इतना ही नहीं विशेषज्ञों की राय में, भविष्य के जॉब्स के लिए डिग्री के साथ ऑटोमेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बड़ी मात्रा में डेटा एनालिसिस की कैपेसिटी चाहिए। साथ ही मल्टीपल रोल्स, लोकेशंस और वर्क कल्चर में काम करने की खूबी भी जरूरी है। अनंत नेशनल यूनिवर्सिटी में प्रोवोस्ट प्रमथ सिन्हा के अनुसार, अब मल्टीडिसिप्लीनरी थिंकिंग, स्ट्रैटजिक डिसिजन मेकिंग, क्रिएटिव प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स की मांग बढ़ रही है। कुल मिलाकर काम की नॉलेज व प्रोफेशनल स्किल्स दोनों ही अब बेहद जरूरी हैं। ऐसे में अगर आप सिर्फ डिग्री के साथ नौकरी की राह पर आगे बढ़ रहे हैं तो सफलता की संभावना कम है, इसके बजाय स्किल डेवलपमेंट पर मेहनत करना आपके लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।

अप्रेंटिसशिप मॉडल

टीमलीज सर्विसेज में नेशनल एम्प्लॉयएबिलिटी थ्रू अप्रेंटिसशिप प्रोग्राम के वीपी सुमित कुमार की राय में, दुनिया भर में जॉबरेडी वर्कफोर्स तैयार करने और यूथ में एम्प्लॉयएबिलिटी कोशेंट बढ़ाने के लिए अप्रेंटिसशिप मॉडल अपनाए गए हैं। काम करते हुए सीखने और सीखते हुए कमाने के कॉन्सेप्ट पर आधारित यह मॉडल दुनिया भर में एम्प्लॉयेबल रिसोर्सेज तैयार कर रहा है। जर्मनी में अप्रेंटिसशिप पढ़ाई का जरूरी हिस्सा है। इसी तरह चीन में 20 मिलियन प्रशिक्षु श्रम बाजार का हिस्सा बनने के लिए तैयार हो रहे हैं। भारत में भी अप्रेंटिसशिप कई सालों पहले शुरू हो चुकी है, लेकिन इसका उपयोग ज्यादा नहीं हो पाया है। हालांकि पिछले कुछ समय में इस लर्निंग प्रोसेस में तेजी आई है। मिनिस्ट्री ऑफ स्किल डेवलपमेंट एंड आंत्रप्रेन्योरशिप द्वारा जारी नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम (एनएपीएस) एम्प्लॉयर्स व स्टूडेंट्स दोनों के लिए फायदेमंद है। इसके अलावा मिनिस्ट्री ऑफ ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट द्वारा जारी नेशनल अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग स्कीम (एनएटीएस) के तहत बोर्ड ऑफ अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग/प्रैक्टिकल ट्रेनिंग(बोट) शुरू की गई है। ऐसे में युवा अपनी स्किल्स को बेहतर बनाने व खुद को जॉब रेडी करने के लिए इन स्कीम्स का इस्तेमाल कर सकते हैं।

इंडस्ट्री लिंक्ड प्रोग्राम्स

यूनिवर्सिटीज व इंडस्ट्रीज की पार्टनरशिप्स से अब कई इंडस्ट्री लिंक्ड प्रोग्राम्स उपलब्ध हैं। अच्छी बात यह है कि ये प्रोग्राम्स सिर्फ टेक्निकल डोमेन तक सीमित नहीं हैं। बल्कि नॉन टेक्निकल स्ट्रीम्स जैसे रिटेल, हेल्थकेयर, लॉजिस्टिक्स, फाइनेंस, एचआर के लिए भी उपलब्ध हैं। इसके अलावा ऑनलाइन लर्निंग भी ट्रेडिशनल डिग्री में एक एड ऑन की तरह काम आ सकती है। आईआईटी, आईआईएम समेत कई कॉलेज स्किल्ड वर्कफोर्स तैयार करने के लिए डिजिटल लर्निंग के पैटर्न पर काम कर रहे हैं।

इंटर्नशिप्स

इंटर्नशिप किसी भी जॉब के लिए प्रोफेशनल स्किल्स सीखने में बढ़ोतरी करती है। एक अच्छी इंटर्नशिप ग्रेजुएट्स के लिए हायरिंग के मौके बढ़ा सकती है। अब कई आईटी कंपनियां इंटर्नशिप्स के साथ प्री प्लेसमेंट ऑफर भी देती हैं, जो कि किसी भी कैंडिडेट के रेज्यूमे को वजनदार बनाता है।

प्रोजेक्ट वर्क

ग्रेजुएशन व अन्य ट्रेनिंग प्रोग्राम्स में अपने वर्क डोमेन से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम करना भी आपको जॉबरेडी बनाएगा। आप चाहे हार्डवेयर फील्ड से हों या फिर सॉफ्टवेयर, कोडिंग, रिसर्च या अन्य क्षेत्रों से जुड़े हों, प्रोजेक्ट वर्क आपको रिक्रूटर्स का पसंदीदा बनाएगा।

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